ब्रॉयलर चिकन इतनी तेजी से क्यों बढ़ते हैं? इंजेक्शन का खेल या गलतफहमी! क्या कहते हैं एक्सपर्ट

गैस्ट्रोलॉजिस्ट ने ब्रॉयलर चिकन को लेकर फैली हार्मोन की गलतफहमियों को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर स्पष्ट किया है. उन्होंने बताया है कि ब्रॉयलर और देसी चिकन में से कौन सा अधिक सुरक्षित है.

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ब्रॉयलर चिकन काफी तेजी से बढ़ते हैं. (Photo: ITG) ब्रॉयलर चिकन काफी तेजी से बढ़ते हैं. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:30 AM IST

ब्रॉयलर चिकन एक प्रकार के मुर्गे की किस्म है जिसे विशेष रूप से चिकन के लिए पाला जाता है. आमतौर पर ब्रॉयलर चिकन लगभग 6 से 8 सप्ताह में बाजार में बिकने के लिए तैयार हो जाते हैं. जानकारी के मुताबिक, इन्हें विशेष रूप से तैयार किया गया चारा दिया जाता है जो उनके मसल्स ग्रोथ को तेजी से बढ़ा देता है. ब्रॉयलर चिकन का मांस अपनी मुलायम बनावट के लिए जाना जाता है जिससे यह अधिक स्वादिष्ट और कई व्यंजनों में आसानी से पकाने योग्य बन जाता है. लेकिन फिर भी लोगों के मन में अक्सर सवाल होता है कि क्या सच में ब्रॉयलर चिकन खाने लायक होता है या उसे इंजेक्शन दिए जाते हैं?

इस बारे में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पालानियप्पन मणिकम (डॉ. पाल) ने साइंस के आधार पर बताया है कि क्या सच में ब्रॉयलर चिकन असुरक्षित है या सिर्फ ये गलतफहमी है?

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ब्रॉयलर चिकन इतनी जल्दी कैसे बढ़ जाते हैं?

डॉ. पाल के मुताबिक, सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि जो चिकन 5–7 हफ्ते में तैयार हो जाता है, उसे जरूर ग्रोथ हार्मोन दिए गए होंगे. जबकि हकीकत यह है कि भारत में पोल्ट्री में ग्रोथ हार्मोन का उपयोग प्रतिबंधित है और बड़े पैमाने पर हजारों पक्षियों को बार–बार इंजेक्शन लगाना आर्थिक और लॉजिस्टिक रूप से लगभग नामुमकिन भी है.

​इंटरनेशनल जर्नल ऑफ वेटरनरी साइंसेज एंड एनिमल हसबैंड्री 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रॉयलर चिकन की तेज ग्रोथ के 2 मुख्य कारण हैं. पहला सालों से चल रही सेलेक्टिव ब्रीडिंग और पूरी तरह कंट्रोल्ड न्यूट्रिशन, तापमान और डिजीज मैनेजमेंट. आसान भाषा में कहें तो कुछ नस्लों को बार-बार ऐसे चूजों से तैयार किया गया जो नैचुरली तेजी से बढ़ते हैं. यह न तो यह जेनेटिक मॉडिफिकेशन है और न हार्मोन का खेल, बल्कि ब्रीड और बेहतर पालन-पोषण के कारण वह इतना तेजी से बढ़ते हैं.

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देसी vs ब्रॉयलर: न्यूट्रिशनल में कितना फर्क?

ब्रॉयलर और देसी चिकन में जेनेटिक और लाइफस्टाइल का फर्क है. ब्रॉयलर चिकन कंट्रोल्ड फीड और कम मूवमेंट के साथ तेजी से बढ़ते हैं इसलिए उनकी ब्रेस्ट मसल्स बड़े होते हैं, मांस नर्म होता है और फैट थोड़ा अधिक होता है. वहीं देसी चिकन धीरे-धीरे बढ़ते हैं इसलिए उनका मांस सख्त, डार्क, अधिक फ्लेवर वाला होता है. 

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ वेटरनरी साइंसेज एंड एनिमल हसबैंड्री 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, देसी चिकन में कुल फैट और सैचुरेटेड फैट थोड़ा कम और कुछ माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (जैसे आयरन, जिंक, विटामिन बी ग्रुप) थोड़े बेहतर होते हैं.

देसी चिकन के ये न्यूट्रिशन उन लोगों के लिए हल्का सा अधिक फायदा दे सकता है जिन्हें पहले से हार्ट डिजीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है. डॉ. पाल का कहना है कि देसी चिकन कोई जादुई सुपरफूड नहीं है और ब्रॉयलर चिकन कोई जहर नहीं है.

क्या कहती हैं रिसर्च?

स्टडीज चिकन को लीन प्रोटीन के रूप में मानती हैं. एक सिस्टमेटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस में पाया गया था कि अधिक मात्रा में पोल्ट्री खाने से कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज का रिस्क न तो बढ़ता है, न घटता यानी असर मोटे तौर पर असर न्यूट्रल रहता है.

जामा नेटवर्क में पब्लिश हुई कोहोर्ट स्टडीज में यह भी दिखा कि जब रेड मीट या प्रोसेस्ड मीट की जगह चिकन जैसे पोल्ट्री का सेवन किया जाए तो हार्ट डिजीज और ऑल-कॉज मॉर्टेलिटी का रिस्क कुछ हद तक कम हुआ था. 

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कैसे पकाकर खाएं चिकन?

चिकन कितनी बार और किस रूप में खाया जा रहा है यह भी मायने रखता है. ब्रॉयलर हो या देसी चिकन, यदि आप उसे  डीप फ्राई, हैवी ग्रेवी, बहुत अधिक तेल और बड़े-बड़े पोर्शन के साथ खाते हैं तो आपको नुकसान हो सकता है.

दूसरी तरफ चिकन की स्किन निकालकर, कम तेल में, ग्रिल्ड, बेक्ड या लाइट करी के रूप में बैलेंस मात्रा में खाएं तो चिकन फायदा पहुंचा सकता है. 

दुनिया भर की रिसर्च भी यही बताती हैं कि अनप्रोसेस्ड, लीन चिकन मसल मेंटेनेंस, बॉडी वेट मैनेजमेंट और कार्डियोवैस्कुलर रिस्क के मामले में सुरक्षित और कई बार फायदेमंद ऑप्शंस है. बस आपकी पूरी डाइट, एक्सरसाइज, नींद और लाइफस्टाइल भी साथ बैलेंस होनी चाहिए.

ब्रॉयलर चिकन खाएं या नहीं?

ब्रॉयलर चिकन को सिर्फ इस डर से छोड़ देना कि वह हार्मोन से भरा है, साइंस के हिसाब से उचित नहीं है. देसी चिकन स्वाद और हल्की न्यूट्रिशनल बढ़त के लिए अच्छा ऑप्शंस हो सकता है.

आखिर में फैसला आपके ऊपर होना चाहिए. देसी चिकन, ब्रॉयलर से महंगा होता है. जो भी चिकन आपके लिए एक्सेसिबल, अफोर्डेबल और आसानी से डाइजेस्ट हो, उसे वैज्ञानिक जानकारी के साथ चुनें, न कि वायरल मैसेजों के डर से.

सेहत के लिए सबसे अधिक मायने रखता है कि आप कितना चिकन खा रहे हैं, कैसे पका रहे हैं और आपकी ओवरऑल लाइफस्टाइल कैसी है.

(Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में किसी भी बदलाव से पहले हमेशा अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डायटीशियन से सलाह जरूर लें.)

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