जेएनयू में देशविरोधी नारेबाजी के चार वीडियो सही, कैंपस में मचा घमासान

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी कैंपस में 9 फरवरी को लगे कथित देश विरोधी नारेबाजी के चार वीडियो जांच में सही पाए गए हैं. यह खुलासा गुजरात के गांधीनगर स्थित फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में हुआ है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को मिली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इन वीडियो फुटेज से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है.

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जल्द सामने आएगी जेएनयू कैंपस में लगे देशविरोधी नारों की सच्चाई जल्द सामने आएगी जेएनयू कैंपस में लगे देशविरोधी नारों की सच्चाई

केशव कुमार / गोपी घांघर / रोशनी ठोकने

  • गांधीनगर/नई दिल्ली ,
  • 17 मई 2016,
  • अपडेटेड 12:15 AM IST

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी कैंपस में 9 फरवरी को लगे कथित देश विरोधी नारेबाजी के चार वीडियो जांच में सही पाए गए हैं. यह खुलासा गुजरात के गांधीनगर स्थित फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में हुआ है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को मिली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इन वीडियो फुटेज से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है.

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जहां एक तरफ जेएनयू छात्रसंघ अब भी इसे केंद्र की साजिश बता रहा है. वहीं एबीवीपी के छात्र दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

जल्द सामने आएंगे मामले से जुड़े कई जवाब
जेएनयू कैंपस में 9 फरवरी को लगे इन देशविरोधी नारों की सच्चाई क्या है और नारे लगाने वाले लोग कौन हैं का जवाब अब जल्द मिलने की उम्मीद है. दरअसल स्पेशल सेल ने के दौरान कैंपस का दौरा किया था. तफ्तीश के दौरान पुलिस ने जेएनयू सिक्योरिटी स्टाफ और कुछ छात्रों के बनाए गए वीडियो फुटेज को जब्त किया था.

वीडियो असली, नहीं हुई कोई छेड़छाड़
जब्त चार वीडियो स्पेशल सेल ने बीते मार्च में गुजरात के गांधीनगर स्थित सीएफएसएल में जांच के लिए भेजे थे. इसकी फाइनल रिपोर्ट आ चुकी है. रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो पूरी तरह सही है. असली विडियो से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. लैब को दिल्ली पुलिस ने जांच के लिए 5 मोबाइल फोन दिए थे.

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अलग-अलग छात्रों के मोबाइल से बना वीडियो
फोरेंसिक सूत्रों के मुताबिक यह उन थे. जो वहां पर खड़े होकर नारेबाजी के वक्त सबकुछ शूट कर रहे थे. हालांकि लैब ने वीडियो की तारीख बताने से इनकार कर दिया था. अलग-अलग वीडियो की जांच रिपोर्ट दिल्ली पुलिस को सौंप दी गई.

लेफ्ट विंग के मुताबिक छात्रों को निशाना बना रही पुलिस
जेएनयूएसयू के संयुक्त सचिव सौरभ शर्मा ने कहा कि हम तो शुरू से कह रहे हैं कि कैंपस में जो हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण है. अब तो रिपोर्ट भी बता रही है कि सभी वीडियो क्लिप सही हैं. वहीं जेएनयूएसयू इस रिपोर्ट के साथ अब तक की पूरी कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है. इसकी उपाध्यक्ष शेहला के मुताबिक केंद्र सरकार और पुलिस जेएनयू के मामले में छात्रों को निशाना बना रहे हैं. सरकार कैंपस में लगे नारों को जबरदस्ती देशद्रोह से जोड़ रही हैं. यह सही नहीं है.

शेहला रशीद बोलीं- सेडिशन से कैसे जोड़ सकते हैं?
रशीद ने कहा कि देखना होगा कि कौन वीडियो सही है. क्योंकि तीन वीडियो तो डॉक्टर्ड भी पाए गए हैं. उन्होंने कहा कि दरअसल ये सब बातें मुद्दे से भटकाने के लिए हैं. साध्वी का मामला आया तो माल्या का इशू उठा दिया गया. मतलब जो आरएसएस के साथ नहीं है, उसे टारगेट करो. रशीद ने कहा कि दूसरी बात नहीं लगे थे. आप उसे सेडिशन से कैसे जोड़ सकते हैं. पुलिस सही तरीके से इंवेस्टिगेशन कर ही नहीं रही है.

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होम मिनिस्ट्री से संज्ञान लेने की मांग
लेफ्ट विंग के छात्र इस पूरे विवाद के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही हैं. वहीं एबीवीपी ने इस फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद होम मिनिस्ट्री से मांग की हैं की वह संज्ञान लेकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करें. सौरभ शर्मा के कहा कि हम चाहते हैं कि सीबीआई और होम मिनिस्ट्री संज्ञान लें और दोषियों को सख्त सजा दी जाए, ताकि कैंपस में देश विरोधी नारेबाजी करने वालों को सबक मिले.

एनएसयूआई ने भी कहा दोषियों को सजा मिले
एनएसयूआई के छात्र नेता भी दोषियों पर एक्शन की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि सजा की आड़ में बेकसूर छात्रों को टारगेट न किया जाए. एनएसयूआई नेता सनी धीमान ने कहा कि कुछ सही क्लिप हैं और कुछ गलत. जो सही है उनमें जिन्होंने नारेबाजी की उसकी पहचान कर सजा जी जाए, लेकिन कन्हैया या को टारगेट न किया जाए.

हैदराबाद के लैब में तीन वीडियो डॉक्टर्ड
इससे पहले दिल्ली सरकार की ओर से हैदराबाद के ट्रुथ फॉरेंसिक लैब को भेजे गए सात वीडियो क्लिप्स में से तीन के साथ छेड़छाड़ की बात सामने आई थी. इसके बाद दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कुछ न्यूज चैनलों पर मुकदमा करने की बात कही थी.

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