Advertisement

इन्फॉर्मेशन

इजरायल की कैपिटल को क्यों कहा जाता है 'व्हाइट सिटी', इसके पीछे की दिलचस्प है कहानी

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:47 PM IST
  • 1/9

इजरायल के तेल अवीव शहर को 1930 के दशक में हजारों हल्के रंग की इमारतों के निर्माण के बाद 'सफेद शहर' यानी की 'व्हाइट सिटी' के नाम से जाना जाने लगा. आज, यह अनूठा क्षेत्र यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त है और इजरायल के सबसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में से एक है. (Photo - Pexels)

  • 2/9

तेल अवीव, इजरायल के सबसे प्रसिद्ध शहरों में से एक है, जिसे अक्सर 'सफेद शहर' कहा जाता है, लेकिन यह नाम सिर्फ रंग से संबंधित नहीं है - यह शहर के निर्माण और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों द्वारा इसे आकार देने की कहानी बयां करता है.1930 के दशक में यूरोप, विशेषकर जर्मनी से कई यहूदी वास्तुकार उस क्षेत्र में जाकर बस गए जो अब इजरायल है. उस समय, यूरोप राजनीतिक अशांति से गुजर रहा था और कई लोगों को देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. (Photo - Pexels)
 

  • 3/9

इन वास्तुकारों ने आधुनिक डिजाइन, विशेष रूप से बॉहॉस शैली का अध्ययन किया था, जो सरल, उपयोगी और स्वच्छ इमारतों पर केंद्रित थी. तेल अवीव पहुंचने पर उन्होंने एक नए प्रकार के शहर का निर्माण शुरू किया.समय के साथ, हल्के रंगों, सरल आकृतियों और खुले डिजाइन वाली हजारों इमारतें बनाई गईं. इसी वजह से तेल अवीव को 'सफेद शहर' नाम मिला और आज यह इजराइल के सबसे महत्वपूर्ण वास्तुशिल्प स्थलों में से एक है. (Photo - Pexels)
 

Advertisement
  • 4/9

'व्हाइट सिटी' तेल अवीव का एक केंद्रीय क्षेत्र है जिसमें बॉहॉस शैली में निर्मित 4,000 से अधिक इमारतें हैं. इनमें से अधिकांश का निर्माण 1930 और 1950 के दशक के बीच हुआ था. अपनी अनूठी डिजाइन और प्लानिंग के कारण, यूनेस्को ने इसे 2003 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया.इस वजह से तेल अवीव  में दुनिया भर में बॉहॉस शैली की इमारतों का सबसे बड़ा संग्रह मौजूद है. यह क्षेत्र न केवल इजरायल के लिए, बल्कि वैश्विक वास्तुकला के लिए भी महत्वपूर्ण है. (Photo - Pexels)
 

  • 5/9

यह शैली इजरायल में कैसे आई?
बॉहॉस शैली की शुरुआत जर्मनी में हुई थी. जब नाजी शासन सत्ता में आया, तो कई यहूदी वास्तुकारों को यूरोप छोड़ना पड़ा. उनमें से कुछ तेल अवीव आए, जो उस समय भी विकासशील अवस्था में था.वे अपने साथ आधुनिक डिजाइन के विचार लेकर आए और घर, दफ्तर और सार्वजनिक स्थान बनाने लगे. इसी तरह इजरायल का तेल अवीव शहर आधुनिक वास्तुकला का केंद्र बन गया.हालांकि,  ये विचार यूरोप से आए थे, लेकिन इमारतों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बदला गया. इसी वजह से व्हाइट सिटी वैश्विक डिजाइन और स्थानीय जीवन का मिश्रण बन गया. (Photo - Pexels)
 

  • 6/9

ये इमारतें सफेद क्यों हैं?
सफेद रंग को चुनने का एक व्यावहारिक कारण था. हल्के रंग सूर्य की रोशनी को परावर्तित करते हैं और गर्म मौसम में इमारतों को ठंडा रखने में मदद करते हैं, जो तेल अवीव की जलवायु के लिए महत्वपूर्ण है.वास्तुकारों ने हवा के सुगम प्रवाह के लिए बालकनी, संकरी खिड़कियां और खुली जगह जैसी विशेषताएं भी जोड़ीं. सपाट छतों का इस्तेमाल ऐसे स्थानों के रूप में किया गया जहां लोग, विशेष रूप से शाम के समय, आराम कर सकते थे.इसीलिए व्हाइट सिटी को अक्सर यहां की जलवायु के अनुरूप डिजाइन किया गया शहर बताया जाता है. इसलिए, इसका डिज़ाइन न केवल आधुनिक था, बल्कि स्मार्ट और इज़राइल के जीवन के लिए उपयुक्त भी था. (Photo - Pixabay)
 

Advertisement
  • 7/9

आज के समय में श्वेत नगरी का महत्व क्यों है?
व्हाइट सिटी आज भी तेल अवीव का एक जीवंत हिस्सा है. लोग आज भी इन इमारतों में रहते और काम करते हैं. वर्षों से, इनमें से कई इमारतों की मरम्मत और जीर्णोद्धार किया गया है ताकि उनका मूल स्वरूप बरकरार रहे. (Photo - Pixabay)
 

  • 8/9

यूनेस्को ने इस क्षेत्र को मान्यता दी है क्योंकि यह दर्शाता है कि आधुनिक वास्तुकला को स्थानीय संस्कृति और मौसम की स्थितियों के अनुरूप कैसे ढाला गया था. यह एक ऐसी शहरी योजना को दिखाती है जिसमें खुले स्थान और व्यवस्थित सड़कें शामिल हैं.आज, व्हाइट सिटी दुनिया भर के पर्यटकों, छात्रों और वास्तुकारों को आकर्षित करती है जो इजरायल के इस अनूठे हिस्से को देखने आते हैं. (Photo - Pexels)
 

  • 9/9

तेल अवीव को वो शहर है जो कभी सोता नहीं?
जी हां, तेल अवीव अपनी व्यस्त और सक्रिय जीवनशैली के लिए भी जाना जाता है. इस शहर को अक्सर 'तेल अवीव नॉनस्टॉप सिटी' के रूप में प्रचारित किया जाता है, जो इसकी ऊर्जावान और हमेशा सक्रिय रहने वाली छवि से मेल खाता है, जिसे लोग अक्सर ऐसा शहर जो कभी सोता नहीं कहते हैं. (Photo - Pexels)
 

Advertisement
Advertisement

लेटेस्ट फोटो

Advertisement