गोवा में डिप्टी सीएम बनाकर संकट टालने की तैयारी में बीजेपी, ये नाम रेस में आगे

पर्रिकर की तबीयत खराब होने से गोवा में सियासी संकट पैदा हो गया है. बीजेपी चाहती है कोई डिप्टी सीएम चुनकर फ्लोर टेस्ट से बचा जा सके और कांग्रेस की संभावनाओं पर भी पानी फेरा जा सके.

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मनोहर पर्रिकर की फाइल फोटो मनोहर पर्रिकर की फाइल फोटो

रविकांत सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST

गोवा के मुख्यमंत्री की तबीयत खराब है और वे दिल्ली के एम्स में भर्ती हैं. उधर गोवा में बीजेपी की सरकार के सामने संकट इस बात का है कि आखिर राजकाज संभाले कौन. पर्रिकर की तरह तजुर्बे वाला कोई नेता दूर-दूर तक नहीं दिखता और वहां सरकारी कामकाज एकतरह से सुस्ती वाली मोड में चला गया है.

पर्रिकर की खराब तबीयत और बीजेपी नेतृत्व में 'वैक्यूम' का पूरा फायदा कांग्रेस उठाना चाहती है, तभी उसने आनन-फानन में राज्यपाल से मिलकर फ्लोर टेस्ट की मांग की है. इस बाबत एक ज्ञापन भी सौंपा गया है. दूसरी ओर बीजेपी है जिसे भलीभांति पता है कि मुख्यमंत्री बदलने पर विधान सदन में फ्लोर टेस्ट होगा और पार्टी सियासी भंवर में फंस सकती है. इसलिए पार्टी का पूरा ध्यान इस बात पर है कि कोई डिप्टी सीएम बनाकर संकट टाला जाए, जिससे कांग्रेस की रणनीति भी फेल हो.

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डिप्टी सीएम को लेकर विश्वजीत राणे का नाम सबसे आगे चल रहा है. वहीं, मुख्यमंत्री पद के लिए राज्यसभा सदस्य विनय तेंदुलकर और बहुजन समाज के नेता का नाम भी आगे आ रहा है.

सुदीन धवलीकर के नाम पर बवाल

मीडिया के कुछ धड़े में डिप्टी सीएम पद के लिए सुदीन धवलीकर का नाम भी आ रहा है लेकिन इनके नाम पर पूर्व में बवाल हो चुका है, इसलिए इन्हें पद सौंपने की संभावना काफी कम दिखती है. धवलीकर का मामला इसलिए फंस रहा है क्योंकि वे महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के वरिष्ठ नेता तो हैं लेकिन उनकी पार्टी में विलय होना नहीं चाहती. जबकि यह मांग तेज हो गई है कि पर्रिकर सरकार में एमजीपी के तीन विधायक अब औपचारिक रूप से बीजेपी में मिल जाएं ताकि बीजेपी की संख्या 14 से 17 हो जाए. इससे फ्लोर टेस्ट में कामयाबी हासिल करने में बीजेपी को मदद मिलेगी.

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बीजेपी में एमजीपी के विलय को एमजीपी अध्यक्ष ने नकारते हुए कहा, हम विलय नहीं कर सकते क्योंकि हमारी पार्टी वर्षों की मेहनत का फल है और भविष्य में गोवा की राजनीति की उम्मीद भी. गोवा में 12-13 प्रतिशत वोट बैंक है, इसलिए बीजेपी के साथ मिलने का कोई सवाल नहीं.

धवलीकर की इस बात से साफ है कि वे बीजेपी में नहीं मिलेंगे. और यह भी साफ है कि बीजेपी बिना मिलाए उन्हें कोई बड़ा पद नहीं दे सकती, इसलिए धवलीकर के नाम पर फिलहार ब्रेक लगता दिख रहा है. मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमोद सावंत का भी नाम आगे आ रहा है, जो विधानसभा के स्पीकर हैं. स्वतंत्रता दिवस के दिन अपनी गैर-मौजूदगी में पर्रिकर ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए सावंत को ही चुना था.

अगर तेंदुलकर या नाइक का नाम मुख्यमंत्री के लिए तय किया जाता है, तो कम से कम एक विधायक को इस्तीफा देना पड़ेगा ताकि उपचुनाव कराया जा सके. हालांकि ज्यादातर विधायक नाइक के नाम पर संतुष्ट हैं लेकिन उनके नाम पर अभी पर्रिकर की ओर से हरी झंडी नहीं मिली है. ऐसा माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के नाम पर पर्रिकर को ही हां करना है.

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