ICICI की CEO चंदा कोचर और उनके पति के नाम लुक आउट नोटिस जारी

लुक आउट नोटिस एक इंटरनल सर्कुलर जैसा होता है, जिसमें जांच एजेंसी को किसी शख्स के बारे में जिस तरह की जानकारी चाहिए होती है उसे उस हिसाब से जारी की जाती है और इसमें उसे रोकने से लेकर गिरफ्तारी तक शामिल है.

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आईसीआईसीआई की सीईओ और एमडी चंदा कोचर (फाइल फोटो) आईसीआईसीआई की सीईओ और एमडी चंदा कोचर (फाइल फोटो)

aajtak.in / मुनीष पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 06 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 9:51 PM IST

वीडियोकॉन ग्रुप के प्रमुख वेणुगोपाल धूत को आईसीआईसीआई बैंक की ओर से 3250 करोड़ रुपये लोन दिए जाने के मामले में बैंक की सीईओ और एमडी चंदा कोचर और उनके पति की मुश्किलें खत्म होती नहीं दिख रही है. धूत समेत इन तीनों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है. चंदा के देवर से दूसरे दिन भी पूछताछ की गई.

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लुक आउट नोटिस एक इंटरनल सर्कुलर जैसा होता है, जिसमें जांच एजेंसी को किसी शख्स के बारे में जिस तरह की जानकारी चाहिए होती है उसे उस हिसाब से जारी की जाती है और इसमें उसे रोकने से लेकर गिरफ्तारी तक शामिल है.

यह नोटिस सीधे एयरपोर्ट इमीग्रेशन विभाग को भेजा जाता है और उसे देश से बाहर नहीं जाने और उससे संबंधित सूचना देने के लिए निर्देश दिए जाते हैं. गुपचुप तरीके से यह जानकारी दी जाती है जिसका पता उसे खुद न चले.

चंदा के देवर से दो दिन में 14 घंटे पूछताछ

इसी केस के सिलसिले में जांच कर रही सीबीआई ने राजीव कोचर से लगातार दूसरे दिन पूछताछ की. सीबीआई ने राजीव से शुक्रवार को करीब आठ घंटे तक पूछताछ की. सूत्रों के मुताबिक राजीव का आमना-सामना कागजी सबूतों से कराया गया. इसके पहले बृहस्पतिवार को राजीव से सीबीआई ने छह घंटे पूछताछ की थी.

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राजीवको मुंबई एयरपोर्ट पर तब इंटर्सेप्ट किया गया था जब वो देश से बाहर जा रहे थे. उसके बाद सीबीआई को जानकारी दी गई और उसने मुंबई के दफ्तर में उनके साथ पूछताछ शुरू कर दी. शुरुआत में राजीव जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, लेकिन शुक्रवार को जब सीबीआई ने उनका आमना-सामना कागजी सबूतों के साथ कराया तो मुश्किलें बढ़ती नजर आई.

इससे पहले बृहस्पतिवार को के देवर राजीव से लंबी पूछताछ की थी. दीपक कोचर के भाई राजीव की सिंगापुर स्थित इस फाइनेंशियल कंपनी अविस्टा एडवायजरी सवालों के घेरे में है. आरोप है कि इस कंपनी को पिछले छह साल में सात कंपनियों के करीब 1.5 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा लोन को रीस्ट्रक्चर करने का काम मिला और संयोग से ये सभी कंपनियां की भी कर्जदार हैं. ऐसे ही एक सौदे में कर्जदारों का लीड बैंक आईसीआईसीआई है.

चंदा कोचर से पूछताछ संभव

वीडियोकॉन लोन मामले में सीबीआई जल्द ही आईसीआईसीआई बैंक की मुखिया चंदा से पूछताछ कर सकती है. सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'आजतक' को बताया कि वेणुगोपाल धूत को आईसीआईसीआई बैंक द्वारा दिए गए लोन मामले में प्रारंभिक जांच कर रही एजेंसी जल्द ही चंदा कोचर का बयान दर्ज करेगी. चंदा से पूछताछ दिल्ली में होगी, लेकिन सीबीआई इससे पहले उनके पति दीपक कोचर से पूछताछ करेगी.

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को दिए गए एक लोन मामले में कोचर और उनके परिवार के सदस्यों की कथित संलिप्तता की खबरें आई थीं, जिसके बाद सीबीआई ने दीपक कोचर के खिलाफ जांच प्रक्रिया शुरू की.

सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि सभी अधिकारियों जिनका लोन पास कराने में योगदान था, उनके बयान दर्ज कर लिए गए हैं. इसके अलावा सीबीआई ने इस लोन से जुड़े सभी दस्तावेजों को भी जब्त कर लिया है, जिसका अध्ययन किया जा रहा है.

हालांकि, नियमों के मुताबिक, प्रारंभि‍क जांच के दौरान सीबीआई अधिकारिक नोटिस जारी नहीं कर सकती, लेकिन जरूरत पड़ने पर पूछताछ जरूर कर सकती है.

प्रारंभिक जांच के तहत इस बात का पता लगाया जाएगा कि दीपक कोचर और उनके दो रिश्तेदारों द्वारा बनाई गई फर्म को वीडियोकॉन समूह के वेणुगोपाल धूत ने रिश्वत के रूप में कितने रुपये दिए. साथ ही उन आरोपों की भी जांच होगी, जिसमें कहा जा रहा है कि वीडियोकॉन समूह को आईसीआईसीआई बैंक द्वारा दी गई कर्ज सहायता कुछ ले-दे कर दी गई और इसमें कोचर और उनके परिवार के कुछ सदस्यों की कथित संलिप्तता थी.

3,250 करोड़ के लोन में हेरा-फेरी का आरोप

दरअसल, ICICI बैंक और वीडियोकॉन ग्रुप के निवेशक अरविंद गुप्ता ने चंदा कोचर पर आरोप लगाया था कि कोचर ने वीडियोकॉन को कुल 3250 करोड़ रुपये के ऋण मंजूर करने के बदले में गलत तरीके से निजी लाभ लिया.

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रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में दर्ज जानकारी के मुताबिक ICICI बैंक की चीफ चंदा कोचर के पति दीपक ने धूत के साथ मिलकर दिसंबर 2008 में नूपावर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) के नाम से साझा कंपनी बनाई. NRPL में धूत, उनके परिवार के सदस्यों और करीबियों के 50 फीसदी शेयर थे.

बाकी शेयर चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और पैसेफिक कैपिटल के नाम थे. पैसेफिक कैपिटल का स्वामित्त्व दीपक के परिवार के पास ही था. एक साल बाद जनवरी 2009 में धूत ने NRPL के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया और अपने करीब 25000 शेयर दीपक को ट्रांसफर कर दिए. मार्च 2010 में NRPL को सुप्रीम एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से लोन मिला जो कि धूत की ही कंपनी थी.

मार्च 2010 के आखिर तक सुप्रीम एनर्जी ने NRPL का अधिकतर नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. दीपक के पास 5 फीसदी शेयर ही रह गए. करीब 8 महीने बाद धूत ने सुप्रीम एनर्जी में अपनी सारी होल्डिंग अपने सहयोगी महेश चंद्र पुंगलिया के नाम कर दी. दो साल बाद पुंगलिया ने सुप्रीम एनर्जी में अपना सारा स्टेक दीपक कोचर की पिनेकल एनर्जी को 9 लाख रुपये में दे दिया.

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