लगातार अंदरखाने से विरोध और विद्रोह झेल रही कांग्रेस ने पार्टी में आत्ममंथन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. खासतौर पर राजस्थान में सचिन पायलट की नाराजगी और गहलोत सरकार पर उनके द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बाद अब कांग्रेस ने तय किया है कि वह विधायकों से वन टू वन बात करेगी. असल में ये वन टू वन सचिन पायलट के विरोध के बाद किया जाना तय किया गया है, जिसमें विधायकों को फीडबैक फॉर्म दिए गए हैं और उनसे उनके क्षेत्र को लेकर रायशुमारी की जाएगी. इस फीडबैक फॉर्म में 13 सवाल हैं, लेकिन कांग्रेस ने फीडबैक फॉर्म में जो सबसे पहला सवाल रखा है, उसी पर सवाल खड़ा होने लगा है. असल में विधायकों को दिया गया फीडबैक फॉर्म आउट हो गया, जिसमें पहला सवाल क्षेत्र में जातिगत और धार्मिक समीकरण को लेकर पूछा गया है.
सचिन पायलट ने लगाए थे ये आरोप
असल में पायलट ने गहलोत सरकार पर, पूर्व की वसुंधरा सरकार में हुए घोटाले की जांच नहीं कराए जाने के आरोप लगाए थे. इसके साथ ही पायलट ने कहा था कि अगर प्रदेश में सरकार रिपीट करनी है तो वसुंधरा सरकार में हुए घोटाले की जांच करनी होगी. बिना इसके राजस्थान में फिर से कांग्रेस सरकार को नहीं लाया जा सकता है. इस तरह की बातें सामने आने के बाद कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर ही विधायकों का मन टटोलने और एक-एक कर व्यक्तिगत रूप से उनके मन की बात जानने का कार्यक्रम संभागवार रखा गया है. इसके जरिए ग्राउंड रियलिटी का पता लगाना है. लेकिन, कांग्रेस हाईकमान ने जो फीडबैक फॉर्म विधायकों को दिया है, उस पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
विधायकों का मन टटोलने के लिए दिए फीडबैक फॉर्म
कांग्रेस आलाकमान ने विधायकों के मन की बात जानने के लिए जो फीडबैक फॉर्म दिया है, उसमें 13 सवाल हैं. इन सवालों में क्षेत्र की स्थिति, विधायकों का खुद का क्षेत्र में प्रभाव, योजनाएं, सोशल मीडिया अकाउंट की स्थिति और उनकी किसी मामले में क्या विशेष राय है, इन सबको लेकर सवाल किए गए हैं. इसमें पहला ही सवाल जातिगत और धार्मिक समीकरण को लेकर किया गया है.
ये हैं 13 सवाल, जो फीडबैक फॉर्म में दर्ज हैं-
1- आपके क्षेत्र के जातिगत और धार्मिक समीकरण क्या है?
2-अभी अपने क्षेत्र में अपनी स्थिति कैसी मानते हैं. अगर 10 में से नंबर देने हो तो कितने देंगे.
3- आपके क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभाव किन पांच योजनाओं का है.
4- क्या नए जिलों के संबंध में आपका कोई सुझाव या राय है.
5 -इआरसीपी को मुद्दा बनाने के लिए आपने क्या किया. 13 जिलों के विधायकों से यह सवाल पूछा गया है.
6- आपकी सीट पर क्या कोई तीसरा फोर्स भी है उसकी स्थिति का क्या आकलन है.
7- अपने खिलाफ एंटी इनकंबेंसी रोकने के लिए क्या प्लान रखते हैं.
8- आपके सोशल मीडिया अकाउंट की क्या स्थिति है.
9- क्या आप अपना सोशल मीडिया सिम चलाते हैं या कोई और चलाता है तो उसका नाम और फोन नंबर उपलब्ध करवाएं.
10- महंगाई राहत कैंप को सफल बनाने के लिए आप की क्या तैयारी है.
11- सरकार के प्रति जनता में कितनी anti-incumbency की क्या स्थिति है. इसे कम करने के लिए कोई सुझाव.
12- चुनाव को लेकर जनता का मानस आपके मुताबिक क्या लगता है.
13- कोई विशेष राय जवाब देना चाहते हैं.
