बिहार की विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने राज्यसभा में पलायन का मुद्दा उठाया. उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि की राशि का मुद्दा भी उठाया और कहा कि हम सभी को यह सोचना चाहिए कि बजट किसके लिए है. मनोज कुमार झा ने कहा कि शिकायत के लहजे में नहीं, कुछ सुझाव के दृष्टिकोण से अपनी बात रखूंगा.
उन्होंने कहा कि श्रम से लेकर पंचायती राज तक, मंत्रालयों का आवंटन घटा दिया गया. इसके आवंटन से चिंता सिर्फ हमारी नहीं, एक-एक व्यक्ति को होनी चाहिए. प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने कहा कि पीएम किसान निधि साल 2019 में छह हजार थी. आज 2026 में भी छह हजार ही है. उन्होंने कहा कि तब से अब तक, इतने वर्षों में क्या कुछ भी नहीं बदला. जैसा तब था, वैसा ही अब भी है.
प्रोफेसर झा ने कहा कि क्या ये हमारी प्राथमिकताओं में नहीं होनी चाहिए. उन्होंने सॉइल हेल्थ कार्ड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसका नतीजा जीरो है, लेकिन हम डिनायल मोड में रहते हैं. हम सभी सांसदों को, चाहे किसी भी पार्टी के हों, खुलकर सरकार को यह बताना चाहिए. मनोज कुमार झा ने कहा कि हम डिप्लोमेसी में भी डिनायल मोड में ही हैं. 175 बच्चियां मारी गई थीं, उसकी तो निंदा कर सकते थे. लेकिन हमने वह भी नहीं किया.
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उन्होंने कहा कि उसका नतीजा ये है कि हमें आज ये सब झेलना पड़ रहा है. मनोज झा ने कहा कि एजुकेशन सेक्टर क्या हमारी प्राथमिकताओं में नहीं होना चाहिए. गलगोटिया वाली घटना हुई, क्यों हुई. नॉन नेट फेलोशिप हूं. जब से यह फेलोशिप शुरू हुई, आज तक इसमें कोई बढोत्तरी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के बारे में कुछ नहीं कहूंगा. इंदौर में दूषित पानी पीने से सैकड़ों लोग मर गए. ये अलार्म बेल है.
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आरजेडी सांसद प्रोफेसर झा ने कहा कि यह सिर्फ बीजेपी के लिए नहीं, हम सबके लिए अलार्म बेल है. हम कौन सी दुनिया दे रहे हैं अपने लोगों को. उन्होंने कहा कि पिछले दिनों बिहार का जिक्र हुआ, हमारे दोस्त लोग नाराज हो गए कि बार-बार बिहार आ रहा है. प्रोफेसर झा ने कहा कि बिहार नहीं, चुनाव का बहार आ रहा है. बिहार पलायन का दर्द झेल रहा है. हम चाहते हैं कि बिहार में निवेश आए और दूसरे राज्यों से बिहार के लिए ट्रेन आए.
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उन्होंने कहा कि आय की असमानता क्या करती है, ये अवसरों की असमानता में बदल जाती है. प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने कहा कि ये लोकतंत्र को भी प्रभावित करती है. प्रोग्रेसिव टैक्सेशन के बारे में सोचा जाए. ये आर्किटेक्चर हमें लील जाएगा. विरासत टैक्स के बारे में सोचें. उन्होंने कहा कि सदन पक्ष और विपक्ष से मिलकर होता है. पक्ष-विपक्ष बदलने वाली चीजें हैं, लेकिन कुछ सरोकार साझा होने चाहिए. हिंदुस्तान की डिप्लोमेसी की एक नैतिक विरासत होनी चाहिए. हम उसको न खोएं.
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