जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 शुक्रवार को लोकसभा में पेश हो गया है. उद्योग और वाणिज्य राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने यह बिल सदन में पेश करते हुए कहा कि कुल एक हजार प्रावधान डीक्रिमिनलाइज किया गया है. यह बिल पेश किए जाने पर केरल से सांसद के काव्या, महाराष्ट्र के नंदुरबार से कांग्रेस के सांसद एडवोकेट गोवाल कागदा पडवी ने आपत्ति की. स्पीकर ने कहा कि इसकी रिपोर्ट मैंने देखी है. किसी ने डिसेंट नोट नहीं दिया है.
कांग्रेस सांसद एडवोकेट पडवी ने कहा कि मेरे साथी सांसद ने डिसेंट नोट दिया है. स्पीकर ने कहा कि यह छोटा नोट है. कांग्रेस सांसद ने कहा कि छोटा नोट नहीं है सर. उन्होंने इस बिल को जेपीसी में भेजने की मांग की. विधेयक पेश किए जाने पर आपत्तियों के बाद जितिन प्रसाद ने बोलना शुरू ही किया था कि स्पीकर ने उन्हें रोक दिया. स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें रोकते हुए किरेन रिजिजू से मुखातिब होते हुए कहा कि संसदीय कार्य मंत्री जी, जरा मेरा ज्ञान बढ़ा दीजिए.
स्पीकर ने संसदीय कार्य मंत्री से पूछा कि एक बार यदि ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी चला जाता है, तो दोबारा फिर जेपीसी में जा सकता है कि नहीं. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसके जवाब में कहा कि एक तो जेपीसी में गया और व्यापक चर्चा करके वापस इस सदन में रखा. उन्होंने कहा कि जो भी आपत्तियां करनी थीं, सबको मौका मिला. वहीं कर सकते थे, फिर भी आपने बोलने का मौका दिया. रिजिजू ने कहा कि अब दोबारा फिर से कमेटी में भेजना. इस पर स्पीकर ने पूछा कि ऐसा कभी हुआ है क्या.
यह भी पढ़ें: 'यूपी के छात्रों ने क्या अपराध किया है', सपा सांसद की लोकसभा में मांग- जल्द कराएं छात्रसंघ चुनाव
किरेन रिजिजू ने कहा कि आजतक तो नहीं हुआ. स्पीकर ने कहा कि नहीं, मैंने नियम में भी नहीं पढ़ा कहीं. संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि नियम में भी नहीं है, और ऐसा कोई उदाहरण भी नहीं है. नियम 72 में आपने सदस्य को मौका दिया. लेकिन जो ऑब्जेक्शन उन्होंने रेज किए, वह इस नियम के नहीं थे. ऑब्जेक्शन मेरिट पर था. मेरिट पर तो बाद में चर्चा हो जाएगी. रिजिजू ने कहा कि फिर भी हमारे मंत्री आपको जवाब देंगे. इसके बाद निशिकांत दुबे अपनी सीट पर खड़े हुए.
यह भी पढ़ें: 'अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में करें मथुरा का विकास, दें स्पेशल पैकेज', लोकसभा में हेमा मालिनी की डिमांड
स्पीकर ने कहा कि आप भी कुछ ज्ञान दे दो. निशिकांत दुबे ने कहा कि मैं ये कहना चाहता हूं सर कि एक तो जेपीसी जब बनती है. 99.97 जो जेपीसी बनी हैं, उनकी सिफारिशों को कैबिनेट ने भी आजतक नहीं बदला. इसीलिए जेपीसी बनाई जाती है. उन्होंने कहा कि सेलेक्ट कमेटी और जेपीसी में यही फर्क है. निशिकांत दुबे ने कहा कि जहां तक संविधान का सवाल है, 368(7) कहता है सर, जैसे कि 1976 में कांग्रेस ने पूरा संविधान बदल दिया. संविधान बदलने का अधिकार इस हाउस को है. यह तो केवल बिल में बदलाव करने का सवाल है. यह तो छोटी चीज है.
aajtak.in