पहले ही प्रश्न पर घिर रही कांग्रेस
पहला प्रश्न ही क्षेत्र में जातिगत और धार्मिक समीकरण से जुड़ा हुआ है. इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि क्या चुनावी प्रदेश में राहुल गांधी की पार्टी मोहब्बत की दुकान अब धर्म और जाति देख कर खोलेगी? बीजेपी ने कांग्रेस को जाति और धर्म के सवालों पर आड़े हाथ लिया है. बीजेपी ने फीडबैक फॉर्म के जरिए राहुल गांधी समेत कांग्रेस पर तंज कसा है. बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने ट्वीट किया कि 'आज राजस्थान में कांग्रेस ने अपने विधायकों से फीडबैक लेने के लिए वन टू वन संवाद में 13 सवालों का एक फॉर्म बांटा. पहला प्रश्न ही क्षेत्र में जातिगत और धार्मिक समीकरण से जुड़ा था! क्या चुनावी प्रदेश में राहुल गांधी की पार्टी मोहब्बत की दुकान अब धर्म और जाति देख कर खोलेगी?'
20 अप्रैल तक चलेगी फीडबैक बैठक
बता दें कि, राजस्थान कांग्रेस में खलबली के बीच प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा मोर्चा संभाल चुके हैं.सोमवार को जयपुर स्थित कांग्रेस के वॉर रूम में उन्होंने पार्टी के विधायकों से चर्चा शुरू कर दी है. उनके साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने भी मंथन शुरू कर दिया है. आगामी 20 अप्रैल तक संभागवार विधायकों का मूड जाना जाएगा और चुनावी रणनीति को लेकर दिशा-निर्देश दिए जाएंगे.
पहले ही दिन दिखी गर्मा-गर्मी
इधर, तीन दिवसीय फीडबैक कार्यक्रम के पहले ही दिन गर्मा-गर्मी भी देखने को मिली. हुआ यूं कि पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा की एक टिप्पणी पर पायलट समर्थक विधायक भड़क गए. उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि इस तरह तो सरकार आने से रही. पायलट समर्थक विधायक हरीश मीना जब फीडबैक देने गए तो डोटासरा ने रंधावा से उनके बारे में परिचय देते हुए बताया कि ये पहले डीजीपी रहे हैं, बीजेपी से एमपी भी थे और यह मानेसर जाने वालों में भी थे.
हरीश मीना और राकेश पारीक हुए नाराज
मानेसर का जिक्र करते ही हरीश मीना नाराज हो गए और कहा कि इस तरह बार-बार यह बोलेंगे तो जीतना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा. हमें प्रियंका गांधी और अहमद पटेल ने बुलाकर बात की थी. ये उनसे बड़े हो गए क्या? इस पर प्रभारी रंधावा ने मीना को शांत किया और फिर बाद में बात की. बता दें कि सचिन पायलट ने जब जुलाई 2020 मे बगावती सुर लगाए थे तब वह मानेसर आ गए थे. उनके साथ 18 विधायक भी थे. इसी बात के जिक्र से हरीश मीना नाराज हुए थे.
पायलट समर्थक बोले- सचिन को साथ लिए बिना नहीं बनेगी सरकार
वहीं, राकेश पारीक बोले- पायलट को साथ रखेंगे तो ही सरकार बनेगी. मसूदा विधायक राकेश पारीक ने फीडबैक बैठक के दौरान कहा कि चुनावी साल में बार-बार मानेसर का जिक्र करके आप क्या संदेश देना चाहते हैं? जब राहुल गांधी ने सचिन पायलट को असेट बता दिया और अशोक गहलोत को भी असेट बता दिया तो अब ये सवाल उठाना ही गलत है. चुनावी साल में इस तरह की बातें नहीं की जानी चाहिए. इस तरह की बातें करके हम पार्टी को मजबूत नहीं कर रहे हैं. पायलट को भी साथ लेकर चलना होगा अगर सचिन को साथ नहीं लिया तो सरकार नहीं बनेगी. सूत्रों के अनुसार जब एमएलए राजेंद्र पारीक और हरीश मीना जैसे ही मीटिंग में पहुंचे तब डोटासरा ने कहा की यह मानेसर वाले विधायक है.
जयकिशन शर्मा