इंदौर में एक और मौत: ई-रिक्शा ड्राइवर ने तोड़ा दम, परिवार बोला- दूषित पानी ने मारा, डॉक्टर बता रहे 'कैंसर'

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल त्रासदी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. इलाके में एक और ई-रिक्शा चालक की मौत ने स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा दिया है. जहां परिजन इसे दूषित पानी से होने वाली मौतों की कड़ी का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग इसे 'कैंसर' का परिणाम बता रहा है.

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नल का पानी या जहर? इंदौर की त्रासदी की एक तस्वीर (Photo: PTI) नल का पानी या जहर? इंदौर की त्रासदी की एक तस्वीर (Photo: PTI)

aajtak.in

  • इंदौर ,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:54 AM IST

MP News: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में एक 50 साल के ई-रिक्शा ड्राइवर की मौत हो गई है. पिछले कुछ दिनों में इस इलाके में दूषित पीने के पानी की वजह से कई मौतें हुई हैं, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि उनके मामले में मौत का कारण कैंसर था.

हेमंत के छोटे भाई संजय गायकवाड़ ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, "मेरे भाई की मौत दूषित पानी की वजह से हुई. बीमारी के सिर्फ 15 दिन बाद हमने उन्हें खो दिया."

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उन्होंने कहा कि हेमंत, जो ई-रिक्शा चलाते थे, अपने परिवार में अकेले कमाने वाले थे और राज्य सरकार को उन्हें मदद देनी चाहिए. दुखी संजय ने कहा, "मेरे भाई की मौत के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए."

चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने कहा कि डॉक्टरों के अनुसार, हेमंत की मौत कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट से हुई. अधिकारी ने कहा, "वह कैंसर से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था....उनकी मौत का असली कारण कैंसर है."

बता दें कि कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिल की धड़कन और सांस दोनों अचानक बंद हो जाती हैं, जिससे ऑक्सीजन और खून जरूरी अंगों, खासकर दिमाग तक नहीं पहुंच पाता.

हेमंत की अंतिम यात्रा बुधवार सुबह भागीरथपुरा स्थित उनके घर से निकली. उनके रिश्तेदारों और पड़ोसियों को उनकी दुखी मां, पत्नी और चार बेटियों को सांत्वना देना मुश्किल हो रहा था.

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उनकी सबसे छोटी बेटी मनाली ने एक रिश्तेदार की मदद से चिता को आग दी. सबसे बड़ी बेटी रिया ने कहा, "मेरे पिता को दूषित पानी की वजह से दस्त हो गए थे और हमने उन्हें एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया. जब उनकी हालत बिगड़ी, तो उन्हें दूसरे प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई."

जबकि भागीरथपुरा में दूषित पीने के पानी से लोगों के बीमार पड़ने की खबरें दिसंबर के आखिर में आने लगी थीं, निवासियों ने कहा कि वे लंबे समय से इस समस्या का सामना कर रहे थे, लेकिन नगर निगम में कई शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई.

अधिकारियों के अनुसार, इलाके के 51 ट्यूबवेल में दूषित पानी पाया गया और लैब रिपोर्ट में ई कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता चला.

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, पीने के पानी की पाइपलाइन में लीकेज के कारण टॉयलेट का गंदा पानी उसमें मिल गया था.

15 जनवरी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सौंपी गई एक स्टेटस रिपोर्ट में राज्य सरकार ने दस्त और उल्टी फैलने से सात मौतों का जिक्र किया.

शहर के सरकारी महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की एक कमेटी द्वारा तैयार की गई डेथ ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि भागीरथपुरा में कम से कम 15 मौतें इस बीमारी के फैलने से जुड़ी हो सकती हैं.

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प्रशासन ने उल्टी और दस्त फैलने के बाद जान गंवाने वाले 21 लोगों के परिवारों को 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया है. इनमें से कुछ लोगों की मौत दूसरी बीमारियों से हुई थी, लेकिन मानवीय आधार पर वित्तीय सहायता दी गई.

 स्थानीय लोगों ने भागीरथपुरा में दूषित पीने के पानी से उल्टी और दस्त के कारण मरने वालों की संख्या 25 बताई है, लेकिन नगर निगम अधिकारियों ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है.

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