ट्विशा सुसाइड केस में सोशल मीडिया पर उसकी साज (पूर्व जज) गिरिबाला शर्मा के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं. इनमें उनकी बहू के प्रति चिढ़ साफ नजर आ रही है. कुछ वीडियोज में वो कहती नजर आ रही हैं कि बहू को सिजोफ्रेनिया था यानी ऐसा गंभीर मानसिक बीमारी थी. बता दें कि इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति में सुसाइडल टेंडेंसी आम होती है.ज्यूडिशरी के उनके ज्ञान और पद को देखते हुए अब उनकी हर कही गई बात को लोग अलग-अलग नजरिये से देख रहे हैं.
इसी कड़ी में एम्स (AIIMS) के मनोचिकित्सक डॉ. शौर्य गर्ग ने एक वीडियो जारी कर बेहद तीखे सवाल उठाए हैं. वीडियो में उन्होंने साफ कहा है कि हमारे देश में शादियों के टूटने या हादसों के बाद बहुओं को बदनाम करने के लिए मानसिक बीमारी को एक 'हथियार' (शील्ड) की तरह इस्तेमाल करने का एक खतरनाक फैशन चल पड़ा है.
'बहू को मानसिक बीमार साबित कर दो... ताकि कोर्ट में फायदा मिले'
डॉ. शौर्य गर्ग ने अपनी रोजमर्रा की ओपीडी (OPD) के कड़वे अनुभवों का हवाला देते हुए इस सामाजिक त्रासदी का पर्दाफाश किया है. उन्होंने कहा कि लोगों को अंदाजा भी नहीं है कि हमारे पास रोज ऐसे कितने पैरेंट्स (ससुराल वाले) अपनी बहुओं को लेकर आते हैं, सिर्फ इसलिए ताकि उन्हें मानसिक रूप से बीमार होने का एक 'डायग्नोसिस' (प्रमाण-पत्र) मिल सके. वे डॉक्टरों से आकर कहते हैं कि 'डॉक्टर साहब, बस कोई भी एक लक्षण के आधार पर ऐसा डायग्नोसिस बना दो, जिससे हम कोर्ट में यह साबित कर पाएं कि यह लड़की मानसिक तौर पर बीमार थी.' यह बेहद घिनौनी प्रक्रिया है.
डॉक्टर के मुताबिक, किसी भी शादी के असफल होने पर या रिश्तों में दरार आने पर महिला को दोषी ठहराने का सबसे आसान तरीका यही ढूंढ लिया गया है कि बोल दो,'यह तो पहले से ही पागल या बीमार थी.'
'सिजोफ्रेनिया' 'एंटी-सिजोफ्रेनिक' जैसी कोई दवा नहीं होती!
ट्विशा केस की मीडिया कवरेज और सास (जो खुद एक रिटायर्ड जज हैं) के बयानों में जिस तरह 'सिजोफ्रेनिया'और भारी दवाइयों का जिक्र किया गया, उस पर डॉ. शौर्य ने कड़ा तकनीकी और वैज्ञानिक ऐतराज जताया है.
डॉ शौर्य का कहना है कि सिजोफ्रेनिया (एक गंभीर मानसिक विकार जिसमें व्यक्ति का हकीकत से संपर्क टूट जाता है और उसे भ्रम या अजीब आवाजें सुनाई देती हैं) कोई ऐसा शब्द नहीं है जिसे किसी के स्वभाव को बताने के लिए विशेषण (Adjective) की तरह इस्तेमाल कर लिया जाए. इसके लिए मरीज का पूरा और गहन मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन (Evaluation) करना पड़ता है.
दवाइयों का सच (दवा एक, काम अनेक): डॉ. शौर्य ने एस्पिरिन (Aspirin) का उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे एक ही दवा अलग-अलग डोज में खून पतला करने, बुखार कम करने या सूजन घटाने का काम करती है; ठीक वैसे ही जिन्हें आम भाषा में 'एंटी-साइकोटिक' दवाएं कहा जाता है, वे भी अलग-अलग मात्रा में मूड ठीक करने या तनाव कम करने के लिए दी जाती हैं.
इस पर डॉक्टर ने साफ कहा कि 'एंटी-सिजोफ्रेनिया मेडिकेशन' जैसा कोई शब्द मेडिकल साइंस में होता ही नहीं है. जो लोग ऐसे भारी-भरकम शब्दों का इस्तेमाल रील्स या बयानों में कर रहे हैं, उन्हें न तो बीमारी का पता है और न ही दवाइयों की प्रणाली का. वे सिर्फ मानसिक बीमारी के सामाजिक कलंक (स्टिग्मा) को एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.
