दिल्ली के बाद अब पंजाब में क्यों उठ रही है महिला मुख्यमंत्री की मांग? क्या है इसके पीछे का गणित

दिल्ली की नई सीएम आतिशी ने अभी शपथ भी नहीं ली है कि आम आदमी पार्टी की सरकार वाले दूसरे राज्य पंजाब से भी महिला मुख्यमंत्री की मांग उठने लगी है. पंजाब में इस डिमांड के पीछे का गणित क्या है?

Advertisement
आतिशी और भगवंत मान (फाइल फोटो) आतिशी और भगवंत मान (फाइल फोटो)

बिकेश तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:40 AM IST

आम आदमी पार्टी ने एक दिन पहले ही केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में आतिशी को मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान किया है. आतिशी ने अभी मुख्यमंत्री पद की शपथ भी नहीं ली है कि अब पंजाब से भी इसी तरह की डिमांड आने लगी है. पंजाब में भी आम आदमी पार्टी की ही सरकार है और ये डिमांड उठी है विपक्षी कांग्रेस की ओर से. पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने दिल्ली की ही तर्ज पर पंजाब में भी महिला को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है.

Advertisement

उन्होंने कहा है कि दिल्ली सीएम की ही तरह पंजाब के मुख्यमंत्री भी फेल रहे हैं. अगर कोई महिला यहां मुख्यमंत्री बनती है तो यह पंजाब के लोगों के हित में होगा. सवाल उठ रहे हैं कि प्रताप सिंह बाजवा महिला सीएम की डिमांड क्यों कर रहे हैं? इसे चार पॉइंट में समझा जा सकता है.

1- AAP के लिए सियासी जाल

आम आदमी पार्टी की दो ही राज्यों में सरकार है. एक राज्य में पार्टी ने पहले ही आतिशी के रूप में महिला चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान कर दिया है. ऐसे में पार्टी अब पंजाब में भी महिला सीएम बनाएगी, ऐसा लगता नहीं है. बाजवा की डिमांड ने आम आदमी पार्टी को किस कदर फंसा दिया है, इसे इस तरह भी समझ सकते हैं कि अगर डिमांड पूरी कर दे तो क्रेडिट वॉर में कांग्रेस आगे निकल सकती है और ना करें तो महिला विरोधी का टैग लगने का खतरा. एक खतरा यह भी है कि पंजाब में सीएम बदलना एक तरह से आम आदमी पार्टी के लिए भगवंत मान को बतौर सीएम फेल बताने वाले बाजवा के बयान पर स्वीकारोक्ति की तरह होगा.

Advertisement

2- महिला वोट पर नजर

पंजाब चुनाव में आम आदमी पार्टी 92 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई तो उसके पीछे महिला मतदाताओं का बड़ा रोल बताया गया. आम आदमी पार्टी ने तब महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये देने, वृद्धा पेंशन की राशि बढ़ाने और नशामुक्त पंजाब बनाने का वादा किया था. 2022 के विधानसभा चुनाव में पुरुषों के 71.99 फीसदी के मुकाबले महिलाओं का वोटर टर्नआउट लगभग बराबर 71.90 फीसदी रहा था. 2022 के पंजाब चुनाव में कुल 2 करोड़ 12 लाख 75 हजार 67 मतदाता थे जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 1 लाख 74 हजार 240 थी.

यह भी पढ़ें: केजरीवाल का इस्तीफा, आतिशी ने पेश किया दावा... जानें- अब सरकार गठन में लगेगा कितना वक्त

3- बीजेपी को रोकने की कवायद

लोकसभा चुनाव में सूबे की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी केवल तीन सीटें ही जीत सकी. इन नतीजों के पीछे महिला मतदाताओं की मान सरकार से नाराजगी से जोड़कर भी देखा गया. राष्ट्रीय स्तर पर महिला मतदाताओं को बीजेपी का साइलेंट वोटर माना जाता है और पार्टी शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद पंजाब में भी आक्रामक राजनीति के जरिये अपनी जमीन बनाने में जुटी हुई है. रवनीत बिट्टू को लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया जाना भी इसी तरफ संकेत करता है. पार्टी की नजर महिला मतदाताओं पर है और बाजवा का ये बयान इस वोटर वर्ग के बीच बीजेपी को रोकने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: क्या स्वाति मालीवाल प्रकरण ने आसान कर दी मुख्यमंत्री के लिए आतिशी की राह?

4- चुनावी पिच सेट करने की रणनीति

पंजाब में हालिया लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस 13 में से सात सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. पार्टी की रणनीति अब लोकसभा चुनाव में मिले जीत के मोमेंटम को विधानसभा चुनाव तक लेकर जाने की है. पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं. चुनावों में अभी करीब तीन साल का समय है और कांग्रेस की रणनीति अभी से ही चुनावी पिच सेट करने की हो सकती है. जानकारों की मानें तो पिछले चुनाव से छह महीने पहले सीएम बदल दलित कार्ड चलने वाली कांग्रेस अगर अगले चुनाव में किसी महिला नेता सीएम फेस प्रोजेक्ट कर दे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement