ईरान से अमेरिका-इजरायल युद्ध लड़ रहे हैं. इस बीच ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारी और यूएस के नेशनल काउंटर टेरेरिज्म के डायरेक्टर जो केंट ने इस्तीफा दे दिया. जो केंट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए स्पष्ट कर दिया कि ईरान के खिलाफ अपने देश के युद्ध को लेकर उन्होंने इस्तीफा दिया है.
केंट ने अपने पोस्ट में लिखा है - ईरान अमेरिका के लिए 'तत्काल खतरा' नहीं है और दावा किया कि प्रशासन ने इजराइल और उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव के कारण यह युद्ध शुरू किया. ऐसे में सवाल उठता है कि अमेरिका में 'इजरायली लॉबी' कितनी मजबूत है, जो अपने देश के हित में अमेरिका से ईरान जैसे देश पर हमला करने जैसे गंभीर फैसलों को भी प्रभावित करने का दम रखता है.
अमेरिका में 'इजरायली लॉबी' को समझने के लिए हमें इतिहास में थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा और अमेरिकी यहूदी समुदाय और इजरायल के संबंध को समझना होगा. अमेरिकी यहूदियों का जायोनिज्म की ओर व्यापक झुकाव वास्तव में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान और उसके बाद ही हुआ. 1942 में, जायोनिज्म-विरोधी आवाज उठाने वाली युद्धकालीन अमेरिकी यहूदी परिषद (एजेसी) और अमेरिकी यहूदी समिति , दोनों के विरोध के बावजूद , कई समूहों ने फिलिस्तीन में "यहूदी राष्ट्रमंडल" की स्थापना की मांग करने के लिए बैठकें कीं.
कैसे अमेरिका में मजबूत हुई 'इजरायली लॉबी'
उस वक्त दुनियाभर में यहूदी-विरोध से उत्पन्न खतरे को सभी पक्षों ने गंभीरता से लिया, क्योंकि यह आपसी जायोनिज्म को लेकर मतभेद से कहीं ज्यादा जरूरी था.जायोनिस्टों का मानना था कि एक यहूदी राष्ट्रीय घर इस समस्या का समाधान कर देगा, क्योंकि यह एक ऐसा सुरक्षित स्थान प्रदान करेगा, जहां सभी यहूदी स्वाभाविक रूप से रहने के लिए आकर्षित होंगे.
1948 में इजरायल की स्थापना के साथ, जिसे अमेरिकी यहूदियों द्वारा एक युगांतरकारी घटना के रूप में सराहा गया. द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, 1950 में संयुक्त राज्य अमेरिका में इजरायल की तुलना में चार गुना अधिक यहूदी थे और अकेले न्यूयॉर्क शहर में लगभग दोगुने थे.
इजरायल में पर्याप्त आबादी न होने के डर से वहां के पीएम बेन-गुरियन ने संयुक्त राज्य अमेरिका को श्रेष्ठ "मानव संसाधन" का एक अत्यंत आवश्यक भंडार मानते थे (जो युद्धकालीन यूरोप से आ रहे जर्जर और आघातग्रस्त बचे यहूदियों की तुलना में कई मायनों में बेहतर थे). उस वक्त बेन गुरियन ने अमेरिकी माता-पिता से अपने बच्चों को स्थायी रूप से बसाने के लिए इजरायल भेजने का आग्रह किया. फिर भी इजरायल और अमेरिकी यहूदी समुदाय में वैचारिक मतभेद कम नहीं हुए.
1967 का छह दिवसीय युद्ध शायद वास्तविक निर्णायक मोड़ था, जिसने अमेरिका में इजरायल की छवि को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाया और इस प्रकार इजरायल और अमेरिकी यहूदियों के बीच संबंधों को बदल दिया. इसके बाद, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले तीखे वैचारिक संघर्ष और मतभेदों का अंत हो गया.
