रोजमर्रा के कामों में हम कई चीजों का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें टूथब्रश, टंग क्लीनर, शेविंग ब्रश, लूफा,सिलिकॉन बाथ ब्रश जैसी चीजें शामिल हैं. आमतौर पर घरों में लोग जब तक यह सभी चीजें बिल्कुल खराब नहीं हो जाती हैं, लेकिन पुराने टूथब्रश और टंग क्लीनर का इस्तेमाल करना सुनने में मामूली बात लग सकती है, मगर यह आपकी ओरल हेल्थ के लिए बिल्कुल सही नहीं है.
हम रोज मुंह की सफाई तो करते हैं, पर यह भूल जाते हैं कि जिस टंग क्लीनर से सफाई कर रहे हैं, वह खुद कितना साफ है. हर चीज की एक एक्सपायरी डेट होती है, उसी तरह इन चीजों को भी समय रहते बदल लेना चाहिए, वरना यह हमारी सेहत पर बुरा असर डाल सकती हैं. आइए जानते हैं कि टूथब्रश और टंग क्लीनर को कब तक बदल लेना चाहिए और इस बारे में रिसर्च क्या कहती है.
रोजाना सुबह उठकर सब लोग ब्रश करते हैं, यह हमारी लाइफ का सबसे जरूरी हिस्सा होता है. ऐसे में सभी को यह समझना जरूरी है कि टूथब्रश को एक समय के बाद रिप्लेस कर देना चाहिए. ज्यादातर डेंटिस्ट और हेल्थ सेंटर मानते हैं कि एक टूथब्रश की अधिकतर उम्र 3 महीने होती है.
‘अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन’ (एडीए) की रिसर्च के अनुसार, 3 से 4 महीने के नियमित इस्तेमाल के बाद ब्रश के ब्रिसल्स यानी रेशे मुड़ने और फैलने लगते हैं. जब ब्रिसल्स अपनी सीध खो देते हैं, तो वे दांतों के कोनों और मसूड़ों की गम लाइन से प्लाक को हटाने में फेल हो जाते हैं, इससे कैविटी और मसूड़ों की सूजन का खतरा बढ़ जाता है.
‘जर्नल ऑफ एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी’ में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, पुराने टूथब्रश पर स्टैफिलोकोकस और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया पाए गए. बाथरूम की नमी और बंद जगहों पर माइक्रोब्स जल्दी पनपने लगते हैं.
एडीए और कई क्लिनिकल गाइडलाइंस के अनुसार, अगर आप फ्लू, वायरल बुखार और कोविड-19 जैसी बीमारी से गुजरे हैं, तो ठीक होने के तुरंत बाद ब्रश बदल देना चाहिए. अगर आप ठीक होने के बाद भी वही पुराना ब्रश इस्तेमाल करते हैं, तो वही जर्म्स वापस आपकी बॉडी में जा सकते हैं, जिससे आप फिर से बीमार पड़ सकते हैं.
टंग क्लीनर का इस्तेमाल जीभ के ऊपर वाली सफेद परत को हटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जीभ पर जमी सफेद परत बैक्टीरिया, डेड सेल्स और फूड सेल्स का कॉम्बिनेशन होती है. अगर इसे नियमित रूप से साफ न किया जाए, तो मुंह की बदबू और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.
ब्राजीलियन ओरल रिसर्च (खासतौर पर साओ पाउलो विश्वविद्यालय) के स्टडी के अनुसार, जीभ की सफाई के लिए टंग स्क्रैपर का इस्तेमाल टूथब्रश की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी पाया गया है. रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि टंग स्क्रैपर का इस्तेमाल करने से सांसों की बदबू में 75 प्रतिशत तक की कमी आती है, जबकि टूथब्रश से जीभ साफ करने पर केवल 45 प्रतिशत ही सुधार होता है.
इसका मुख्य कारण यह है कि टंग क्लीनर की शेफ जीभ पर जमी सफेद लेयर, बैक्टीरिया को गहराई से खुरच कर बाहर निकालने में मदद करता है. यह न केवल मुंह की बदबू को खत्म करती है, बल्कि इंफेक्शन के खतरे को कम कर ओरल हाइजीन को बेहतर बनाती है.
प्लास्टिक टंग क्लीनर को हर 2 से 3 महीने में बदलें, क्योंकि इनमें छोटी दरारें जल्दी बन जाती हैं.
स्टील या तांबे के टंग क्लीनर को लंबे समय तक चल सकते हैं, लेकिन रोज गर्म पानी से धोना जरूरी है. लेकिन जंग, कालापन या खुरदरापन दिखे तो उसे तुरंत बदल दें.
पुराने ब्रश और गंदे टंग क्लीनर का सिर्फ मुंह पर ही असर नहीं करता है, बल्कि यह आपके पूरे शरीर की सेहत को बिगाड़ सकता है.
मसूड़ों की बीमारियां: घिसे हुए ब्रिसल्स मसूड़ों में जख्म और जिंजिवाइटिस पैदा कर सकते हैं, जिससे खून आने की समस्या होती है.
दिल की बीमारी: स्टडी बताती है कि मुंह के खराब बैक्टीरिया खून के जरिए दिल तक पहुंच सकते हैं, जिससे गंभीर दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
लगातार बदबू: अधूरी सफाई से बैक्टीरिया की परत जमती रहती है, जो भीड़ में शर्मिंदगी का कारण बनती है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क