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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कभी इस देश का था कब्जा, जहाजों से खूब वसूलता था टैक्स

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:50 PM IST
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इन दिनों ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग छिड़ी हुई है. इस बीच ईरान से सटा एक अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित हो गया है और अब पूरा वॉर इसी पर केंद्रित हो चुका है. क्योंकि, इस रास्ते से दुनियाभर का 25 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होती है. आज ईरान का होर्मुज पर दबदबा है, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था कि इस पर किसी और देश का कब्जा था.  इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स भी वसूले जाते थे. ऐसे में जानते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वो इतिहास, जब इस पर ईरान का कोई दावा नहीं हुआ करता था. (Photo- AP)

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आज जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित है. इस कारण  ईरान के अलावा सऊदी अरब, ओमान, यूएई, कुवैत जैसे खाड़ी देशों की तेल सप्लाई रुक गई है. वहीं भारत और दूसरे देशों तक जाने वाले तेल के टैंकर समुद्र में ठहर गए हैं, जिससे दुनियाभर में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. (Photo- AP)
 

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ईरान हमेशा से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दावा करता आया है और कई ऐसे मौके आए हैं, जब भी खाड़ी देशों पर युद्ध के संकट छाए हैं, तब-तब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बाधित हुआ है.  लेकिन, हमेशा से ऐसे हालात नहीं थे. किसी समय होर्मुज पर न तो ईरान, न ही ब्रिटेन और न अमेरिका, किसी का कब्जा नहीं था. इस पर पुर्तगालियों का दबदबा था. (Photo- AP)
 

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1507 में  पुर्तगाल ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  पर कब्जा किया था. पुर्तगाली खोजकर्ता सबसे पहले 1507 में फारस की खाड़ी में तब पहुंचे जब वे भारत जाने का रास्ता खोज रहे थे और अफ्रीका के चारों ओर चक्कर लगा रहे थे. इसी दौरान होर्मुज नामक छोटे द्वीप पर पुर्तागलियों ने कब्जा कर लिया. (Photo- AP)
 

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पुर्तगालियों ने होर्मुज द्वीप पर एक किला और एक सीमा शुल्क घर बनाया ताकि रेशम, मसाले, मोती और अरबी घोड़ों जैसी वस्तुओं का व्यापार करने के लिए इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स वसूला जा सके. (Photo- AP)
 

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पुर्तगाली अधिकारियों ने 'कार्टाजा' जारी किए, जैसा कि वे उन्हें कहते थे - फारस की खाड़ी में व्यापार करने की सशुल्क अनुमति. हिस्ट्री चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, लावेयर विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफेसर रुडोल्फ मैथी कहते हैं कि पुर्तगाल ने खुद को इस क्षेत्र में सहायक शक्ति बना लिया. वे काफी दमनकारी हो गए, इसलिए उनके खिलाफ काफी प्रतिरोध हुआ. (Photo- AP)
 

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पुर्तगालियों ने एक सदी तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से व्यापार करके खूब धन कमाया, लेकिन 1622 में फारस के शक्तिशाली सफाविद राजवंश के शाह अब्बास प्रथम (1588 से 1629 तक) और अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुए गठबंधन द्वारा उन्हें खदेड़ दिया गया. अंग्रेजों ने सफाविदों के साथ लाभकारी व्यापारिक अनुबंधों के बदले नौसैनिक शक्ति प्रदान की. (Photo- PTI)
 

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