1967 के छह दिवसीय युद्ध में इजराइल के लिए अमेरिकी जनता के समर्थन ने वहां एक ऐसे राष्ट्रीय वातावरण को तैयार किया जो मूल रूप से इजरायल के पक्षधर थे. इजरायल अमेरिकी यहूदी समुदाय का केंद्र बन गया. तब यूनाइटेड ज्यूइश अपील को मिलने वाला दान 1966 में 65 मिलियन डॉलर से बढ़कर अगले वर्ष 240 मिलियन डॉलर और 1974 तक 511 मिलियन डॉलर हो गया. यह संयुक्त राज्य अमेरिका में इजरायल समर्थक राजनीतिक वकालत की वास्तविक शुरुआत थी. हालांकि, उस समय यह आज की तुलना में छोटे पैमाने पर थी.
अमेरिका में यहूदी आबादी कितनी है
ये तो अमेरिका में इजरायली लॉबी का इतिहास है कि आखिर कैसे और क्यों अमेरिका की बड़ी यहूदी आबादी इजरायल के समर्थन में एक हो गई. अब नजर डालते हैं अमेरिका की इजरायली लॉबी के मजबूत होने के दूसरे पहलू यानी यहूदियों की आबादी पर. क्योंकि, किसी भी मामले में प्रभाव के लिए जनमत और धन दो महत्वपूर्ण फैक्टर होते हैं.
प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में लगभग 58 लाख वयस्क (अमेरिका के कुल वयस्कों का 2.4%) यहूदी हैं. अमेरिका में यहूदियों की आबादी लगातार बढ़ रही है और यह संख्या 2013 में प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा किए गए यहूदी अमेरिकियों के सर्वेक्षण के समय अनुमानित 53 लाख (अमेरिकी वयस्कों का 2.2%) से बढ़कर 2020 में 58 लाख (2.4%) हो गई है.
हम समझ चुके हैं कि कैसे अमेरिका में यहूदी एडवोकेसी 19वीं शताब्दी में ही शुरू हुए थे. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में इसने गति पकड़ी. लेकिन, 1949 में अमेरिकन जायोनिस्ट काउंसिल की स्थापना ने इन गतिविधियों को वैधता प्रदान की, और 1954 में एआईपीएसी की स्थापना के साथ, ये प्रयास संस्थागत रूप ले चुका है और धीरे-धीरे कांग्रेस पर पर्याप्त प्रभाव प्राप्त कर लिया.
अमेरिका में कैसे काम करता है इजरायल लॉबी
आज अमेरिका में इजरायल लॉबी एक प्रभावशाली नेटवर्क है जो एआईपीएसी (अमेरिकन इजरायल पब्लिक अफेयर्स कमेटी), जिन्सा (ज्यूइश इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी ऑफ अमेरिका), ईसाई जायोनिस्ट समूह, थिंक टैंक, पीएसी (पॉलिटिकल एक्शन कमेटियां) और व्यक्तिगत दानदाताओं जैसे विभिन्न संगठनों से मिलकर बना है.
एआईपीएसी और जिन्सा सहित इजरायल समर्थक समूहों का शक्तिशाली नेटवर्क, लॉबिंग, चुनावी चंदे और रणनीतिक प्रभाव के माध्यम से अमेरिकी रक्षा नीति और चुनावों को आकार देना जारी रखता है, जिसमें हाल के चुनावों में एआईपीएसी समर्थित उम्मीदवारों में से 96% ने जीत हासिल की है.
अमेरिका के हर सेक्टर में रहा है यहूदियों का दबदबा
अमेरिका के आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा मामलों पर हमेशा से यहूदी समुदाय का प्रभाव रहा है. अलबर्ट आइंस्टीन और ओपेनहाइमर जैसे महान साइंटिस्ट से लेकर मार्क जुकरबर्ग तक बड़े अमेरिकी शख्सियतों का काफी दबदबा रहा है. इससे भी अमेरिका के यहूदी समुदाय की मजबूत स्थिति का पता चलता है. ऐसे में कुछ वैसे बड़े शख्सियतों पर भी नजर डालते हैं, जो सिर्फ अमेरिका ही नहीं दुनियाभर के आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े फैसलों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. हालांकि, इनका इजरायल लॉबी से सीधा संपर्क का कोई दावा नहीं किया जाता है, लेकिन ये सभी यहूदी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले हैं.
