गोधरा कांड पर बनी SIT के सदस्य वाईसी मोदी CBI डायरेक्टर की रेस में सबसे आगे

CBI new chief race वाईसी मोदी सुप्रीम कोर्ट के बनाए उस विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्य थे जिसने 2002 गोधरा कांड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की जांच की थी.

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वाईसी मोदी (फोटो-IANS) वाईसी मोदी (फोटो-IANS)

aajtak.in / मुनीष पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 18 जनवरी 2019,
  • अपडेटेड 7:46 AM IST

आलोक वर्मा को हटाए जाने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के नए डायरेक्टर की खोज तेज गई है. इस पद के लिए कई नाम सुर्खियों में हैं जिनमें किसी एक पर 24 जनवरी को ठप्पा लग सकता है. इस बाबत 24 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर सेलेक्शन कमेटी की बैठक है. इस कमेटी में प्रधानमंत्री मोदी, देश के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं.    

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सरकार के अति विश्वस्त सूत्रों ने 'इंडिया टुडे' को बताया कि सीबीआई निदेशक की दौड़ में 17 अधिकारियों के नाम शामिल हैं. ये सभी अधिकारी 1982 से 1985 तक के बैच के बताए जा रहे हैं. इन 17 अधिकारियों में 6 नाम ऐसे हैं जिन पर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने हामी भर दी है. 'इंडिया टुडे' को मिली जानकारी के मुताबिक 6 में 4 नामों को अगले निदेशक पद के लिए सेलेक्शन कमेटी को भेज दिया गया है.  

इन नामों में वाईसी मोदी का नाम सबसे आगे है. असम-मेघालय कैडर के 1984 बैच के अधिकारी वाईसी मोदी फिलहाल एनआईए के चीफ हैं. इन्हें 33 साल का तजुर्बा है जिसमें 10 साल उन्होंने सीबीआई को दिए हैं. अपने दो अहम कार्यकाल 2002-2010 और 2015-2017 में उन्होंने स्पेशल क्राइम और वित्तीय अपराध के कई केस सुलझाए हैं. सीबीआई में उनके लंबे कार्यकाल को देखते हुए निदेशक पद पर उनकी दावेदारी सबसे बड़ी मानी जा रही है.  

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वाईसी मोदी सुप्रीम कोर्ट के बनाए उस विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्य थे जिसने 2002 गोधरा कांड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की जांच की थी. जांच दल ने नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट दे दी थी. नरेंद्र मोदी तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे.  

इस पद की दावेदारी में अगला नाम सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के प्रमुख रजनीकांत मिश्रा का है. मिश्रा 1984 बैच के यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. रजनीकांत मिश्रा ने भी सीबीआई में सेवा दी है और अपने कार्यकाल में सत्यम केस और किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश किया है. पिछले साल अप्रैल में सीआईएसएफ के प्रमुख बनाए गए राजेश रंजन भी इस दौड़ में शामिल हैं. राजेश रंजन भी सीबीआई में रह चुके हैं और लखुभाई पाठक धोखाधड़ी और रुचिका गिरहोत्रा छेड़छाड़ केस की जांच कर चुके हैं.  

सीबीआई के निदेशक पद पर अगला नाम विवेक जौहरी का है जो रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के विशेष सचिव हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए (ऑनर्स) कर चुके जौहरी 1985 में इंडियन रेवेन्यू सर्विस (कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज) से जुड़ गए थे. अन्य नामों में मुंबई पुलिस कमिश्नर सुबोध जायसवाल, गृह मंत्रालय में विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) रीना मित्रा, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) प्रमुख सुदीप लखटकिया और इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस के चीफ एसएस देसवाल शामिल हैं.

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रीना मित्रा और वाईसी मोदी के पास सीबीआई और भ्रष्टाचार निरोधक शाखाओं में काम करने का अच्छा खासा अनुभव है. जायसवाल ने रॉ में सेवा दी है. वे मुंबई पुलिस कमिश्नर बनने से पहले कैबिनेट सचिवालय में बतौर अतिरिक्त सचिव सेवा दे चुके हैं.

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