पश्चिम बंगाल: दुर्गा पंडाल में नो एंट्री के कलकत्ता HC के फैसले पर रिव्यू पीटिशन दायर

दुर्गा पंडालों को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिला की गई है. दरअसल, हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने कल अपने फैसले में पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के सभी पंडाल को नो एंट्री जोन घोषित किया था.

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कोरोना के मद्देनजर दुर्गा पंडालों में खास तैयारी की गई है (फोटो-PTI) कोरोना के मद्देनजर दुर्गा पंडालों में खास तैयारी की गई है (फोटो-PTI)

मनोज्ञा लोइवाल

  • कोलकाता,
  • 20 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 12:05 PM IST
  • कल कलकत्ता HC ने सुनाया था फैसला
  • दुर्गा पंडाल में श्रद्धालुओं की नो एंट्री
  • HC के फैसले पर रिव्यू पीटिशन दायर

दुर्गा पंडालों को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिला की गई है. दरअसल, हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने कल अपने फैसले में पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के सभी पंडाल को नो एंट्री जोन घोषित किया था. यानी श्रद्धालुओं को पंडाल में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी. इस फैसले पर दुर्गा पुजा फोरम ने रिव्यू पीटिशन दायर किया है, जिस पर कल सुनवाई होगी.

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दुर्गा पंडालों पर अपना फैसला सुनाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने कल कहा था कि कि पंडाल के अंदर केवल आयोजकों को ही जाने की इजाजत होगी. जिन लोगों को अंदर जाने की इजाजत होगी उनके नाम पंडाल के बाहर लिखे होंगे. छोटे पंडालों के लिए प्रवेश द्वार से पांच मीटर की दूरी पर बैरिकेड लगाने होंगे जबकि बड़े पंडालों के लिए यह दूरी 10 मीटर होनी चाहिए.

जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की बेंच ने कहा था कि बैरिकेडों पर प्रवेश निषेध के बोर्ड लगे होने चाहिए. आयोजन समितियों से जुड़े सिर्फ 15 से 25 लोगों को ही पंडालों में प्रवेश करने की अनुमति होगी. गौरतलब है कि कोरोना के कारण इस बार वर्चुअल दर्शन का इंतजाम किया गया है.

वहीं, दुर्गा पूजा संघ का कहना था कि यह महोत्सव समावेशिता की भावना से ओतप्रोत है और आगंतुकों को पंडालों में आने से नहीं रोका जा सकता. उन्होंने भीड़ को संभालने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये सभी जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया है. वहीं, कुछ आयोजनकर्ताओं ने कहा कि लोग उनके यू-ट्यूब चैनलों के जरिये माता दुर्गा की मूर्ति की झलक पा सकते हैं.

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