इंसानों की तरह किया गया बंदर का अंतिम संस्कार, हरिद्वार में बहाई जाएंगी अस्थियां

राजस्थान के भीलवाड़ा में एक बंदर की मौत के बाद बजरंग दल के अध्यक्ष भीमराज वैष्णव ने हिंदू रीति रिवाज से उसका अंतिम संस्कार किया. इसके बाद अपना सिर भी मुंडवाया. उन्होंने बंदरों को अपना पूर्वज बताते हुए कहा कि वह अब 12 दिन बाद बंदर की अस्थियों को हरिद्वार जाकर गंगा नदी में विसर्जित भी करेंगे.

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सांकेतिक तस्वीर. सांकेतिक तस्वीर.

aajtak.in

  • भीलवाड़ा,
  • 19 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 5:35 PM IST
  • भीलवाड़ा में बंदर की मौत के बाद किया गया अंतिम संस्कार
  • 12 दिन बाद हरिद्वार जाकर बहाई जाएंगी बंदर की अस्थियां

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक बेहद अनोखा मामला देखने को मिला. यहां एक शख्स ने बंदर की मौत पर ना केवल उसका अंतिम संस्कार किया, बल्कि अपना सिर भी मुंडवा लिया. दरअसल, हिंदू रीति रिवाज के मुताबिक जब भी घर में किसी की मौत होती है तो घर के पुरुष अपना सिर मुंडवाते हैं.

जानकारी के मुताबिक, बजरंग दल के अध्यक्ष भीमराज वैष्णव ने बंदर की मौत पर पहले उसकी बैण्ड-बाजे के साथ शव यात्रा निकाली. फिर विधिविधान से पंडितों के मंत्रोचारण के साथ अन्तिम संस्कार किया. बाद में अपना सिर भी मुंडवाया और पूरे 12 दिन तक रस्म क्रिया का भी इंतजाम किया है. वह यहीं नही रुके. उन्होंने बंदर की अस्थियां हरिद्वार में पवित्र गंगा नदी में विसर्जन करने की बात भी कही है.

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दरअसल, भीलवाड़ा जिले के बागोर कस्बे में मंगलवार रात को एक बंदर की आकस्मिक मौत हो गई थी. लोगों ने बताया कि बंदर की मौत मंदिर परिसर के पास हुई थी. जब बंदर को शमशान घाट ले जाया जा रहा था, उस समय रास्ते में गुलाल भी उड़ाई गई.

बंदरों को बताया पूर्वज
बजरंग दल के अध्यक्ष भीमराज वैष्णव ने कहा, ''मैंने सिर मुंडावकर विधिविधान से बंदर का अंतिम संस्कार किया है. बंदर हमारे पूर्वज थे इसलिए मैंने उसका अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज से पूरी तरह किया. 12 दिन तक क्रिया कर्म किया जाएगा. फिर उसके बाद एक शोक सभा भी आयोजित की जाएगी. उसके बाद बंदर की अस्थियों को हरिद्वार में गंगा नदी में विसर्जित करेंगे.''

मध्य प्रदेश में भी देखा गया था ऐसा ही एक मामला
इससे पहले मध्य प्रदेश के राजगढ़ में भी ऐसा ही एक मामला देखने को मिला था. यहां एक बंदर की मौत के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया था. बाद में फिर धूमधाम से उसकी शव यात्रा निकाली. धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया. डालूपुरा गांव के बिरम सिंह चौहान ने बताया कि बंदर को हनुमान जी का स्वरूप माना जाता है, इसलिए ऐसा किया गया. बंदर के लिए अर्थी सजाई गई और लोगों ने नारियल रखकर बंदर को नमन किया गया. इसके बाद अंतिम यात्रा मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई.

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(इनपुट: प्रमोद तिवारी)

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