केवल दो मिनट लेट होने पर पहली कक्षा के छात्र को 2 घंटे धूप में किया खड़ा! स्कूल पर लगे गंभीर आरोप

बेंगलुरु के एक प्राइवेट स्कूल में पहली कक्षा के छात्र को 2 मिनट देर से आने के लिए करीब दो घंटे तक धूप में खड़ा करने का आरोप लगा है. पुलिस ने जानकारी दी है कि जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 के तहत सामने आए इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया जा रहा है.

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बेंगलुरु के एक स्कूल पर पहली कक्षा के छात्र को दो घंटे धूप में खड़ा करने का आरोप लगा है. (Photo: PTI/file) बेंगलुरु के एक स्कूल पर पहली कक्षा के छात्र को दो घंटे धूप में खड़ा करने का आरोप लगा है. (Photo: PTI/file)

aajtak.in

  • बेंगलुरु,
  • 15 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:27 PM IST

बेंगलुरु में एक निजी स्कूल में पहली कक्षा के छात्र को देर से आने पर दी गई सजा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि बच्चे को सिर्फ दो मिनट देर से क्लास में पहुंचने पर लगभग दो घंटे तक धूप में खड़ा रखा गया. इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई है. वहीं, यह घटना येलहंका के अत्तूर लेआउट स्थित एक स्कूल की बताई जा रही है.

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बच्चे के माता-पिता का कहना है कि जब उन्होंने इस मुद्दे पर प्रिंसिपल से बात की, तो उनके साथ अनुचित तरीके से पेश आया गया. इसके बाद उन्होंने स्कूल प्रशासन से पूरे मामले में स्पष्ट जवाब की मांग की. 

यह पूरा विवाद तब और सुर्खियों में आया, जब शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो सामने आया. वीडियो में माता-पिता स्कूल की प्रिंसिपल से इस मामले पर सवाल करते दिखाई दिए.

वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए बेंगलुरू पुलिस ने कहा है कि उन्होंने इस घटना का गंभीर संज्ञान लिया है और यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों को शारीरिक या मानसिक पीड़ा देना दंडनीय अपराध है.

पुलिस ने दी जानकारी

पुलिस ने पोस्ट में कहा, “हमने जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 के तहत सामने आए इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे को देर से आने की सजा के तौर पर कथित रूप से 2 घंटे तक धूप में खड़ा रखा गया. 

अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस कानून के अनुसार किसी भी जांच या मामले में शामिल बच्चे की पहचान उजागर करना प्रतिबंधित है.

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी वीडियो, फोटो या जानकारी को शेयर न करें, जिससे बच्चे की पहचान सामने आ सकती हो.

पुलिस ने यह भी सलाह दी कि बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार या प्रताड़ना से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे लॉ एनफोर्समेंट एजेंसिज या बाल संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं को दी जानी चाहिए, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके.

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