पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है. ED और CBI की बढ़ती कार्रवाई, AAP सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप, राजनीतिक दलबदल और बम धमाकों ने राज्य की राजनीति को अहम मोड़ पर खड़ा कर दिया है. पिछले कुछ महीनों में केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता बढ़ने के बाद विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि गैर-BJP शासित राज्यों को निशाना बनाया जा रहा है.
अप्रैल और मई का महीना पंजाब के लिए महत्वपूर्ण रहा है. AAP के 7 राज्यसभा सांसद BJP में शामिल हुए. मुख्यमंत्री भगवंत मान के नशे होने को लेकर विवाद हुआ. इसके साथ ही बम धमाकों की घटनाओं ने भी माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया. इन सबके बीच ED और CBI की लगातार छापेमारी ने ये संकेत दिया है कि पंजाब में चुनावी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं. राजनीतिक गलियारों में इसे अघोषित चुनावी मौसम तक कहा जा रहा है.
सोमवार देर रात CBI ने मोहाली स्थित पंजाब विजिलेंस ब्यूरो मुख्यालय पर छापा मारा. ये मामला 20 लाख रुपए के रिश्वत मांगने से जुड़ा है. आरोप है कि विजिलेंस के कुछ वरिष्ठ अधिकारी इस नेटवर्क में शामिल थे. CBI ने इस कार्रवाई में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. जांच का दायरा DG विजिलेंस के रीडर OP राणा तक पहुंच गया है. इसी दौरान ED ने पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा पर भी निगरानी बढ़ा दी है. जांच में कई लोगों के नाम सामने आए हैं.
इनका AAP नेताओं से करीबी संबंध माना जाता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद अब पंजाब अगला बड़ा राजनीतिक रणक्षेत्र बनता दिख रहा है. यहां AAP, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और BJP के बीच कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है. CBI की कार्रवाई एक स्टेट टैक्स ऑफिसर की शिकायत के बाद शुरू हुई. उन्होंने आरोप लगाया कि DG विजिलेंस ऑफिस में 20 लाख रुपए की रिश्वत मांगी जा रही है.
शिकायत में विकास उर्फ विक्की गोयल और उनके बेटे राघव गोयल का नाम सामने आया. आरोप है कि दोनों बिचौलिये के तौर पर काम कर रहे थे. शिकायत के मुताबिक, DG विजिलेंस के रीडर OP राणा समेत कुछ अधिकारियों के लिए रिश्वत मांगी जा रही थी. जांच में सामने आया कि बाद में रकम 20 लाख से घटाकर 13 लाख रुपए कर दी गई थी. इसके साथ एक महंगे मोबाइल फोन की भी मांग की गई थी, जो OP राणा को दी जानी थी.
11 मई को चंडीगढ़ में CBI ने जाल बिछाकर कार्रवाई की थी. इस दौरान आरोपी अंकित वधवा को 13 लाख रुपए नकद और मोबाइल फोन लेते हुए पकड़ा गया. नकदी और फोन मौके से जब्त कर लिया गया. इस कार्रवाई के दौरान राघव गोयल, विक्की गोयल और OP राणा भागने की कोशिश करने लगे. बताया गया कि पास में मौजूद गनर से अलर्ट मिला था. अंबाला के पास पंजाब-हरियाणा सीमा तक पीछा करने के बाद गोयल बंधुओं को पकड़ा गया.
उनके साथ दोनों गनर भी गिरफ्तार किए गए, लेकिन OP राणा अब भी फरार है. इसके बाद मलोट और चंडीगढ़ में हुई तलाशी में 9 लाख रुपए नकद और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए. एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि निजी लोगों तक संवेदनशील विजिलेंस जानकारी कैसे पहुंच रही थी और AK-47 से लैस पंजाब पुलिस के गनर क्यों तैनात थे. इन घटनाओं के बाद पंजाब के प्रशासनिक और पुलिस हलकों में बेचैनी बढ़ गई है.
एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने कहा, "जब केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई तेज होती है, तो आमतौर पर चुनाव करीब माने जाते हैं. लेकिन इस बार अधिकारी ज्यादा चिंतित हैं, क्योंकि जांच अब वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचती दिख रही है." हालांकि, पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने कहा है कि CBI ने एक निजी व्यक्ति को पकड़ा है. इस मामले की जांच अभी जारी है. यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो पूरा सहयोग किया जाएगा.
CBI और ED की कार्रवाई के बाद विपक्ष को AAP सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया है. शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने विजिलेंस ब्यूरो को भ्रष्टाचार का अड्डा बताया. उन्होंने कहा कि पंजाब में भ्रष्टाचार की परतें अब खुलने लगी हैं. मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग भी की है. विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि इन छापों ने AAP सरकार के दौरान व्यवस्था में फैली गहरी सड़ांध उजागर की है.
वहीं पंजाब BJP अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने दावा किया कि CBI की कार्रवाई से सत्ताधारी खेमे में हड़कंप मच गया है. इन घटनाओं के बाद विपक्षी दलों ने एक बार फिर ED और CBI के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं. आंकड़ों के मुताबिक, ED ने 2015 से फरवरी 2025 के बीच सांसदों, विधायकों और राजनीतिक पदाधिकारियों से जुड़े 193 मामले दर्ज किए. लेकिन इनमें सिर्फ 2 मामलों में ही दोषसिद्धि हो सकी. विपक्ष इसे दबाव की राजनीति बता रहा है.
उनका आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल गैर-BJP सरकारों और विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है. हालांकि BJP इन आरोपों को खारिज करती रही है. AAP सरकार पर भी अपने विरोधियों के खिलाफ एजेंसियों के इस्तेमाल के आरोप लगते रहे हैं. AAP के 7 राज्यसभा सांसद जब BJP में शामिल हुए थे, तब पंजाब सरकार ने पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह समेत कई नेताओं की 'Z' और 'Z+' सुरक्षा वापस ले ली थी.
BJP ने इसे बदले की कार्रवाई बताया था, जबकि AAP ने कहा था कि यह सुरक्षा व्यवस्था की सामान्य समीक्षा का हिस्सा था. इसके अलावा बिक्रम मजीठिया और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर भी AAP सरकार सवालों के घेरे में रही है. विधानसभा चुनाव में अभी डेढ़ साल का वक्त बाकी है, लेकिन राज्य का राजनीतिक माहौल अभी से बेहद आक्रामक हो चुका है. फिलहाल, पंजाब की सियासत की पिक्चर अभी बाकी है.
कमलजीत संधू