पश्चिम बंगाल में BJP की बड़ी जीत की खुशी अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि पार्टी ने अपना अगला निशाना तय कर लिया. वो निशाना है पंजाब. BJP मुख्यालय में जश्न के बीच जो भी देखा उसने सब कुछ बयान कर दिया. मंच से 'जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के नारे लगे और सिखों का एक समूह मुट्ठियां उठाकर जवाब दे रहा था. यह कोई आम जश्न नहीं था। यह BJP का अगला राजनीतिक खेल शुरू होने का संकेत था.
दिल्ली में BJP मुख्यालय में बंगाल जीत के जश्न करने के दौरान देखा कि भीड़ में सिखों का एक समूह मौजूद था जो BJP की जीत का जश्न मना रहा था. मंच से जो नारा लगाया गया वो BJP के आम नारों से बिल्कुल अलग था. 'जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' यह सिख समुदाय का पारंपरिक नारा है. इसका मतलब था कि BJP ने पंजाब पर अपनी नज़रें गड़ा दी हैं और यह बात वो खुलकर दिखा रही थी.
अमित शाह का अगला कदम क्या है?
पश्चिम बंगाल में 50 से ज्यादा रैलियां करने और 15 दिन की थकाने वाली चुनावी मुहिम के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का अगला पड़ाव पंजाब है. मई महीने से शाह पंजाब के नियमित दौरे करने वाले हैं. इनका मकसद साफ है. ड्रग्स के मुद्दे पर नकेल कसना, पार्टी संगठन को मजबूत करना और 2027 के चुनाव के लिए जमीन तैयार करना.
पंजाब BJP के लिए इतना अहम क्यों है?
पंजाब में अभी AAP यानी आम आदमी पार्टी की सरकार है. BJP अब इस राज्य को एक बड़े राजनीतिक मौके के रूप में देख रही है. इसके पीछे कई कारण हैं. पहला कारण यह है कि BJP का वोट शेयर पंजाब में 2019 में 9.63 प्रतिशत था जो 2024 में बढ़कर 18.56 प्रतिशत हो गया. यानी वोट लगभग दोगुने हो गए. सीटें भले न मिली हों लेकिन यह बढ़त पार्टी को अकेले लड़ने का हौसला दे रही है.
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दूसरा कारण यह है कि पंजाब में अभी कोई एक मजबूत विरोधी नहीं है. AAP सरकार पर कई सवाल उठ रहे हैं. कांग्रेस अपने अंदरूनी झगड़ों में फंसी है. और शिरोमणि अकाली दल जो कभी पंजाब की सबसे बड़ी ताकत था, वो अब कमज़ोर पड़ चुका है. BJP इस खाली जगह को भरना चाहती है.
ड्रग्स का मुद्दा BJP का हथियार
BJP ने 'नशा मुक्त पंजाब' को अपना बड़ा मुद्दा बनाया है. यह काम 2016 में शुरू हुआ था लेकिन अब इसे फिर से बड़े पैमाने पर उठाया जा रहा है. पंजाब में नशे की समस्या बहुत गहरी है और यह मुद्दा आम लोगों की भावनाओं से सीधे जुड़ा है. BJP इसे एक नैतिक और राजनीतिक हथियार दोनों के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है.
अकाली दल से रिश्ता तोड़ा, अकेले चलने की तैयारी
यह BJP के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव है. पहले BJP और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते थे. BJP हमेशा छोटे भाई की भूमिका में रहती थी. लेकिन अब BJP ने यह रिश्ता तोड़ लिया है. पार्टी अब पंजाब में खुद को मुख्य ताकत के रूप में पेश करना चाहती है. अकाली दल के कमजोर पड़ने के बाद जो वोट बैंक खाली हुआ है, BJP उसे अपने पाले में लाना चाहती है.
AAP के नेताओं को तोड़ने की रणनीति
BJP ने एक और बड़ा दांव खेला है. AAP के 7 राज्यसभा सांसद जो पहले AAP में थे, वो अब BJP में आ गए हैं. यह सिर्फ नेताओं की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है. इसके पीछे दो मकसद हैं. एक तो यह कि AAP के अंदर फूट पड़े और पार्टी कमजोर हो. दूसरा यह कि स्थानीय चेहरों के जरिए BJP की साख पंजाब में बढ़े.
नई जातियों और समुदायों तक पहुंच
BJP पंजाब में अपना सामाजिक आधार भी बदलने की कोशिश कर रही है. अकाली दल के कमजोर पड़ने से सिख वोटरों का एक हिस्सा खाली हो गया है. BJP उस हिस्से को अपने साथ जोड़ना चाहती है. साथ ही अनुसूचित जाति यानी दलित समुदाय तक भी पहुंच बढ़ाई जा रही है जो पहले कांग्रेस के करीब रहता था.
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क्या पंजाब आसान होगा?
बिल्कुल नहीं. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा है कि BJP के किसान आंदोलन वाले रवैये को पंजाब की जनता भूली नहीं है. किसान आंदोलन के दौरान BJP के खिलाफ जो नाराजगी बनी थी वो अभी भी बाकी है. यह BJP की राह में सबसे बड़ी रुकावट है.
ऐश्वर्या पालीवाल