स्मृति ईरानी बोलीं- पंजाब में फायदे के लिए किसान आंदोलन में राजनीति कर रहे केजरीवाल

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं स्पष्ट कर देना चाहती हूं कि इस कानून के लिए 2001 से बात चल रही थी. 2004 से जब यूपीए की सरकार रही, तब भी लगातार इसी तरह की रिफॉर्म की वकालत की गई थी.

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स्मृति ईरानी ने विपक्षी दलों पर राजनीति करने का लगाया आरोप (फाइल फोटो) स्मृति ईरानी ने विपक्षी दलों पर राजनीति करने का लगाया आरोप (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:00 PM IST
  • किसानों का बड़ा समूह नरेंद्र मोदीे के समर्थन में
  • किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर की जा रही राजनीति
  • कई सालों से किसान रिफॉर्म की चल रही थी बात

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रह किसानों का आंदोलन सोमवार को 19वें दिन भी जारी है. सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है. इसके बावजूद बीच का रास्ता नहीं निकल पाया है. ऐसे में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने किसान आंदोलन को लेकर कहा कि किसानों का एक बड़ा समूह नरेंद्र मोदी के समर्थन में है. क्या उनके समर्थ के कई मायने नहीं है.

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आजतक से खास बातचीत में स्मृति ईरानी ने कहा कि देश के कृषि मंत्री लगातार किसानों से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं. इसके बावजूद विपक्षी दलों ने किसानों के बीच में भय फैलाने का काम किया है. मैं आपको आश्वस्त करना चाहती हूं कि भले ही कोई अपनी राजनीति चमकाने के लिए किसानों का इस्तेमाल करे लेकिन देश के प्रधानमंत्री हमेशा किसानों के साथ ही मिलेंगे. 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं स्पष्ट कर देना चाहती हूं कि इस कानून के लिए 2001 से बात चल रही थी. 2004 से जब यूपीए की सरकार रही, तब भी लगातार इसी तरह की रिफॉर्म की वकालत की गई थी. बाद में नीति आयोग के अंतर्गत एक हाई पावर्ड कमेटी बनी, जिसमें कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी सदस्य बने थे. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी उस टीम का हिस्सा थे. उनकी टीम ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया कि भारतीय किसानों के हित में इस तरह के रिफॉर्म का आना कितना जरूरी है. 

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स्मृति ईरानी ने कहा कि विरोध करने वाले किसानों को तो आप देख रहे हैं लेकिन उन किसानों का क्या जो दिल्ली पहुंचकर मोदी सरकार द्वारा लाए गए कानून का समर्थन कर रहे हैं. उन लोगों का क्या जिन्होंने कई सालों तक इस रिफॉर्म के लिए लड़ाई लड़ी. किसानों की एमएसपी ऑपरेशन और मंडी चलती रही दोनों को सरकार ने अपना समर्थन दिया है. 

उन्होंने कहा कि सरकार क्या किसानों को बिचौलियों के बीच छोड़ दे. जनता से पूछिए क्या किसानों के साथ न्याय नहीं हुआ. कांग्रेस के शासनकाल में कृषि का बजट 12 हजार करोड़ रुपये हुआ करता था, लेकिन अब 2020-21 में यही बजट बढ़ाकर एक लाख तीस हजार से ज्यादा किया गया है. किसान के कंधे पर रखकर बंदूक चलाया जा रहा है. इन्हीं किसानों ने एक समय में इस तरह के रिफॉर्म की मांग की थी.

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केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि जहां तक अरविंद केजरीवाल सरकार की अनशन की बात है तो वह पंजाब में राजनीति करने के लिए चंद घंटे का अनशन कर रहे हैं. जबकि इससे पहले उन्होंने ही कानून को पढ़कर नोटिफाई किया था. केजरीवाल सरकार ने शपथ ली थी कि वो दिल्ली के लोगों का संरक्षण करेंगे लेकिन वो बार बार दिल्ली का चक्का जाम करने की कोशिश करते हैं.     

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किसानों ने शुरू की भूख हड़ताल 

किसान नेताओं ने केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ सोमवार को एक दिवसीय भूख हड़ताल शुरू की और कहा कि सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन किया जाएगा. किसान नेता बलदेव सिंह ने कहा, 'किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने सिंघु बॉर्डर पर भूख हड़ताल शुरू कर दी है.' 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी रविवार को कहा था कि वह सोमवार को एक दिवसीय भूख हड़ताल करेंगे. उन्होंने केंद्र सरकार से 'अहम त्यागने और कानूनों को रद्द करने' की अपील की थी. 

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