बीते कुछ समय में देश विमान हादसों के मामले अचानक बढ़ हैं लेकिन विमान के सुरक्षा संबंधी मामलों की देखरेख की जिम्मेदारी जिस निकाय के पास है वह खुद संकट से जूझ रही है. नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA), जो नागर विमानन क्षेत्र का नियामक निकाय है, वह खुद गहरे संकट में नजर आ रहा है.
'आजतक' को मिले एक एक्सक्लूसिव RTI जवाब से पता चला है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण विभागों में बड़े पैमाने पर पद खाली पड़े हैं. यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब सोमवार रात झारखंड के चतरा में एक एयर एम्बुलेंस हादसे का शिकार हो गई, जिसमें 7 लोगों की जान चली गई.
यह आरटीआई 28 जनवरी को अजित पवार के विमान से जुड़े घटनाक्रम के बाद दायर की गई थी. इसमें नॉन-शेड्यूल ऑपरेटर (NSOP) पर डीजीसीए द्वारा किए गए ऑडिट, एक्सपायरी पार कर चुके विमान पुर्जों के उपयोग की घटनाएं, पूर्व दुर्घटनाओं की जांच रिपोर्ट और नियामक संस्था की स्टाफिंग स्थिति से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई थी.
हालांकि नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने संचालन संबंधी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई, लेकिन स्टाफ से जुड़े जो आंकड़े साझा किए गए, वे इसकी प्रमुख सुरक्षा शाखाओं में भारी कमी को दर्शाते हैं.
आरटीआई में क्या पूछा गया
अजित पवार के 28 जनवरी के एयरक्राफ्ट हादसे के बाद फाइल की गई RTI में 28 जनवरी की घटना के बाद दायर आरटीआई में जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच नॉन-शेड्यूल ऑपरेटरों की डीजीसीए द्वारा निगरानी से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई थी जिसमें किए गए सेफ्टी ऑडिट, पाई गई गंभीर अनियमितताएं और की गई कार्रवाई शामिल हैं.
यह भी पढ़ें: अजित पवार प्लेन क्रैश: DGCA का VSR वेंचर्स पर शिकंजा, 4 विमान 'ग्राउंड' करने की तैयारी
इसमें यह भी पूछा गया था कि कितनी बार विमान या हेलीकॉप्टर के पुर्जों का उपयोग निर्धारित एक्सपायरी सीमा से अधिक किया गया, तथा किन ऑपरेटरों पर जुर्माना, निलंबन या ग्राउंडिंग की कार्रवाई हुई.
साथ ही, सितंबर 2023 में वीएसआर वेंचर्स से जुड़े लियरजेट 45 क्रैश में डीजीसीए के जांच निष्कर्षों, पायलट प्रशिक्षण मानकों, अस्थिर एप्रोच और क्या उसके बाद किसी विशेष निगरानी में ऑपरेटर को रखा गया था और इस संबंध में भी जानकारी मांगी गई.
सवाल उठाने वाले आंकड़े
हालांकि संचालन संबंधी जानकारी नहीं दी गई, लेकिन डीजीसीए की प्रमुख सुरक्षा शाखाओं में स्टाफ की स्थिति के जो आंकड़े सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं.
एयरवर्थनेस विंग (विमान रखरखाव मानकों और अनुपालन की निगरानी): 310 स्वीकृत पदों में से केवल 174 भरे हुए हैं. 136 पद खाली हैं, यानी लगभग 44% पद रिक्त.
एयर सेफ्टी विंग (ऑडिट और सुरक्षा निगरानी की जिम्मेदारी): 116 स्वीकृत पदों में से 86 भरे हुए हैं. 30 पद खाली, यानी 25% से अधिक कमी.
सर्विलांस एंड एनफोर्समेंट डिवीजन: इस विभाग में कोई स्वीकृत पद नहीं है, फिर भी वर्तमान में सात कर्मचारी कार्यरत हैं.
यह भी पढ़ें: रांची-दिल्ली एयर एम्बुलेंस हादसे में सभी 7 लोगों की मौत, झारखंड के चतरा में हुआ हादसा
झारखंड हादसे ने बढ़ाई चिंता
सोमवार रात रेडबर्ड एयरवेज का बीचक्राफ्ट C90 (VT-AJV) विमान, जो रांची से दिल्ली एयर एंबुलेंस के रूप में संचालित हो रहा था, झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया. डीजीसीए के अनुसार, कोलकाता से संपर्क स्थापित करने के बाद विमान ने खराब मौसम के कारण मार्ग बदलने का अनुरोध किया था. शाम 7:34 बजे उसका संपर्क और रडार ट्रैक दोनों टूट गया था.
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, आंधी-तूफान हादसे का कारण हो सकता है, हालांकि औपचारिक जांच जारी है. विमान में सवार सभी सात लोगों-दो चालक दल के सदस्य, एक मरीज और परिजन-की मौत हो गई. इस हादसे ने एक बार फिर नॉन-शेड्यूल और एयर एंबुलेंस संचालन पर नियामकीय निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
अशोक उपाध्याय