500-1000 के नोट बंद से यूपी चुनावों पर पड़ेगा असर, पार्टियां परेशान

उत्तर प्रदेश चुनाव के ऐन पहले पीएम मोदी का 500 और हजार के नोटों को बैन करने के फैसले का सीधा असर दिखना तय है. अब नेताओं की कैश की ऐश शायद बंद जाएगी. पीएम मोदी के इस कदम के बाद तमाम दलों में चिंता की लकीरें साफ दिख रही है.

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500 और 1000 के नोट बंद 500 और 1000 के नोट बंद

अमित रायकवार / कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 09 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 9:31 PM IST

उत्तर प्रदेश चुनाव के ऐन पहले पीएम मोदी का 500 और हजार के नोटों को बैन करने के फैसले का सीधा असर दिखना तय है. अब नेताओं की कैश की ऐश शायद बंद हो जाएगी. पीएम मोदी के इस कदम के बाद तमाम दलों में चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं. लेकिन फिलहाल यूपी चुनाव में इसके असर को लेकर आकलन तो सभी कर रहे हैं लेकिन बोलने से सभी कतरा रहे हैं.

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चुनावों में नहीं हो सकेगा काले धन का इस्तेमाल
जिन दलो में सबसे ज्यादा चुनावी खर्चों का आरोप लगता है. उसमें बीजेपी भी अवव्ल मानी जाती है. लेकिन पीएम के एलान के बाद से बीजेपी खासी खुश दिखाई दे रही है. बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक के मुताबिक ये उन नेताओं के लिए बज्रपात है. जो सिर्फ पैसे के दम पर चुनाव जीतने का दावा करते हैं. बीजेपी नेता कहते है इससे सिर्फ काले धन पर ही नहीं बल्कि चुनाव में होने बाले बेतहाशा पैसे के इस्तेमाल पर भी रोक लगेगी.

'समाजवादी पार्टी कालेधन का इस्तेमाल के खिलाफ'
समाजवादी पार्टी कहती है वो कालेधन के हमेशा खिलाफ रही है. लेकिन मोदी का ये कदम आर्थिक इमरजेंसी जैसे कदम है. समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता शाहिद के मुताबिक पार्टी हमेशा काले धन के विरोध में रही है, पार्टी के मुताबिक उनकी समाजवादी पार्टी का चुनावों में न तो धन का ज्यादा इस्तेमाल करती न इस आधार पर चुनाव जीतती है. पार्टी के मुताबिक इस कदम का असर गरीबों पर पड़ेगा इसका चुनाव से कोई लेना देना नहीं है.

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नेता हैं परेशान
वहीं कांग्रेस के अखिलेश प्रताप सिंह के मुताबिक काले धन का असर चुनाव में दिखेगा कि नहीं ये तो कहना मुश्किल है. लेकिन पीएम मोदी की बड़ी-बड़ी सभाऐं, जिसमें पैसे का जबरदस्त इस्तेमाल होता है. अगर छोटी हो जाए तभी माना जाएगा कि मोदी के इस कदम का इफेक्ट है. बहरहाल विधानसभा चुनावों में एक कैंडिडेट के खर्च की सीमा सिर्फ 28 लाख रूपये हैं. लेकिन खर्च इससे कई गुणा ज्यादा होता है. चुनाव ज्यादातर खर्चा कैश के सहारे होता है. अब चुनावों में ये कैश कहां से आएगा ये सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है. लेकिन नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें साफ हैं.

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