महंगी गाड़ियां ही नहीं, आर्ट के भी शौकीन हैं साइरस पूनावाला, खरीदी 167 करोड़ की पेंटिंग

राजा रवि वर्मा की प्रतिष्ठित पेंटिंग 'यशोदा और कृष्ण' 167.20 करोड़ रुपये में नीलाम हुई है. मुंबई में हुई सफ्रनआर्ट की नीलामी में डॉ. साइरस पूनावाला ने इसे खरीदकर नया रिकॉर्ड बनाया. यह अब तक की सबसे महंगी बिकने वाली आधुनिक भारतीय कलाकृति बन गई है.

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'यशोदा और कृष्ण' को 1890 के दशक में बनाया गया था. (Photo:PTI) 'यशोदा और कृष्ण' को 1890 के दशक में बनाया गया था. (Photo:PTI)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:29 PM IST

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के फाउंडर और चेयरमैन साइरस पूनावाला का कार कलेक्शन काफी अच्छा है. जानकारी के मुताबिक, उन्हें खास तौर पर रोल्स-रॉयस सिल्वर स्पर लिमोज़ीन जैसी गाड़ियां पसंद हैं. उनके पास कई पुरानी (विंटेज) और मॉडर्न कार भी हैं. लेकिन आज उनका कला के प्रति प्रेम भी देखने मिला. आज उन्होंने भारतीय चित्रकला के जनक माने जाने वाले राजा रवि वर्मा की 'यशोदा और कृष्ण' पेंटिंग को मुंबई में हुई सफ्रनआर्ट की 'स्प्रिंग लाइव ऑक्शन' में 167.20 करोड़ रुपये ($17.9 मिलियन) में खरीदा है.

इसके साथ ही यह पेंटिंग नीलामी के इतिहास में सबसे महंगी बिकने वाली आधुनिक भारतीय कलाकृति बन गई है. इस ऐतिहासिक खरीद के बाद भारतीय आर्ट मार्केट में एक नया बेंचमार्क सेट हो गया है, जिसने एमएफ हुसैन जैसे दिग्गजों के पिछले रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया है.

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साइरस पूनावाला ने लगाई सबसे ऊंची बोली

नीलामी से पहले इसका अनुमानित मूल्य 80 से 120 करोड़ रुपये के बीच लगाया गया था लेकिन साइरस पूनावाला की बोली सबसे अधिक रही. पेंटिंग खरीदने के बाद पूनावाला ने कहा कि राजा रवि वर्मा की इस फेमस पेंटिंग को सहेजना उनके लिए सौभाग्य की बात है. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वह इस 'नेशनल ट्रेजर' को समय-समय पर आम जनता के देखने के लिए भी उपलब्ध कराएंगे.

एमएफ हुसैन का रिकॉर्ड टूटा

इस नीलामी ने पिछले साल बने एमएफ हुसैन की पेंटिंग 'अनटाइटल्ड (ग्राम यात्रा)' के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. हुसैन की वह पेंटिंग करीब 118 करोड़ रुपये में बिकी थी.

राजा रवि वर्मा की 'यशोदा और कृष्ण' ने सीधे 167 करोड़ का आंकड़ा छूकर यह साबित कर दिया कि आज भी क्लासिकल भारतीय कला की मांग और कीमत वैश्विक स्तर पर बहुत ऊंची है. सफ्रनआर्ट की को-फाउंडर मीनल वजीरानी ने इसे इंडियन आर्ट मार्केट के लिए एक मील का पत्थर बताया है.

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1890 के दशक में बनी थी ये पेंटिंग

यह पेंटिंग राजा रवि वर्मा के करियर के शिखर यानी 1890 के दशक में बनाई गई थी. इसमें वात्सल्य रस और ममता का अद्भुत चित्रण है. पेंटिंग में मां यशोदा को गाय दुहते हुए दिखाया गया है जबकि नन्हे कृष्ण पीछे से दूध के पात्र की ओर हाथ बढ़ा रहे हैं.

रवि वर्मा की खासियत रही है कि वे पौराणिक दृश्यों को इतनी जीवंतता से उकेरते थे कि वे घरेलू और पवित्र, दोनों अहसास एक साथ देते थे. इस ऑयल पेंटिंग में रंगों का तालमेल और मानवीय भावनाओं की गहराई इसे दुनिया की सबसे खास कलाकृतियों की श्रेणी में खड़ा करती है.

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