तमिलनाडु के कोयंबटूर के सुलूर इलाके में 10 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. इस घटना के बाद लगातार दो वीडियो सामने आने से विवाद और गहरा गया है, जिनमें कथित तौर पर मंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मुस्कुराते नजर आए, जिससे सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश फैल गया है.
पहला विवाद राज्य की उद्योग मंत्री एस कीर्तन से जुड़ा है, जिन पर पत्रकारों के सवाल के दौरान मामले पर प्रतिक्रिया देते समय मुस्कुराने का आरोप लगा. इस पर बीजेपी ने उन्हें घेरते हुए कहा कि एक गंभीर आपराधिक मामले पर इस तरह का व्यवहार असंवेदनशील है. हालांकि मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी मुस्कान सवाल खत्म होने के बाद स्वाभाविक थी और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है.
पुलिस अधिकारी हंसते हुए दिखे
दूसरी ओर, एक और वीडियो में कोयंबटूर जोन की आईजी आर. वी. रम्या भारती, डीआईजी पी. समिनाथन और एसपी पवन कुमार रेड्डी को प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले मुस्कुराते और बातचीत करते हुए देखा गया. इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने पुलिस अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई और इसे पीड़ित परिवार के प्रति असंवेदनशील बताया.
इस पूरे विवाद के बीच बीजेपी ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर हमला बोला है. पार्टी नेता विनोज पी सेल्वम ने कहा कि इतनी गंभीर घटना पर सरकार और प्रशासन का रवैया बेहद चिंताजनक है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
क्या बोले मंत्री?
वहीं मंत्री कीर्तन ने अपने बचाव में कहा कि सरकार ने मामले में तुरंत कार्रवाई की है. उनके अनुसार मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर पांच विशेष टीमें गठित की गईं और 250 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया.
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, बच्ची 21 मई को सुलूर थाना क्षेत्र में अपने घर के बाहर खेलते समय लापता हो गई थी. शिकायत के बाद जांच के लिए पांच विशेष टीमें बनाई गईं और तकनीकी सर्विलांस के जरिए आरोपी की पहचान की गई. मुख्य आरोपी कार्थी को एक अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे आरोपी को साजिश के आरोप में पकड़ा गया.
मुख्यमंत्री ने इस घटना को बेहद दर्दनाक और अमानवीय बताते हुए कहा कि दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी. विपक्षी दलों ने भी इस घटना की निंदा की है और कड़ी कार्रवाई की मांग की है. यह मामला अब राजनीतिक विवाद और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों का केंद्र बन गया है.
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