केरलम में शपथ सतीशन की, सरकार 'साढ़े तीन सीएम' चलाएंगे?

एक मुख्यमंत्री के तौर पर सतीशन को कई बार अपनी इच्छाओं को मारना होगा, कई बार गठबंधन की मजबूरी में 'खून के घूंट' पीने होंगे. केरल की जनता ने एलडीएफ के कुशासन से तंग आकर यूडीएफ को एक बड़ा और ऐतिहासिक मौका दिया है. जनता को आपसी गुटबाजी से कोई लेना-देना नहीं है, उसे डिलिवरेबल्स चाहिए.

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वी डी सतीशन की कैबिनेट लिस्ट के बहाने केरल की राजनीति में  हुआ'पावर बैलेंसिंग' वाला गजब खेल (File photo) वी डी सतीशन की कैबिनेट लिस्ट के बहाने केरल की राजनीति में हुआ'पावर बैलेंसिंग' वाला गजब खेल (File photo)

धीरेंद्र राय

  • नई दिल्ली,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:13 AM IST

केरलम में UDF ने 140 में से 102 सीटें जीतकर शानदार कमबैक किया है और लेफ्ट (LDF) के दस साल के राज को उखाड़ फेंका है. सोमवार को होने जा रहा शपथ ग्रहण समारोह वैसे तो देखने में एक साधारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया लग सकता है, लेकिन केरलम की सियासत की गहरी समझ रखने वाले जानते हैं कि यह सिर्फ मंत्रियों का शपथ ग्रहण नहीं है. असल में, यह UDF के भीतर 'सत्त्ता के बंटवारे' की एक ऐसी लिखित-अलिखित शपथ है, जो आने वाले पांच सालों तक केरलम कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति की दिशा तय करेगी.

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कहने को तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वीडी सतीशन बैठने जा रहे हैं, लेकिन तिरुवनंतपुरम के गलियारों में चर्चा इस बात की है कि यह सरकार अकेले सतीशन की नहीं, बल्कि 'साढ़े तीन मुख्यमंत्रियों' की होने वाली है. वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल, और रमेश चेन्निथला- ये तीन नाम तो कांग्रेस के भीतर ही बराबरी के पावर सेंटर बनकर उभरे हैं, और बची हुई 'आधा सीएम' की ताकत मुस्लिम लीग (IUML) के पास है, जो खुद में किसी किंगमेकर से कम नहीं है.

आइए समझते हैं कि नई कैबिनेट लिस्ट के बहाने केरलम की राजनीति में क्या गजब का 'पावर बैलेंसिंग' वाला खेल हुआ है और कैसे सतीशन ने शपथ लेने से पहले ही सारे गुटों को साधने की एक बड़ी चुनौती को पार किया है.

शपथ ग्रहण से ठीक पहले वीडी सतीशन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी ही पार्टी के भीतर मचे घमासान को शांत करना था. कांग्रेस को 63 सीटें मिली हैं, और इतने बड़े मैंडेट के बाद महत्वाकांक्षाओं का आसमान छूना लाजिमी था. मुख्यमंत्री पद की रेस में तीन बड़े चेहरे थे- सतीशन खुद, दिल्ली की राजनीति के दिग्गज केसी वेणुगोपाल और सीनियर लीडर रमेश चेन्निथला. हाईकमान ने सतीशन के नाम पर मुहर तो लगा दी, लेकिन असली परीक्षा कैबिनेट फॉर्मेशन के दौरान थी.

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सतीशन ने यहां गजब की राजनीतिक सूझबूझ दिखाई. उन्होंने कैबिनेट लिस्ट फाइनल करते समय किसी भी गुट को यह अहसास नहीं होने दिया कि उन्हें दरकिनार किया गया है. पार्टी के 63 विधायकों में से मंत्रियों को चुनना और उसमें भी 'क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन' बनाए रखना लोहे के चने चबाने जैसा था. खुद सतीशन ने मीडिया के सामने कबूल किया कि कई योग्य और हकदार विधायकों को वे जगह नहीं दे पाए, जिसका उन्हें मलाल है. लेकिन सच तो यह है कि उन्होंने 'ग्रुप लॉयल्टी' को इतनी बारीकी से एड्रेस किया है कि फिलहाल असंतोष की आग को सुलगने से पहले ही बुझा दिया गया है.

