तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री विजय की सरकार को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. 13 मई को विधानसभा में हुए विश्वास प्रस्ताव के दौरान विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त और लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है. याचिका में पूरे मामले की CBI जांच कराने और जांच पूरी होने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की गई है.
यह याचिका मदुरई निवासी के.के. रमेश ने दाखिल की है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव के बाद सरकार गठन के दौरान TVK पार्टी ने बहुमत जुटाने के लिए हॉर्स ट्रेडिंग यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त का सहारा लिया. याचिका में कहा गया है कि TVK के पास अपने दम पर बहुमत नहीं था, बावजूद इसके पार्टी ने अन्य विधायकों का समर्थन हासिल कर सरकार बनाई.
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में केंद्र सरकार, CBI और तमिलनाडु सरकार को पक्षकार बनाया गया है. याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि फ्लोर टेस्ट के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और अनैतिक राजनीतिक गतिविधियों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए.
याचिका में दावा किया गया है कि विश्वास मत के दौरान लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन हुआ. साथ ही आरोप लगाया गया है कि सत्ता हासिल करने के लिए विधायकों पर दबाव डाला गया और राजनीतिक सौदेबाजी की गई.
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अपील की है कि जांच पूरी होने तक तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके.
गौरतलब है कि हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. हालांकि पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. इसके बाद कांग्रेस समेत कुछ अन्य दलों और विधायकों के समर्थन से विजय ने सरकार बनाई और मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
13 मई को विधानसभा में विजय सरकार ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें सरकार को बहुमत मिल गया. लेकिन अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्षी हलकों और कुछ सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं. याचिका में कहा गया है कि अगर हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ होगा. ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है.
संजय शर्मा