ईरान में युद्ध के दौरान जो तबाही मची है उसका खामियाजा आम जनता झेल रही है. युद्ध के मैदान से आजतक की टीम आपको दिखा रही है तबाही और जज्बे की वो तस्वीरें, जो दुनिया की नजरों से ओझल हैं. इजरायल और अमेरिकी हमलों के बीच ईरान के उन इलाकों में आजतक की टीम पहुंची, जहां मिसाइलों ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है. खंडहरों के बीच से आखिर युद्ध की विभीषिका के बीच ईरान का आम नागरिक और वहां की सरकार किस तरह से जवाब दे रही है.
ईरान में 'शहादत' सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा जज्बा है. इजरायली और अमेरिकी हमलों में शहीद हुए लोगों को यहां हर रोज, हर रात याद किया जाता है. शहर के हर चौराहे पर आपको उन शहीदों के पोस्टर नजर आएंगे, जिन्होंने देश की रक्षा में अपनी जान दी. तस्वीरों में ईरान की उस टॉप लीडरशिप को देख सकते हैं, जो विदेशी हमलों का शिकार हुई. इनमें वो जांबाज कमांडर भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने शौर्य से नाम कमाया और वो स्कूली बच्चे भी, जिनकी मासूमियत को टॉमहॉक मिसाइलों ने लील लिया.
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मिनाब स्कूल का दर्द और ट्रंप को चुनौती
यहां लगे पोस्टरों में मिनाब स्कूल के उन 165 बच्चों की तस्वीरें रूह कंपा देने वाली हैं, जो अमेरिकी मिसाइल हमले में मारे गए थे. यह युद्ध सिर्फ दो सेनाओं के बीच नहीं, बल्कि विचारधाराओं के बीच है. अमेरिका अपनी लड़ाई लड़ सकता है, इजरायल अपनी ताकत दिखा सकता है, लेकिन जिस देश के नागरिक मौत से नहीं डरते और जहां शहादत का जश्न मनाया जाता हो, उस देश को अमेरिका या डोनाल्ड ट्रम्प कैसे झुका पाएंगे? यह सवाल आज पूरी दुनिया के सामने खड़ा है.
अपनों के ही वार से ध्वस्त हुआ यहूदियों का सिनगॉग
ईरान की जमीन से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है. यह न तो कोई मंदिर है और न ही कोई साधारण घर. यह एक 'सिनगॉग' (Synagogue) है यहूदियों का पवित्र धर्मस्थल. बहुत कम लोग जानते हैं कि ईरान में भी एक बड़ी यहूदी कम्युनिटी रहती है. त्रासदी देखिए कि इजरायली सरकार जिस धर्म के नाम पर युद्ध लड़ रही है, उसी के मिसाइल ने यहां के सिनगॉग को ध्वस्त कर दिया. इस इमारत के मलबे के नीचे दबने से दो लोग घायल हुए जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद निकाला गया. यहूदियों की पवित्र धार्मिक पुस्तकें आज भी इस मलबे के नीचे दबी हुई हैं, जिन्हें निकालने की कोशिशें जारी हैं.
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कोलेटरल डैमेज और उजड़ते आशियाने
तबाही का मंजर सिर्फ इस सिनगॉग तक सीमित नहीं है. इसके आसपास के घर पूरी तरह खाली हो चुके हैं, कई मलबे में तब्दील हो गए हैं. इजरायल इसे 'कोलेटरल डैमेज' कह सकता है और यह दावा कर सकता है कि उसका निशाना यहूदी धर्मस्थल नहीं था, लेकिन हकीकत यह है कि बेगुनाह लोग बेघर हो चुके हैं. युद्ध के बीच भी कुछ लोग अपने घरों को फिर से बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जब तक मिसाइलों की गूंज शांत नहीं होती, तब तक ये आशियाने असुरक्षित ही रहेंगे.
गीता मोहन