महिलाओं को बदनाम करने के लिए ऐसा न करें
एम्स के डॉक्टर ने इस केस के बहाने समाज और कानूनी लड़ाई लड़ने वालों को मैसेज दिया है. उन्होंने कहा कि सिजोफ्रेनिया कोई गाली या एडजेक्टिव नहीं, एक गंभीर बीमारी है. टूटती हुई शादियों में महिलाओं को बदनाम करने या उन्हें क्रेडिटलेस (Discredit) करने के लिए मेंटल इलनेस को हथियार मत बनाओ. आगे कहा कि किसी भी बीमारी का डायग्नोसिस परिवार के आरोपों या अदालती सहूलियत के हिसाब से तय नहीं होता, इसके लिए उचित मनोरोग मूल्यांकन की जरूरत होती है. इसलिए इस सामाजिक कलंक (स्टिग्मा) को अपनी अदालती या सामाजिक रणनीति (स्ट्रेटजी) की तरह इस्तेमाल करना बंद कीजिए.
क्या होगा इस खुलासे का परिणाम?
बता दें कि ट्विशा केस की अब तक की जो कवरेज और जांच की दिशा है, उसमें पुलिस की टीमें मेडिकल हिस्ट्री खंगाल रही हैं. लेकिन एम्स के डॉक्टर के इस वीडियो ने यह साफ कर दिया है कि मेडिकल साइंस किसी भी मरीज को महज 'ससुराल पक्ष की गवाही या दावों' के आधार पर सिज़ोफ्रेनिक घोषित नहीं कर सकता.
अदालतों को भी यह समझना होगा कि कानूनी न्याय की प्रक्रिया में किसी मृतका के मानसिक स्वास्थ्य को मोहरा बनाना बंद होना चाहिए. अगर कोई वाकई मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो उसे सामाजिक प्रताड़ना के बजाय सही समय पर मेडिकल सपोर्ट मिलना ही इस समस्या का एकमात्र परिणाम हो सकता है.
कौन थीं ट्विशा?
ट्विशा शर्मा एक बेहद पढ़ी-लिखी एमबीए (MBA) ग्रेजुएट, मशहूर मॉडल और पूर्व 'मिस पुणे' थीं. उन्होंने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई और साल 2021 की लोकप्रिय तेलुगु फिल्म 'मुग्गुरु मोनागाल्लू' में मुख्य भूमिका निभाकर अभिनय की दुनिया में कदम रखा था. वे अपनी बेबाक आवाज और स्वतंत्र विचारों के लिए जानी जाती थीं.
लव मैरिज और रिश्तों में दरार:
ट्विशा ने एक डेटिंग ऐप के जरिए समर्थ सिंह नाम के युवक से मुलाकात की थी. दोनों के बीच प्यार हुआ और फिर उन्होंने शादी कर ली. लेकिन आधुनिक और महानगरीय लाइफस्टाइल के बीच शादी के कुछ ही वक्त बाद दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई. रिश्तों को बचाने के लिए दोनों एक मनोचिकित्सक (साइकियाट्रिस्ट) के पास कपल काउंसलिंग की प्रक्रिया से भी गुजर रहे थे.
रहस्यमयी मौत और मायके के आरोप:
मई 2026 के मध्य में ट्विशा ने अपने फ्लैट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. मौत की खबर आते ही हड़कंप मच गया. ट्विशा के मायके वालों (माता-पिता और भाई) ने पति समर्थ और ससुराल पक्ष पर मानसिक प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और आत्महत्या के लिए उकसाने के बेहद गंभीर और दर्दनाक आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. ससुराल पक्ष ने ट्विशा के पति के ड्रग एडिक्ट होने का दावा किया.
ससुराल पक्ष का पलटवार:
यह केस तब पूरी तरह से नेशनल हेडलाइन बन गया जब ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह (जो खुद एक रिटायर्ड जज हैं) सामने आईं. उन्होंने मायके पक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि ट्विशा बेहद गंभीर मानसिक बीमारी 'सिजोफ्रेनिया' और नशे की लत के कारण साइकोसिस से जूझ रही थीं, जिसकी भारी दवाइयां चल रही थीं. उन्होंने ट्विशा को ट्रबल्ड पर्सनैलिटी कहा. फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां ट्विशा की मेडिकल हिस्ट्री और दोनों पक्षों के दावों की जांच कर रही हैं. वहीं ट्विशा का पति समर्थ पुलिस की पकड़ से दूर है.
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