विदेश में घरों की छतों पर नहीं होती पानी की टंकी, बाथरूम में कैसे आता है पानी?

भारत में ज्यादातर घरों की छत पर पानी की टंकी होती है, लेकिन विदेशों में ऐसा कम देखने को मिलता है. इसकी वजह वहां की मजबूत और 24 घंटे चलने वाली वॉटर सप्लाई सिस्टम है. विदेशों में पानी सीधे पाइपलाइन और प्रेशर सिस्टम के जरिए घरों तक पहुंचता है, इसलिए अलग से टंकी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.

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विदेशों में ज्यादातर घरों में पानी के लिए प्रेशर सिस्टम और मोटर तकनीक का इस्तेमाल होता है. ( Photo: ITG) विदेशों में ज्यादातर घरों में पानी के लिए प्रेशर सिस्टम और मोटर तकनीक का इस्तेमाल होता है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:03 AM IST

भारत में ज्यादातर घरों की छत पर पानी की बड़ी-बड़ी टंकियां दिखाई देती हैं. इन टंकियों में पानी स्टोर किया जाता है, ताकि पूरे घर में आसानी से पानी पहुंच सके. लेकिन अगर आपने विदेशों के घरों की तस्वीरें या वीडियो देखे होंगे, तो आपने गौर किया होगा कि वहां ज्यादातर घरों की छत पर पानी की टंकी नहीं होती. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर वहां बाथरूम, किचन और बाकी जगहों पर पानी कैसे पहुंचता है. इसका जवाब वहां की अलग पानी सप्लाई व्यवस्था में छिपा है.

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भारत में क्यों जरूरी होती है पानी की टंकी?
दरअसल, भारत में कई जगहों पर पानी की सप्लाई नियमित नहीं होती. कहीं दिन में एक बार पानी आता है तो कहीं कुछ घंटों के लिए ही पानी मिलता है. इसी वजह से लोग छत पर टंकी लगाकर पानी जमा करते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके. लेकिन विदेशों के कई देशों में पानी की सप्लाई 24 घंटे लगातार चलती रहती है. वहां पानी का प्रेशर भी काफी अच्छा होता है. इसलिए लोगों को पानी स्टोर करने के लिए छत पर अलग टंकी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.

विदेशों में कैसे पहुंचता है पानी?
अमेरिका, कनाडा, यूरोप और कई दूसरे विकसित देशों में पानी सीधे अंडरग्राउंड पाइपलाइन सिस्टम से घरों तक पहुंचता है. वहां नगर निगम या लोकल वॉटर सप्लाई सिस्टम इतना मजबूत होता है कि हर समय पानी उपलब्ध रहता है. घरों में लगी पाइपलाइन सीधे बाथरूम, किचन और वॉशिंग एरिया तक पानी पहुंचाती है. पानी का दबाव यानी प्रेशर इतना अच्छा होता है कि ऊपरी मंजिलों तक भी आसानी से पानी पहुंच जाता है.

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विदेशों में ज्यादातर घरों में पानी के लिए प्रेशर सिस्टम और मोटर तकनीक का इस्तेमाल होता है. कई जगहों पर घरों के अंदर छोटे प्रेशर टैंक या पंप लगे होते हैं, जो पाइपलाइन में लगातार दबाव बनाए रखते हैं. इससे शॉवर, सिंक और दूसरे उपकरणों में पानी की सप्लाई बिना रुके होती रहती है. कुछ देशों में बड़े-बड़े अपार्टमेंट्स में बेसमेंट के अंदर पानी स्टोरेज सिस्टम बनाए जाते हैं, जो बाहर से दिखाई नहीं देते. इसके अलावा विदेशों में मौसम भी एक बड़ी वजह है. कई देशों में बर्फबारी और बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है. अगर वहां छत पर पानी की टंकी रखी जाए तो पानी जम सकता है और पाइपलाइन खराब हो सकती है. इसलिए वहां ज्यादातर पाइप और पानी के सिस्टम घरों के अंदर या जमीन के नीचे लगाए जाते हैं ताकि वे सुरक्षित रहें.

पाइपलाइन और प्रेशर सिस्टम करता है काम
भारत में भी अब कई नई हाईराइज बिल्डिंग और बड़े अपार्टमेंट्स में विदेशों जैसी तकनीक इस्तेमाल होने लगी है. वहां छत पर छोटी टंकी रखने की बजाय बेसमेंट में बड़ा पानी स्टोरेज बनाया जाता है और मोटर की मदद से पूरे बिल्डिंग में पानी पहुंचाया जाता है. हालांकि छोटे शहरों और गांवों में आज भी छत की टंकी सबसे आसान और सस्ता तरीका माना जाता है. एक और कारण यह भी है कि विदेशों में पानी की बर्बादी रोकने और पाइपलाइन सिस्टम को मजबूत बनाने पर बहुत ध्यान दिया जाता है. 

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वहां नियमित मेंटेनेंस और एडवांस टेकनीक की वजह से पानी की सप्लाई लंबे समय तक बिना रुकावट चलती रहती है. यानी विदेशों में छत पर टंकी न होने का मतलब यह नहीं कि वहां पानी की कमी है. बल्कि वहां का वॉटर सप्लाई सिस्टम इतना बेहतर और मजबूत होता है कि लोगों को अलग से पानी जमा करने की जरूरत ही नहीं पड़ती.

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