उत्तर प्रदेश में एक बार फिर एक फिल्म ने सियासी और सामाजिक हलचल तेज कर दी है. 27 फरवरी को रिलीज होने जा रही फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' को लेकर यादव समाज ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. चेतावनी दी गई है कि किसी भी सिनेमाघर में इस फिल्म को रिलीज नहीं होने दिया जाएगा. वजह है फिल्म की कहानी, जिसे ‘लव जिहाद’ से जोड़कर देखा जा रहा है. कहानी में लड़की यादव समाज की है और लड़का मुस्लिम बताया गया है.
यूपी के संभल और फिरोजाबाद में फिल्म का विरोध सबसे तेज है. कहीं डीएम को ज्ञापन दिया जा रहा है, तो कहीं थानों में शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं. यादव समाज के संगठनों का कहना है कि फिल्म एक खास जाति को निशाना बनाती है और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है. प्रदर्शनकारियों ने सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स संचालकों को भी चेताया है कि यदि फिल्म चलाई गई तो कड़ा विरोध होगा.
विरोध करने वालों का एक बड़ा तर्क यह भी है कि फिल्म के निर्माता, निर्देशक और कलाकारों में कोई भी यादव नहीं है. फिल्म के निर्माता संदीप तोमर, निर्देशक अंकित भड़ाना हैं, जबकि मुख्य भूमिकाओं में प्रगति तिवारी और विशाल मोहन हैं. प्रगति तिवारी ने सफाई दी है कि फिल्म से किसी समाज की भावनाएं आहत करने का इरादा नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि विरोध अब उनके नियंत्रण से बाहर जा चुका है. इस विवाद से समाजवादी पार्टी भी असहज है.
फिल्म को लेकर सपा भी असहज स्थिति में
संभल और फिरोजाबाद दोनों ही सपा के मजबूत गढ़ माने जाते हैं. यूपी में यादव और मुस्लिम वोट बैंक सपा की रीढ़ हैं. उत्तर प्रदेश में 11 परसेंट यादव और 19 परसेंट मुस्लिम वोटर हैं, यानी समाजवादी पार्टी की गिनती ही 30 परसेंट से शुरू होती है. CSDS-लोकनीति का सर्वे बताता है कि 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में यादवों का 83% और मुसलमानों का 79% वोट समाजवादी पार्टी को मिला था. यही वजह है कि यूपी में समाजवादी पार्टी के 28 मुस्लिम विधायक और 24 यादव विधायक हैं.
अब जिन समुदायों की एकजुटता से समाजवादी पार्टी को इतने वोट मिल रहे हों, अगर उनके बीच में ठन जाए तो पार्टी का परेशान होना बनता है. यही कारण है कि 'यादव जी की लव स्टोरी' फिल्म के विषय वस्तु को लेकर दोनों समुदायों के बीच तनाव पार्टी के लिए चिंता का विषय है. पार्टी नेताओं का आरोप है कि चुनाव से पहले जानबूझकर ऐसी ‘एजेंडा आधारित’ फिल्में लाई जा रही हैं. इससे पहले घूसखोर पंडित और अब 27 फरवरी को ही रिलीज होने जा रही 'केरल लव स्टोरी 2' भी विवादों में हैं. इस सीरीज की पहली फिल्म 'द केरल स्टोरी' पर भी बवाल हुआ था, जो लव जेहाद पर थी और इसका विषय भी लव जेहाद पर आधारित है.
फिल्म 'केरल लव स्टोरी 2' भी विवादों में
इस फिल्म पर मुस्लिम समुदाय की अपनी आपत्ति है. मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी आपत्ति है. लेकिन फिल्म के निर्माताओं का तर्क है कि इसमें सच्चाई दिखाई गई है. फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत ही इस डायलॉग से होती है कि अगले 25 साल में भारत में शरिया लागू हो जाएगा. सवाल यही है क्या फिल्मों के जरिए चुनावी माहौल में ध्रुवीकरण की कोशिश हो रही है? और क्या सिनेमा को राजनीतिक एजेंडे का औजार बनाया जा रहा है? इन सवालों के बीच, ‘यादव जी की लव स्टोरी’ यूपी की यादव बेल्ट में तीखे विरोध के बीच अपनी रिलीज का इंतजार कर रही है.
आजतक ब्यूरो