पंजाब के तरन तरन जिले में सरपंच हरबिंदर संधू की हत्या ने एक बार फिर राज्य में बढ़ती गैंगवार और संगठित अपराध नेटवर्क को उजागर कर दिया है. जांच में पुलिस को पता चला है कि हमलावरों ने इस वारदात में कथित तौर पर एके-सीरीज की असॉल्ट राइफल और 9 एमएम पिस्टल का इस्तेमाल किया, जिससे पुलिस की चिंताएं बढ़ गई हैं. वहीं, जनवरी में वाल्टोहा के सरपंच और लकी ओबेरॉय की हत्या के बाद ये तीसरा बड़ा मामला है.
पुलिस जांच के अनुसार, ये हमला पुरानी रंजिश और अदालती गवाही का नतीजा है, क्योंकि सरपंच एक रंगदारी मामले में सह-शिकायतकर्ता थे. इस गोलीबारी में जर्मन सिंह नामक व्यक्ति भी घायल हुआ है. लांडा हरीके गैंग ने सोशल मीडिया पर इस हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए इसे अपने साथी की मौत का बदला बताया है.
हाई-टेक हथियारों का इस्तेमाल
सूत्रों का कहना है कि सरपंच की हत्या में एके-सीरीज की असॉल्ट राइफल के इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. इस पैटर्न की तुलना साल 2022 में हुई पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या से की जा रही है, जहां इसी तरह के अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ था. गैंगस्टर लांडा हरीके ने एक वायरल पोस्ट में दावा किया कि ये तो सिर्फ एक 'ट्रेलर' था.
उसने चेतावनी दी है कि अब हथियार उठाना तो दूर, लोग उनका नाम लेने से भी डरेंगे. पुलिस ने लापरवाही बरतने के आरोप में डीएसपी पट्टी जगबीर सिंह और एसएचओ सरहाली गुरविंदर सिंह को निलंबित कर दिया है.
माझा क्षेत्र में गैंगवार
पंजाब का माझा क्षेत्र इस वक्त सत्ता नौशहरा, लांडा हरीके और गुरदेव गहशाल गैंग के बीच वर्चस्व की लड़ाई का क्षेत्र बना हुआ है. इस रंजिश की जड़ें साल 2024 के एक मामले से जुड़ी हैं, जब सुखविंदर सिंह उर्फ 'नोनी' पर एक कारोबारी से रंगदारी मांगने का आरोप लगा था.
सरपंच हरबिंदर संधू उसी मामले में गवाह थे. नोनी की बाद में हत्या कर दी गई थी, जिसका बदला लेने के लिए अब सरपंच को निशाना बनाया गया है.
इसके अलावा डॉली बल गैंग की बढ़ती सक्रियता ने क्षेत्र में गैंगवार के संकट को और गहरा कर दिया है.
कोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार
वहीं, राज्य में बढ़ते अपराध को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि पुलिस का 'ऑपरेशन प्रहार' असल में काम कम और 'प्रचार' (पब्लिसिटी) ज्यादा लग रहा है. गैंगस्टर राणा बलाचौरिया की हत्या और लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इंटेलिजेंस नेटवर्क की विफलता पर सवाल उठाए. मोहाली में एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी पर भी एसएसपी को अदालत में माफी मांगनी पड़ी.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल आंकड़ों से काम नहीं चलेगा, जमीन पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है.
पुलिस का एक्शन
पंजाब पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2022 से अब तक 324 एनकाउंटर हुए हैं, जिनमें 24 गैंगस्टर मारे गए और सैकड़ों घायल हुए हैं. अकेले नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 34 एनकाउंटर हुए. हालांकि, इन एनकाउंटरों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी सवाल उठाए हैं और 'राज्य प्रायोजित गैर-न्यायिक हत्याओं' के आरोपों पर रिपोर्ट मांगी है.
पुलिस का कहना है कि अधिकतर मुठभेड़ तब हुई जब आरोपियों ने नाकाबंदी के दौरान फायरिंग की या हथियार रिकवरी के दौरान पुलिस पर हमला करने की कोशिश की.
उधर, पंजाब में अगले 10 महीनों में चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में बढ़ती गैंगवार और हत्याएं आम आदमी पार्टी सरकार के लिए बड़ी सिरदर्द बन गई हैं. विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं कि जब सत्ताधारी दल के अपने नेता सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता का क्या होगा.
कमलजीत संधू