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वेणुगोपाल: बिना ताज के 'सुपर सीएम'

केसी वेणुगोपाल को भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी न मिली हो, लेकिन जो नई कैबिनेट लिस्ट सामने आई है, उसे देखकर कोई भी कह देगा कि सरकार में सबसे ज्यादा सिक्का उन्हीं का चलने वाला है. वेणुगोपाल केरलम कांग्रेस के इस समय सबसे बड़े 'वीटो' साबित हुए हैं.

कांग्रेस के 63 विधायकों में से करीब 45 विधायक वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते थे. भले ही कांग्रेस हाईकमान को केरलम में सतीशन के पक्ष में हुई गोलबंदी के आगे झुकना पड़ा और  वेणुगोपाल को पीछे हटने के ल‍िए कहना पड़ा हो. लेक‍िन, इसका यह मतलब नहीं हुआ क‍ि केरलम की राजनी‍त‍ि से केसी का एग्‍ज‍िट हो गया. वेणुगोपाल ने कैबिनेट में अपने समर्थकों की ऐसी फौज खड़ी कर दी है कि उनके बिना पत्ता भी नहीं हिलेगा. कांग्रेस के कोटे से जो भी मंत्री बनाए जा रहे हैं, उनमें से ज्यादातर वेणुगोपाल कैंप के वफादार हैं. कांग्रेस के पास आने वाले लगभग सभी मलाईदार और अहम पोर्टफोलियो वेणुगोपाल के करीबियों को मिलने जा रहे हैं. ऐसे में वेणुगोपाल केरलम की सरकार में एक 'सुपर सीएम' की भूमिका में होंगे, जिनकी मर्जी के बिना सचिवालय में कोई बड़ी फाइल आगे नहीं बढ़ेगी.

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रमेश चेन्निथला: गृह मंत्रालय के 'असली मालिक'

इस 'साढ़े तीन सीएम' के फॉर्मूले में दूसरा सबसे बड़ा पावर सेंटर हैं रमेश चेन्निथला. चेन्निथला पहले भी गृह मंत्री रह चुके हैं और विपक्ष के नेता के रूप में उनका एक अलग रूतबा रहा है. इस बार सतीशन ने खुद को आर्थिक रूप से तंगहाली से जूझ रहे केरलम के वित्त मंत्रालय तक सीमित रखा है. यह एक बड़ा जुआ है क्योंकि खजाना खाली है और सतीशन को परफॉर्मेंस दिखाने के लिए काफी पापड़ बेलने होंगे.

दूसरी तरफ, सरकार का सबसे रसूखदार और ताकतवर विभाग यानी गृह और इंटेलिजेंस सीधे रमेश चेन्निथला की जेब में चला गया है. कानून-व्यवस्था की चाबी और पूरी राज्य की पुलिसिंग पर कंट्रोल चेन्निथला का होगा. जब आपके पास पुलिस और इंटेलिजेंस हो, तो आप सरकार के भीतर अपने आप एक समानांतर मुख्यमंत्री बन जाते हैं. सतीशन कैबिनेट में बैठकर फैसले जरूर लेंगे, लेकिन राज्य की ब्यूरोक्रेसी और एडमिनिस्ट्रेशन पर असली पकड़ चेन्निथला की होने वाली है.

मुस्लिम लीग (IUML): सरकार का 'आधा हिस्सा' और किंगमेकर की ताकत

अब बात करते हैं उस 'आधे सीएम' की, जिसके बिना यूडीएफ की सरकार की कल्पना भी नहीं की जा सकती-यानी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML). इस चुनाव में मुस्लिम लीग ने 22 सीटें जीतकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है. लीग जानती है कि कांग्रेस अगर 63 सीटों पर है, तो बिना उसके 22 विधायकों के सरकार चलाना नामुमकिन है.

