कर्नाटक: मंदिर में रखने से पहले ही फटा था कुकर बम, आतंकी शारिक को 10 साल की सजा

मंगलूरु कुकर बम मामले में विशेष एनआईए अदालत ने आतंकी मोहम्मद शारिक को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. 19 नवंबर 2022 को कंकनाडी इलाके में ऑटो में सफर के दौरान उसका 3 लीटर प्रेशर कुकर बम फट गया था. जांच में पता चला कि वह मंदिर में बम रखने जा रहा था. बम में विस्फोटक जेल, कील और डेटोनेटर लगे थे.

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शरीक को सजा हो गई है. Photo ITG शरीक को सजा हो गई है. Photo ITG

सगाय राज

  • मंगलुरु,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:35 PM IST

मंगलूरु के कुकर बम धमाके के मामले में विशेष NIA अदालत ने आतंकी मोहम्मद शारिक को 10 साल की सजा सुनाई है. शारिक ने अदालत में अपना जुर्म कुबूल कर लिया था, जिसके बाद यह फैसला आया.

यह घटना 19 नवंबर 2022 को कर्नाटक के मंगलूरु के कंकनाडी इलाके में हुई थी. जांच में सामने आया कि शारिक कदरी मंजुनाथ मंदिर में बम रखने जा रहा था. लेकिन रास्ते में ही कुकर बम फट गया, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया.

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धमाके में खुद घायल हो गया था शारिक
धमाके में शारिक खुद घायल हो गया था. साथ ही ऑटो चालक पुरुषोत्तम पुजारी भी जख्मी हुए थे. दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. करीब तीन महीने इलाज के बाद शारिक को एनआईए की हिरासत में लिया गया. पूछताछ और जांच पूरी होने के बाद एजेंसी ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया.

अब अदालत ने उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इस फैसले को बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, क्योंकि समय रहते धमाका होने से एक संभावित बड़ा हमला टल गया.

3 लीटर के प्रेशर कुकर में बम रखा था
पुलिस के अनुसार मोहम्मद शारिक के पास कोई मामूली या कम तीव्रता वाला बम नहीं था, बल्कि उसके पास ऐसा प्रेशर कुकर बम था जिसमें पूरी बस को उड़ाने की क्षमता थी. शारिक के पास मौजूद 3 लीटर के प्रेशर कुकर में विस्फोटक जेल, तेज धार वाले कील और बैटरी टर्मिनल लगाए गए थे. 

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ऑटो रिक्शा में सफर के दौरान टाइमर एक्टिव कर दिया था
इन टर्मिनलों के पॉजिटिव और नेगेटिव तार डेटोनेटर से जुड़े हुए थे. बताया गया कि ऑटो रिक्शा में सफर के दौरान उसने टाइमर एक्टिव कर दिया था. हालांकि डेटोनेटर तक बिजली की आपूर्ति नहीं पहुंच सकी, लेकिन ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा विस्फोटक जेल सुलग उठा.

डेटोनेटर और जेल दोनों एक्टिव होते तो बड़ा धमाका हो सकता था
जेल में आग लगने के बाद धुआं फैलने लगा और फिर धमाका हुआ. अगर डेटोनेटर और जेल दोनों सही तरीके से सक्रिय हो जाते, तो मंगलुरु शहर में बड़ा हादसा हो सकता था. अधिकारियों के अनुसार यदि बम पूरी तरह फटता, तो ऑटो रिक्शा के परखच्चे उड़ जाते, आसपास के वाहन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाते और भारी जनहानि होती. इस तरह एक बड़ी त्रासदी टल गई.

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