साल 1969 था. ईरान में आज के माहौल से बिल्कुल अलग स्थिति थी. देश में राजतंत्र था और वहां शाह मोहम्मद रजा पहलवी का शासन चल रहा था. पश्चिमी प्रभाव मजबूत था और आधुनिकीकरण की कोशिशें हो रही थीं. हालांकि धार्मिक और क्रांतिकारी ताकतें भी पर्दे के पीछे सक्रिय थीं. किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले दस सालों में ईरान की किस्मत पूरी तरह बदल जाएगी. 1979 में इस्लामिक क्रांति आएगी, शाह का तख्ता पलट होगा और अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी की अगुवाई में इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना होगी.
इसी साल 8 सितंबर 1969 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में अयातुल्लाह अली खामेनेई के घर एक बेटे का जन्म हुआ. उस समय अली खामेनेई एक युवा क्लेरिक और क्रांतिकारी थे, जो शाह के शासन के खिलाफ सक्रिय थे. इस बच्चे का नाम रखा गया मोजतबा. यह अरबी मूल का नाम है, जिसका अर्थ होता है ‘चुना हुआ’. मोजतबा अली खामेनेई के छह बच्चों में दूसरे नंबर के बेटे हैं. सबसे बड़े बेटे का नाम मोस्तफा है और उसके बाद मुजतबा का जन्म हुआ.
अब आते हैं साल 2026 पर. 28 फरवरी 2026 को ईरान एक बड़े युद्ध में फंस चुका था. अमेरिका और इजरायल की संयुक्त हवाई कार्रवाई में तेहरान पर हमले हुए. इस हमले में अली खामेनेई की मौत हो गई. रिपोर्टों के अनुसार उनके आवास पर हुए हमले में उनकी पत्नी मंसूरेह खोजस्ते, एक बेटी और कई वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए.मोजतबा खुद इस हमले में घायल हुए, लेकिन बच गए. ईरान ने अपना सुप्रीम लीडर खो दिया था.
सत्ता का चेहरा जरूर बदला, लेकिन विचारधारा वही रही
इसके बाद 8 मार्च 2026 को ईरान की सर्वोच्च धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने आपात बैठक बुलाई और मोजतबा खामेनेई को देश का तीसरा सुप्रीम लीडर चुन लिया. ऐसे समय में अमेरिका और इजरायल की यह उम्मीद टूट गई कि ईरान की इस्लामिक व्यवस्था अब खत्म हो जाएगी. हालांकि सत्ता का चेहरा जरूर बदला, लेकिन विचारधारा वही रही.
अली खामेनेई के बाद अब एक ऐसा नेता सामने आया जो अमेरिका और इजरायल के प्रति उतना ही सख्त माना जाता है. उनके सत्ता में आते ही मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर हमले तेज होने की खबरें सामने आने लगीं. ऐसे में यह सवाल उठने लगा कि क्या ईरान का यह नया सुप्रीम लीडर अपने पिता से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है.
क्या है विदेशी मीडिया और विशेषज्ञों की राय
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मोजतबा को उनके पिता से भी ज्यादा कट्टर माना जाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) से गहरे संबंध हैं और युद्ध के दौर में सत्ता को मजबूत बनाए रखने के लिए उन्हें चुना गया. इजरायल पहले ही उन्हें संभावित निशाना बता चुका है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी नियुक्ति को 'अस्वीकार्य' बताया है.
बीबीसी की रिपोर्ट में मोजतबाको कम प्रोफाइल लेकिन सख्त नेता बताया गया है. माना जा रहा है कि वे अपने पिता की नीतियों को जारी रख सकते हैं, लेकिन उनका रुख और ज्यादा आक्रामक हो सकता है.
अल जजीरा से बात करते हुए ईरान मामलों के विशेषज्ञ अली हाशेम ने कहा कि मोजतबा लंबे समय तक अपने पिता के करीबी सहयोगी और गेटकीपर रहे हैं. उनके मुताबिक, मोजतबा अमेरिका और इजरायल के प्रति अपने पिता जैसा ही रुख रखते हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा सख्त हो सकते हैं.
'दुनिया का सबसे खतरनाक आदमी'
वहीं द अटलांटिक में प्रकाशित एक लेख में उन्हें 'दुनिया का सबसे खतरनाक आदमी' तक कहा गया. लेख में दावा किया गया कि वे अपने पिता से ज्यादा हिंसक और विचारधारा से प्रभावित हो सकते हैं, जिससे ईरान की नीतियां और कठोर हो सकती हैं.
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि मोजतबा के आईआरजीसी के साथ मजबूत रिश्ते हैं और वे ज्यादा आक्रामक नीतियां अपना सकते हैं. उनकी नियुक्ति के बाद वैश्विक बाजारों में भी असर देखा गया और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं.
क्या मोजतबा अपने पिता से ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि अली खामेनेई को अपेक्षाकृत अनुमानित नेता माना जाता था, जिनके साथ बातचीत की कुछ गुंजाइश रहती थी. लेकिन मोजतबा के बारे में कहा जा रहा है कि उनका रुख ज्यादा सख्त हो सकता है.
इसी वजह से कई विश्लेषक मानते हैं कि मोजतबा की अगुवाई में ईरान का रवैया ज्यादा आक्रामक और अप्रत्याशित हो सकता है. अगर ऐसा हुआ, तो मिडिल ईस्ट में तनाव और परमाणु कार्यक्रम को लेकर वैश्विक चिंता और बढ़ सकती है.
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