कर्नाटक के पूर्व सीएम कुमारस्वामी बोले- PM मोदी का इसरो जाना वैज्ञानिकों के लिए था अपशगुन

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी का बेंगलुरु आना इसरो वैज्ञानिकों के लिए अपशगुन रहा. कुमारस्वामी ने कहा कि पीएम मोदी बेंगलुरु इस तरह से आए, जैसे वो खुद चंद्रयान-2 की लैंडिंग करवाने वाले थे और संदेश भेजने वाले थे.

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कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी (Courtesy- ANI) कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी (Courtesy- ANI)

नागार्जुन

  • बेंगलुरु,
  • 12 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 7:56 AM IST

  • चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की चांद पर लैंडिंग के समय इसरो में थे पीएम
  • कुमारस्वामी बोले- पीएम ऐसे बेंगलुरु आए, मानो वही चंद्रयान उड़ा रहे हैं

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर करारा हमला बोला है. कुमारस्वामी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी का बेंगलुरु आना इसरो वैज्ञानिकों के लिए अपशगुन साबित हुआ. प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि पीएम मोदी बेंगलुरु इस तरह से आए, जैसे वो खुद चंद्रयान-2 की लैंडिंग करवाने वाले थे और संदेश भेजने वाले थे.

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प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि मोदी ऐसे बेंगलुरु आए थे, मानो वो खुद चंद्रयान-2 को उड़ा रहे हों. शायद पीएम का इसरो में कदम रखना वैज्ञानिकों के लिए सही नहीं रहा. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों ने इसके लिए 10 साल मेहनत की. साल 2008 में ही कैबिनेट ने इसके लिए मंजूरी दे दी थी.

आपको बता दें कि चांद पर लैंडिंग से पहले चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया है. विक्रम की लैंडिंग के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेंगलुरु स्थित इसरो के मुख्यालय पर मौजूद थे. अब इसरो अपने डीप स्पेस नेटवर्क (डीएसएन) के जरिए चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिश में जुटा है. इस काम में नासा भी इसरो की मदद के लिए सामने आया है.

इसरो के एक अधिकारी के मुताबिक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (जेपीएल) विक्रम को रेडियो सिग्नल भेज रही है. साथ ही नासा अपने मून ऑर्बिटर से विक्रम लैंडर की लैंडिंग साइट की तस्वीर लेने की भी कोशिश कर रहा है. अगर विक्रम लैंडर की तस्वीर मिलती है या फिर संपर्क होता है, तो नासा इसको इसरो के साथ साझा करेगा.

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विक्रम लैंडर से संपर्क करने की कोशिश तब तक की जाएगी, जब तक सूरज की रोशनी विक्रम लैंडर के उतरने वाले क्षेत्र में रहेगी. लिहाजा लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिश 20-21 सितंबर तक ही जारी रहेगी. अगर इस दौरान विक्रम से संपर्क हो जाता है, तो यह अच्छी खबर होगी.

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