ईंधन के वैश्विक संकट और ईंधन संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उत्तराखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार 15 मई को 'नो व्हीकल डे' मनाया गया. इस पहल के तहत मुख्य न्यायाधीश सहित सभी न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, महाधिवक्ता, अधिवक्ता, अधिकारी और कर्मचारी पैदल हाईकोर्ट पहुंचे. अदालत परिसर में इस पहल को लेकर खास संदेश दिया गया कि ईंधन बचाना समय की आवश्यकता है.
दरअसल, शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित, न्यायमूर्ति आशीष नैथानी, न्यायमूर्ति आलोक महरा और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह करीब आधा किलोमीटर दूर पंत सदन से पैदल कोर्ट पहुंचे. इस दौरान सभी ने ईंधन संरक्षण का संदेश दिया.
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राज्य के महाधिवक्ता एस.एन. बाबुलकर भी लगभग एक किलोमीटर दूर ओक पार्क स्थित सरकारी आवास से पैदल हाईकोर्ट पहुंचे. इस पहल में न्यायिक तंत्र से जुड़े सभी लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई.
न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने भी निभाई भागीदारी
इस कार्यक्रम में रजिस्ट्रार जनरल योगेश गुप्ता, अन्य रजिस्ट्रार और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रदीप मनी त्रिपाठी सहित सभी न्यायिक अधिकारी और कर्मचारी भी पैदल अदालत पहुंचे. समस्त अधिवक्ताओं ने भी इस पहल में हिस्सा लिया और ईंधन बचाने का संदेश दिया.
'नो व्हीकल डे' को लेकर पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए थे, ताकि सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी इस अभियान में भाग ले सकें. अदालत परिसर में इस पहल को सकारात्मक रूप से देखा गया.
इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि राष्ट्रहित में सभी को इस मुहिम में अपना योगदान देना चाहिए, क्योंकि हम सभी देश के नागरिक हैं और यह हमारी जिम्मेदारी है.
वर्चुअल पैरवी की दी गई छूट
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए गए थे. इन निर्देशों के अनुसार बाहर से आने वाले अधिवक्ताओं को वर्चुअल माध्यम से पैरवी की अनुमति दी गई थी.
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ईंधन संरक्षण अभियान के दौरान न्यायिक कार्य प्रभावित न हो. अदालत की कार्यवाही सुचारु रूप से जारी रही.
इस तरह उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 'नो व्हीकल डे' मनाकर ईंधन संरक्षण का संदेश दिया और समाज के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया.
लीला सिंह बिष्ट