संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े बिलों पर बहस के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बयान सुर्खियों में है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले का जवाब 'नंबर 16' में छुपा है. इसके बाद से पूरे देश में यह पहेली बन गई कि आखिर यह नंबर 16 क्या है.
संसद में तीन बिलों पर बहस हो रही थी. यह बिल परिसीमन यानी लोकसभा और विधानसभा सीटों की नई सीमाएं तय करने और महिला आरक्षण से जुड़े थे. इस बहस में राहुल गांधी ने भी हिस्सा लिया.
राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में क्या कहा?
राहुल गांधी ने कहा कि वो गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण देख रहे थे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का भाषण बहुत कमजोर लग रहा था, उनमें कोई जोश नहीं था, कुछ भी असरदार नहीं था. राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री इसलिए ठीक से नहीं बोल पा रहे थे क्योंकि यह बिल लाना एक गलती थी और सब जानते थे कि यह पास नहीं होगा.
नंबर 16 की बात कैसे आई?
राहुल गांधी ने कहा कि जब वो प्रधानमंत्री का भाषण देख रहे थे तभी उन्होंने अपने फोन पर तारीख देखी. तारीख थी 16 अप्रैल. और उसी पल उनके दिमाग में एक बात आई. उन्होंने कहा कि उन्हें अचानक लगा कि यह नंबर 16 ही सब कुछ है. इसी में पूरा जवाब है.
राहुल ने आगे क्या कहा?
राहुल ने कहा कि जो भी इस नंबर का मतलब समझता है वो उन्हें मैसेज करे या X यानी ट्विटर पर बताए. उन्होंने कहा, 'आपकी समस्याओं का जवाब नंबर 16 में है और आप जल्द ही जान जाएंगे.'
लोगों ने क्या-क्या अंदाजे लगाए?
राहुल की इस बात ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया. लोग तरह-तरह के अंदाजे लगाने लगे. कुछ ने कहा कि शायद TDP के 16 सांसदों की बात हो रही है. कुछ ने कहा कि शायद किसी 16 मिनट के वीडियो का हवाला है. कुछ ने कहा कि शायद किसी अंतरराष्ट्रीय घोटाले से जुड़ी बात है जिसमें बड़े-बड़े लोगों के नाम हैं. लेकिन राहुल ने खुद खुलासा नहीं किया.
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असल में नंबर 16 का क्या मतलब है?
राहुल ने साफ तौर पर यह नहीं बताया. उन्होंने बस यह संकेत दिया कि 16 अप्रैल की तारीख ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया. बाकी लोगों के लिए यह एक पहेली बनी हुई है. राहुल ने कहा कि जवाब जल्द सामने आएगा.
यह सियासी तौर पर क्यों अहम है?
राहुल गांधी ने यह बात संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े बिलों की बहस के दौरान कही. इसका मतलब है कि वो कुछ ऐसी बात की तरफ इशारा कर रहे हैं जो सरकार के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है. यह एक राजनीतिक चाल भी हो सकती है जिससे लोगों का ध्यान खींचा जाए और सरकार को घेरा जाए.
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