शराब नीति मामला: अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से फाइलें जमा करने को भी कहा और कहा, "हम मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार करने वाले फैसले के बाद और केजरीवाल की गिरफ्तारी से पहले दर्ज किए गए गवाहों के बयान देखना चाहते हैं."

Advertisement
सुुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा सुुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

कनु सारदा

  • नई दिल्ली,
  • 17 मई 2024,
  • अपडेटेड 7:36 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की एक्साइज पॉलिसी के तहत ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने फैसला सुरक्षित रखते हुए अरविंद केजरीवाल को जमानत के लिए निचली अदालत में जाने की छूट दी.

शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से फाइलें जमा करने को भी कहा और कहा, "हम मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार करने वाले फैसले के बाद और केजरीवाल की गिरफ्तारी से पहले दर्ज किए गए गवाहों के बयान देखना चाहते हैं."

Advertisement

कोर्ट ने दोनों पक्षों को एक हफ्ते के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने को भी कहा. सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पीठ को बताया कि हवाला लेनदेन के संबंध में और सबूत सामने आए हैं और लेनदेन के व्हाट्सएप चैट कैसे पाए जाते हैं. इस पर पीठ ने पूछा कि क्या गिरफ्तारी के लिए लिखित में दर्ज कारणों पर विश्वास करने के लिए इनका उल्लेख किया गया है. सवाल का जवाब देते हुए, एएसजी ने कहा, "हमने विश्वास करने के कारण नहीं बताए हैं."

लेकिन पीठ ने सवाल किया, "आप विश्वास करने के लिए कारण कैसे नहीं देंगे? वह उन कारणों को कैसे चुनौती देंगे?"

एएसजी राजू ने कहा कि अगर गिरफ्तारी से पहले आरोपी को सामग्री की आपूर्ति की जाती है, तो इससे जांच में बाधा आ सकती है. इस पर जस्टिस खन्ना ने कहा, "एक जांचकर्ता के रूप में उन्हें तब तक गिरफ्तार नहीं करना चाहिए जब तक कि उनके पास यह दिखाने के लिए पर्याप्त सामग्री न हो कि वह दोषी हैं."

Advertisement

एएसजी ने जवाब दिया, "रिहाई के चरण में आपराधिक कानून और सामान्य प्रशासनिक कानून के बीच अंतर होता है, अदालत अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री के अलावा किसी अन्य सामग्री को नहीं देख सकती है."

उन्होंने आगे कहा कि, "यदि इस याचिका पर विचार किया जाता है तो यह भ्रम का पिटारा खोल देगा. हर बार कोई न कोई इस तरह की याचिका लेकर आएगा. मजिस्ट्रेट को हजारों कागजात पढ़ने और आधी रात को आग लगाने की आवश्यकता नहीं है."

सिंघवी ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार पर कोई सबूत नहीं है. वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अपने प्रत्युत्तर में केवल इतना कहा कि ईडी अधिकारियों ने केवल एक बयान पर भरोसा किया और अन्य बयानों को नजरअंदाज कर दिया. सिंघवी ने तर्क दिया कि, "गिरफ्तारी के आधार पर कोई सामग्री नहीं है. 1.5 साल से अधिक समय तक उन्होंने जांच की. केजरीवाल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं. जुलाई-अगस्त 2023 में ईडी के पास जो सबूत थे, उसके आधार पर गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं थी."

सिंघवी ने आरोपी से सरकारी गवाह बने सरथ रेड्डी के बयान का संदर्भ दिया.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »