7 हजार प्रोजेक्ट,100 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च, PM ने बताई इंफ्रास्ट्रक्चर की अहमियत

पीएम मोदी ने कहा, नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर देश 100 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. अलग-अलग सेक्टर्स के लगभग 7 हजार प्रोजेक्ट्स की पहचान भी की जा चुकी है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 9:29 AM IST

  • नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर 100 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च
  • अलग-अलग सेक्टर्स के लगभग 7 हजार प्रोजेक्ट्स की पहचान भी की जा चुकी है

कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया. इसमें उन्होंने कई अहम मुद्दों पर जोर दिया. पीएम मोदी के भाषण में आत्मनिर्भर भारत पर खासा जोर रहा. पीएम मोदी ने महिला शक्ति और नई साइबर सुरक्षा नीति का भी जिक्र किया. भाषण में पीएम मोदी ने नेशनल इंफ्रास्ट्रक्टर पाइपलाइन प्रोजेक्ट के बारे में बताया.

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पीएम मोदी ने कहा, 'नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर देश 100 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. अलग-अलग सेक्टर्स के लगभग 7 हजार प्रोजेक्ट्स की पहचान भी की जा चुकी है. ये एक तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर में एक नई क्रांति की तरह होगा. भारत को आधुनिकता की तरफ, तेज गति से ले जाने के लिए, देश के ओवरऑल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट को एक नई दिशा देने की जरूरत है. ये जरूरत पूरी होगी नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन प्रोजेक्ट से.'

एफडीआई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आज दुनिया की बहुत बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं. हमें मेक-इन-इंडिया के साथ-साथ मेक-फॉर-वर्ल्ड के मंत्र के साथ आगे बढ़ना है. इस शक्ति को, इन रिफॉर्म्स और उससे निकले परिणामों को देख रही है. बीते साल, भारत में एफडीआई ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. भारत में एफडीआई में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. ये विश्वास ऐसे ही नहीं आता है.'

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देश ने आत्मविश्वास नहीं खोयाः पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'तमाम प्राकृतिक आपदाओं के बाद भी देश ने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया. देश को कोरोना के प्रभाव से बाहर निकालना हमारी प्राथमिकता है.हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है-सामर्थ्य्मूलं स्वातन्त्र्यं, श्रममूलं च वैभवम्.. किसी समाज, किसी भी राष्ट्र की आज़ादी का स्रोत उसका सामर्थ्य होता है, और उसके वैभव का, उन्नति प्रगति का स्रोत उसकी श्रम शक्ति होती है. देश के सामान्य नागरिक की मेहनत, उसके परिश्रम का कोई मुकाबला नहीं है. बीते 6 वर्षों में देश में मेहनत करने वाले लोगों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई गई हैं. बिना किसी भेद-भाव के, पूरी पारदर्शिता के साथ सभी लोगों को कई योजनाओं के द्वारा मदद पहुंचाई गई है.'

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