'तलाकशुदा बेटी, मृत बेटी से बेहतर', ट्विशा शर्मा केस में MP सरकार की सुप्रीम कोर्ट में टिप्पणी ने खींचा सबका ध्यान

भोपाल में पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. अदालत ने निष्पक्ष जांच की जरूरत बताते हुए मध्य प्रदेश सरकार के CBI जांच के फैसले का समर्थन किया. कोर्ट ने मीडिया और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की, जबकि परिवार ने दहेज प्रताड़ना और जांच में पक्षपात के आरोप लगाए हैं.

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सुप्रीम कोर्ट में MP सरकार का बड़ा बयान. (Photo: ITG) सुप्रीम कोर्ट में MP सरकार का बड़ा बयान. (Photo: ITG)

सृष्टि ओझा / अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली ,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:58 PM IST

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पूर्व अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है. इस मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए. अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपने के फैसले की सराहना भी की. कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों के हित में अब किसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच करनी चाहिए.

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यह मामला तब और ज्यादा चर्चा में आया जब 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं. ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया. वहीं दूसरी ओर ससुराल पक्ष का कहना था कि ट्विशा नशे की लत से परेशान थीं.

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने कहा कि मीडिया में ऐसी बातें सामने आईं, जिनसे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए. कोर्ट ने खास तौर पर एक मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें संस्थागत पक्षपात और जांच में विसंगतियों की बात कही गई थी. अदालत ने कहा कि आरोपियों के परिवार की पृष्ठभूमि को देखते हुए यह आशंका जताई गई कि जांच प्रभावित हो सकती है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह पेशे से वकील हैं, जबकि उनकी सास गिरिबाला सिंह पूर्व जिला जज रह चुकी हैं. अदालत ने कहा कि इसी वजह से यह नैरेटिव बनाया गया कि न्यायपालिका निष्पक्ष जांच नहीं होने दे रही है. कोर्ट ने कहा कि इसी कारण इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की गई.

परिवार ने लगाए दहेज प्रताड़ना और जांच में पक्षपात के आरोप

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें राज्य की जांच एजेंसियों के कामकाज पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, उसमें स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराना जरूरी हो जाता है. अदालत ने कहा कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि जांच निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के हो.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से भी संयम बरतने की अपील की. कोर्ट ने कहा कि परिवारों को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी नहीं होनी चाहिए और जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाना चाहिए. अदालत ने दोनों पक्षों से भी कहा कि वे मीडिया में बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के सामने अपनी बात रखें.

मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि तलाकशुदा बेटी, मृत बेटी से बेहतर होती है. यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान काफी चर्चा में रही. ट्विशा शर्मा का मामला इसलिए भी बड़ा बन गया क्योंकि आरोपियों का संबंध न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है. ट्विशा के पति समर्थ सिंह एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं और उनकी मां गिरिबाला सिंह रिटायर्ड जिला जज हैं. इसी वजह से परिवार और कुछ सामाजिक संगठनों ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाए.

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ट्विशा के परिवार ने आरोप लगाया कि शुरुआती पोस्टमार्टम में कई जरूरी पहलुओं को नजरअंदाज किया गया. परिवार ने कहा कि ट्विशा के शरीर पर चोट के निशान थे, खासकर बाएं हाथ और बांह पर। परिवार का आरोप है कि चोटों की गहराई और उम्र की ठीक से जांच नहीं की गई. इसके अलावा गर्दन और सर्वाइकल हिस्से की रेडियोलॉजिकल जांच भी नहीं हुई.

इन आरोपों के बाद परिवार ने दिल्ली AIIMS से स्वतंत्र मेडिकल जांच की मांग की. परिवार चाहता था कि फॉरेंसिक, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विशेषज्ञों की टीम पूरे मामले की दोबारा जांच करे। इसी बीच हाई कोर्ट ने दूसरे पोस्टमार्टम के निर्देश भी दिए थे. मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब ट्विशा के परिवार ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और CBI जांच की मांग की. इसके बाद राज्य सरकार ने परिवार को भरोसा दिलाया कि केस CBI को सौंपा जाएगा.

इस बीच भोपाल की अदालत ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह को पुलिस हिरासत में भेज दिया. पुलिस अब तक मामले की कई एंगल से जांच कर रही है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अब स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच होना सभी पक्षों के लिए बेहतर होगा. ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार रविवार शाम भोपाल में किया गया. उनके भाई हर्षित ने मुखाग्नि दी. परिवार का कहना है कि न्याय के लिए उन्हें 12 दिनों तक संघर्ष करना पड़ा. अंतिम संस्कार के दौरान परिवार और रिश्तेदारों में भारी दुख का माहौल था.

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पति वकील और सास पूर्व जज होने से जांच पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं परिवारों को गहरा दर्द देती हैं और अदालत को इस पीड़ा का एहसास है, लेकिन कानून के तहत तय प्रक्रिया का पालन जरूरी है. अदालत ने कहा कि भावनाओं से ऊपर उठकर निष्पक्ष जांच ही सच सामने ला सकती है. अब इस मामले में सभी की नजरें CBI जांच पर टिकी हैं. परिवार को उम्मीद है कि स्वतंत्र जांच एजेंसी मामले की सच्चाई सामने लाएगी, जबकि दूसरी ओर अदालत ने भी साफ कर दिया है कि न्याय प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है.

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