संसद के चालू बजट सत्र का दूसरा हाफ चल रहा है. राज्यसभा में सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अनुपूरक अनुदान मांगों से संबंधि बिल पेश किया. इस बिल पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भारत में इनकम टैक्स की जॉइंट फाइलिंग का सिस्टम लागू करने की डिमांड की. उन्होंने यह भी कहा कि इससे ज्यादा लोग शादियां करेंगे, ताकि इसका फायदा उठा सकें.
दरअसल, अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि भारत में पति-पत्नी, दोनों को सेप्रेट टैक्स देना होता है. दोनों को अलग-अलग रिबेट्स दिए जाते हैं. उन्होंने उदाहरणों से यह बताया कि किस तरह से सेम इनकम वाले दो परिवारों में से एक को लाखों रुपये इनकम टैक्स जमा करना पड़ता है और दूसरे परिवार को सेम इनकम के बावजूद जीरो. राघव चड्ढा ने कहा कि जब इनकम जॉइंट है, खर्चे जॉइंट हैं और रिस्पॉन्सिबिलीट जॉइंट है, तब टैक्स एक क्यों नहीं हो सकता.
उन्होंने कहा कि पति-पत्नी को दुनिया के कई देशों में क्लब किया गया है, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है. राघव चड्ढा ने भारत में जॉइंट फाइलिंग ऑफ इनकम टैक्स सिस्टम लाए जाने की डिमांड की और कहा कि इससे ज्यादा लोग शादियां करेंगे, ताकि इसका फायदा उठा सकें. पति-पत्नी को वन सिंगल इकोनॉमिक यूनिट रिकॉग्नाइज किया जाना चाहिए. उन्होंने सैनिकों को मिलने वाली दिव्यांग पेंशन पर इनकम टैक्स लगाने के फैसले को वापस लेने की भी डिमांड की.
राघव चड्ढा ने कहा कि भारत माता की सेवा करते हुए किसी ऑपरेशन के दौरान कोई सैनिक जब अपना कोई अंग खो बैठता है, दिव्यांग हो जाता है, तब सरकार उसे डिसएबिलिटी पेंशन देती है. उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा करके उस सैनिक पर कोई एहसान नहीं करती, यह उस सैनिक को दिया जाने वाला मुआवजा है. राघव चड्ढा ने कहा कि अब डिसएबिलिटी पेंशन पर भी सरकार इनकम टैक्स लगाने जा रही है. यह नहीं होना चाहिए.
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उन्होंने कहा कि ऐसा करके हम एक प्रकार से सैनिकों की दो कैटेगरी बना रहे हैं. घायल होने के बाद भी काम करने वाले सैनिकों को हम पनिश कर रहे हैं. राघव चड्ढा ने कहा कि अगर भारत माता की सेवा में सैनिक ने कोई अंग खो दिया, उस पर टैक्स नहीं लगना चाहिए. उन्होंने कहा कि सैनिकों को यह देश एक हाथ से सैल्यूट और दूसरे हाथ से इनकम टैक्स का नोटिस नहीं दे सकता. इसे वापस लिया जाना चाहिए.
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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बैंकों की ओर से लगाए जाने वाले मिनिमम बैलेंस चार्जेज को भी जीरो करने की मांग की और कहा कि पिछले कुछ वर्षों में 19 हजार करोड़ रुपये बैंकों ने मिनिम बैलेंस चार्जेज से वसूले हैं. उन्होंने कहा कि बैंकों की हालत ये है कि कई बार ये चार्ज लगा-लगाकर निगेटिव में पहुंचा देते हैं बैलेंस. राघव चड्ढा ने कहा कि बैंक फाइनेंशियल सिक्योरिटी की जगह फाइनेंशियल स्ट्रेस दे रहे हैं. हमें छोटी बचत को प्रोटेक्ट करना होगा. आज बैंक गरीब आदमी को पीनलाइज करके ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं.
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