मार्क जुकरबर्ग से लेकर सैम ऑल्टमैन तक
आज यहूदी समाज गर्व से अपने समुदाय से जुड़े कुछ ऐसे लोगों के नामों की गिनती करता है, जो काफी प्रभावशाली है. इनमें चैट जीटीपी की शुरुआत करने वाले सैम ऑल्टमैन भी शामिल हैं. सैम ऑल्टमैन शिकागो में एक यहूदी परिवार में पैदा हुए और सेंट लुइस में पले-बढ़े. उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान की पढ़ाई की, लेकिन 19 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़ दी और लोकेशन-बेस्ड सोशल नेटवर्किंग ऐप लूप्ट की सह-स्थापना की. ऑल्टमैन ने ही चैटजीपीटी की स्थापना की, जिसने एआई से पूरी दुनिया को परिचित कराया.
जेरुशलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऑल्टमैन ने टाइम पत्रिका को बताया था कि मैं मध्य-पश्चिमी यहूदी हूं. मुझे लगता है कि यह मेरे सटीक मानसिक मॉडल को पूरी तरह से स्पष्ट करता है - बहुत आशावादी और किसी भी समय चीजें बहुत गलत होने के लिए तैयार.
एंटनी ब्लिंकन
अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन भी यहूदी हैं. वे पहले ऐसे अमेरिकी विदेश मंत्री थे जिन्होंने खुले तौर पर और गर्व से अपनी यहूदी पहचान को स्वीकार किया. वे हमेशा से जानते थे कि वे यहूदी हैं और उन्होंने कभी भी सत्ता में बने रहने के लिए अपनी यहूदी पहचान को कम करके दिखाने की कोशिश नहीं की.
जन कौम और मार्क जुकरबर्ग
जन कौम और मार्क जुकरबर्ग ने कम्युनिकेशन तकनीक और इसकी वैश्विक पहुंच पर अपने गहन प्रभाव के लिए संयुक्त रूप से सबसे प्रभावशाली यहूदियों की सूची में शामिल किए जाते हैं. जान कौम ने व्हाट्सएप के सह-संस्थापक और सीईओ के रूप में दुनिया भर में संचार के तरीकों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. कौम के नेतृत्व में व्हाट्सएप की अभूतपूर्व वृद्धि ने फेसबुक को आकर्षित किया, जिसने 2014 में इसे 19 अरब डॉलर में अधिग्रहित कर लिया.
वहीं मेटा प्लेटफॉर्म्स (पूर्व में फेसबुक) के सह-संस्थापक और सीईओ मार्क ज़करबर्ग ने सोशल नेटवर्किंग और वर्चुअल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं. उनके मार्गदर्शन में, मेटा मेटावर्स में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा है, जिसने भौगोलिक बाधाओं के बावजूद लोगों के ऑनलाइन जुड़ने और बातचीत करने के तरीके को मौलिक रूप से बदल दिया है.
जेनेट येलेन
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अध्यक्ष (2014-2018) के रूप में सेवा करने वाली पहली महिला और फिर दो साल पहले वित्त सचिव के रूप में नियुक्त होने वाली जेनेट येलेन की आर्थिक सूझबूझ और नेतृत्व ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को आकार दिया है. जेनेट येलेन भी एक अमेरिकी यहूदी हैं और इजरायल गर्व से यदूदी समाज के प्रभावशाली लोगों में इनकी गिनती करता है.
जेक टैपर
सीएनएन के डीसी स्थित प्रमुख एंकर और 'द लीड विद जेक टैपर' के होस्ट जेक टैपर कई वर्षों से एक प्रमुख हस्ती रहे हैं और 2023 में प्रकाशित थ्रिलर उपन्यास 'ऑल द डेमन्स आर हियर' के बेस्टसेलर लेखक हैं. यहूदी दृढ़ निश्चय से प्रेरित होकर, वे अमेरिकी पत्रकारिता जगत की सबसे विश्वसनीय और प्रामाणिक आवाजों में से एक बने हुए हैं. इनकी गिनती भी यहूदी समुदाय के गिने चुने लोगों में होती है.
इस तरह अमेरिका में 'इजरायली लॉबी' दशकों से मजबूत होती रही है. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से ही अमेरिका के लिए इजरायली हितों का ध्यान रखता आया है और इसमें अमेरिका की इजरायली लॉबी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और यही वजह है कि मिडिल ईस्ट में खासकर ईरान के मामले में अमेरिका हस्तक्षेप करता रहा है.
सिद्धार्थ भदौरिया