नीली और पीली लौ में क्या अंतर है? फ्लेम का ये रंग जेब कर रहा खाली, ऐसे बचाएं गैस

गैस चूल्हे या एलपीजी वाले गैस सिलेंडर को जलाने पर कई बार लौ नीले और पीले रंग की निकलती है. इन दोनों रंग का क्या मतलब होता है, कब खतरे की घंटी मानी जाए, इस बारे में स्टोरी में जानेंगे.

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नीली और पीली लौ के अंतर को समझना काफी जरूरी है. (Photo: ITG) नीली और पीली लौ के अंतर को समझना काफी जरूरी है. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:19 PM IST

जिस तरह लोग अक्सर खाने वाली चीजें, खाने की क्वालिटी आदि पर ध्यान देते हैं, उसी तरह खाने पकाने के इस्तेमाल होने वाले गैस चूल्हे पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है. किचन में इस्तेमाल होने वाले गैस सिलेंडर और चूल्हे के सही इस्तेमाल से सुरक्षा और बचत दोनों हो सकती हैं. दरअसल, खाना बनाते समय गैस के बर्नर से निकलने वाली लौ का रंग सीधे तौर पर गैस के जलने के तरीके को बताता है कि क्या वो सही तरह से जल रही है या नहीं. 

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अधिकतर घरों में एलपीजी सिलेंडर का जब इस्तेमाल होता है तो उसमें 2 तरह की लौ मुख्यत: देखने मिलती है एक नीली और दूसरी पीली. अब इन दोनों रंगों में क्या अंतर है, इस बारे में जान लीजिए क्योंकि घरेलू सुरक्षा के नजरिए से लौ के रंगों की पहचान करना हर गृहणी और यूजर के लिए जरूरी है.

नीली लौ का क्या मतलब है?

Lpgjets पर दी गई जानकारी के मुताबिक, जब आपके गैस बर्नर से नीले रंग की लौ निकलती है तो समझ लीजिए कि आपका गैस और चूल्हा सही तरह से काम कर रहा है. नीला रंग इस बात का संकेत माना जाता है कि गैस और हवा का मिश्रण एकदम सही है. 

नीली लौ लगभग 1960 से 1980 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर जलती है जो सबसे अधिक तापमान पौदा करती है. इसका मतलब है कि आपका खाना कम समय में पकेगा और गैस की एक बूंद भी बर्बाद नहीं होगी. इसके अलावा लौ का नीला रंग यह भी बताता है कि बर्नर के छेद साफ हैं और वहां कोई रुकावट नहीं है.

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पीली लौ का क्या मतलब है?

जानकारी के मुताबिक, यदि गैस चूल्हे में से नीली लौ की जगह पीली या संतरी लौ दिखे तो इसका मतलब है कि आपको तुरंत ध्यान देने की जरूरत है. पीली लौ तब निकलती है जब गैस को जलने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही होती. 

पीली लौ का तापमान नीली लौ के मुकाबले काफी कम यानी 1000 डिग्री सेल्सियस होता है जिससे खाना पकने में ज्यादा समय लगता है और गैस की खपत बढ़ जाती है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि पीली लौ कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस छोड़ सकती है जो बंद रसोई में सेहत के लिए खतरनाक साबित होती है. 

आपने देखा होगा कई बार आपके खाना पकाने वाले बर्तन नीचे से काले हो जाते हैं, वो अक्सर पीली लौ के कारण होते हैं. जब गैस पूरी तरह नहीं जलती तो वह कालिख के रूप में बर्तनों पर जमा होने लगती है. इसका मुख्य कारण बर्नर के छेदों में गंदगी, तेल या खाने के कणों का फंसना होता है. अगर आप लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करते हैं, तो गैस सिलेंडर बहुत जल्दी खत्म होने लगेगा और आपके बजट पर सीधा असर पड़ेगा.

पीली लौ को कैसे ठीक करें?

गैस की पीली लौ को ठीक करने के लिए सबसे पहले गैस बर्नर को हटाएं और उसे पुराने टूथब्रश और साबुन के पानी से साफ कर लें. ध्यान दें कि बर्नर के सभी छेद खुले हों. सफाई के बाद बर्नर को पूरी तरह सुखाकर वापस लगा दें. 

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यदि सफाई के बाद भी लौ पीली बनी रहती है, तो यह रेगुलेटर या पाइप में खराबी का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत किसी प्रोफेशनल मैकेनिक को बुलाएं.

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