2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और मांग को खारिज कर दिया है. प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसकी मांग को सुप्रीम कोर्ट ने मानने से मना कर दिया है. कोर्ट ने जनसुराज पार्टी को पहले हाईकोर्ट जाने को कहा है. इसके बाद जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोग कोर्ट का इस्तेमाल लोकप्रियता हासिल करने के लिए कर रहे हैं. कोर्ट ने जन सुराज पार्टी को पटना हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है.
जन सुराज के वकील चंद्र उदय सिंह ने कहा, "जो राज्य गरीब हैं और बजट में भी इसका प्रावधान नहीं था, ना ही पॉलिसी मैटर था लेकिन वहां सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार ने चुनाव के दौरान जब आदर्श आचार संहिता लागू थी, तो महिलाओं के खाते में दस दस हजार रुपए डाले. ये चुनावी आचार संहिता का सरासर उल्लंघन है."
सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल...
याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि इस योजना के तहत चुनाव प्रक्रिया के दौरान 15600 करोड़ रुपये महिला वोटरों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आप हाई कोर्ट क्यों नहीं गए?
याचिका में क्या मांग कई गई?
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया था कि चुनाव के दौरान बिहार सरकार ने गैरकानूनी तरीके अपनाए, इसलिए चुनाव रद्द करके दोबारा करवाए जाएं.
याचिका में कहा गया था कि राज्य में जब आदर्श आचार संहिता लागू थी, तब महिला वोटरों को 10 हजार रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए. उस वक्त ऐसे कदम को गैरकानूनी माना जाना चाहिए.
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'लोकप्रियता हासिल करने...'
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उस चुनाव में आपकी पार्टी को कितने वोट मिले? जनता ने आपको नकार दिया है, लेकिन अब आप लोकप्रियता हासिल करने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल कर रहे हैं.
संजय शर्मा