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मुस्लिम लीग ने कैबिनेट फॉर्मेशन में अपना पूरा हक वसूल लिया है. उनके पांच मंत्री सोमवार को शपथ लेने जा रहे हैं. लीग के प्रदेश अध्यक्ष सैय्यद सादिक अली शिहाब थंगल ने तो साफ कर दिया कि पार्टी उन्हीं विभागों को अपने पास रखेगी जो उसने 2011 से 2016 की यूडीएफ सरकार के दौरान संभाले थे. इसका मतलब है कि उद्योग, शिक्षा, लोक निर्माण विभाग, आईटी  और स्थानीय स्वशासन जैसे सबसे भारी-भरकम विभाग मुस्लिम लीग के पास जा रहे हैं. इतना ही नहीं, मुस्लिम लीग ने ढाई साल बाद अपने एक और विधायक पराक्कल अब्दुल्ला को कैबिनेट में शामिल करने का एडवांस कमिटमेंट भी ले लिया है, जिसके लिए लीग का ही एक मंत्री बाद में इस्तीफा देगा. केएम शाजी जैसे आक्रामक नेताओं की मौजूदगी यह साफ करती है कि मुस्लिम लीग सरकार में जूनियर पार्टनर की तरह नहीं, बल्कि एक बराबर के हिस्सेदार की तरह अपनी शर्तें डिक्टेट करेगी.

सतीशन के लिए कांटों का ताज: चलना होगा तलवार की धार पर

इस पूरी राजनीतिक पिक्चर को देखें तो साफ समझ आता है कि वीडी सतीशन मुख्यमंत्री तो बन गए हैं, लेकिन उनका यह कार्यकाल किसी कांटों के ताज से कम नहीं होने वाला है. सतीशन को एक ऐसे मंत्रिमंडल को लीड करना है, जहां उनके दोनों तरफ बैठे सहयोगी (वेणुगोपाल के मंत्री और खुद चेन्निथला) और सामने बैठी मुस्लिम लीग, उनसे राजनीतिक वजन में कहीं से भी कम नहीं हैं.

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सतीशन के पास चुनौती सिर्फ सरकार चलाने की नहीं है, बल्कि इन सभी भारी-भरकम पावर सेंटर्स के बीच तालमेल बिठाने की है. जब गृह मंत्री चेन्निथला अपनी चलाएंगे, जब वेणुगोपाल के समर्थक मंत्री हर फैसले से पहले दिल्ली फोन घुमाएंगे, और जब मुस्लिम लीग अपने विभागों में पूरी स्वायत्तता की मांग करेगी, तब सतीशन को असली 'स्टेट्समैनशिप' दिखानी होगी.

एक दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण शुरुआत

सोमवार का शपथ ग्रहण केरलम की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है. वीडी सतीशन की अगुवाई में यह 21 सदस्यीय कैबिनेट (जिसमें 14 पहली बार मंत्री बन रहे चेहरे हैं, जिनमें खुद सतीशन भी शामिल हैं) शपथ तो ले लेगी, लेकिन इस सरकार की उम्र और इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह 'साढ़े तीन सीएम' का कॉकटेल कितनी सहजता से काम करता है.

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क्या सतीशन इन सभी ताकतवर क्षत्रपों को एक धागे में पिरोकर रख पाएंगे? क्या वेणुगोपाल कैंप और चेन्निथला का गृह विभाग मुख्यमंत्री को खुलकर काम करने की आजादी देगा? और क्या मुस्लिम लीग अपने रसूख के साथ सरकार को स्थिरता दे पाएगी? ये वो सवाल हैं जिनके जवाब अगले कुछ महीनों में केरलम के सचिवालय की फाइलों से निकलकर बाहर आएंगे. फिलहाल के लिए, सतीशन ने गुटों को साधकर अपनी पहली परीक्षा पास कर ली है, लेकिन असली गेम तो शपथ के बाद विभागों के आधिकारिक बंटवारे और कैबिनेट की पहली बैठक से शुरू होगा.

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