मिडिल ईस्ट संकट: PM मोदी की हाईलेवल मीटिंग, समस्याओं से निपटने के लिए बनाया ये 'एक्शन प्लान'

मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार अलर्ट मोड में है. प्रधानमंत्री आवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक में ऊर्जा, पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की समीक्षा की गई. देश में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है.

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 प्रधानमंत्री मोदी ने मिडिल ईस्ट संकट पर उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. (Photo: ITG) प्रधानमंत्री मोदी ने मिडिल ईस्ट संकट पर उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. (Photo: ITG)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 22 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:04 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक की अध्यक्षता की. प्रधानमंत्री आवास पर तीन घंटे से ज्यादा देर तक चली इस बैठक में मौजूदा हालात, उसके भारत पर असर और सरकार की तैयारियों का व्यापक आकलन किया गया. कैबिनेट सेक्रेटरी ने वैश्विक स्थिति और अब तक उठाए गए कदमों पर डिटेल में प्रेजेंटेशन​ दिया.

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सीसीएस की बैठक के दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उनमें कृषि, फर्टिलाइजर, फूड सिक्योरिटी, पेट्रोलियम, पावर, MSME, एक्सपोर्ट, शिपिंग और सप्लाई चेन जैसे अहम सेक्टर शामिल रहे. मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का इन सेक्टर्स पर पड़ने वाले असर और उससे निपटने के उपायों पर बैठक में चर्चा हुई. सरकार ने साफ किया कि बदलते हालात का असर शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म में देखने को मिल सकता है. आम नागरिकों के लिए जरूरी खाद्य वस्तुओं और ईंधन की उपलब्धता को प्राथमिकता दी गई. 

देश में खाद का पर्याप्त भंडार 

खरीफ सीजन के लिए खाद की जरूरतों पर सरकार ने बताया कि पिछले वर्षों में बनाए गए पर्याप्त भंडार से समय पर किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी. भविष्य में खाद की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई.

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बिजली की भी नहीं होगी कमी 

बिजली क्षेत्र को लेकर यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला भंडार उपलब्ध है, जिससे देश में बिजली की कोई कमी नहीं होगी. रसायन, फार्मास्युटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आयात के स्रोतों में विविधता लाने और भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने पर भी विचार किया गया.

इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केमिकल एंड फर्टिलाइजर और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिहं पुरी, श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया समेत अन्य वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे.

मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार तेल, गैस, खाद की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए पहले से ही सक्रिय कदम उठा रही है. 12 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है. उन्होंने कहा था कि यह देश के लोगों के धैर्य और समझदारी की भी परीक्षा है. पीएम मोदी ने कहा कि इस चुनौती का सामना शांति, धैर्य और जन-जागरूकता के साथ करना होगा.

सप्लाई चेन बाधाओं को दूर करने की कोशिश

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प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया था कि उनकी सरकार ग्लोबल सप्लाई चेन में आई बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं कि सप्लाई चेन में आई रुकावटों को कैसे दूर किया जाए.' 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात और बिगड़ गए हैं. जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर हमले किए हैं.

ईरान के नियंत्रण में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया की लगभग 20% ऊर्जा आपूर्ति होती है. संघर्ष के बाद से यहां जहाजों की आवाजाही काफी सीमित हो गई है. इसका असर भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है. स्थिति को संभालने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजरायल और ईरान के नेताओं से फोन पर बातचीत भी की है.

LPG सिलेंडर की पैनिक बुकिंग में कमी आई

सरकार ने गैस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को बेहतर बनाने और सप्लाई पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं. सरकारी बयान के मुताबिक, घरेलू एलपीजी की आपूर्ति फिलहाल पूरी तरह सामान्य है. देशभर में कहीं भी गैस की कमी (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं है और डिलीवरी भी सामान्य रूप से हो रही है. अधिकांश डिलीवरी डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) के जरिए की जा रही हैं और पैनिक बुकिंग में कमी आई है. कमर्शियल एलपीजी के मोर्चे पर सरकार ने आवंटन में लगातार बढ़ोतरी की है. पहले 20 प्रतिशत आपूर्ति बहाल की गई थी.

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इसके बाद 18 मार्च को PNG विस्तार से जुड़े सुधारों के तहत अतिरिक्त 10 प्रतिशत आवंटन किया गया. 21 मार्च को और 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ कुल कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इस अतिरिक्त आवंटन में रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, इंडस्ट्रियल कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, डेयरी, कम्युनिटी किचन और सरकारी सब्सिडी वाले भोजन केंद्रों को प्राथमिकता दी गई है. प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो के सिलेंडर की भी व्यवस्था की गई है. करीब 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नई डिस्ट्रीब्यूशन गाइडलाइंस लागू कर दी गई हैं, जबकि बाकी क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां आपूर्ति कर रही हैं.

पिछले 8 दिनों में करीब 15,440 टन एलपीजी की आपूर्ति कमर्शियल उपभोक्ताओं को की गई है. साथ ही पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के विस्तार को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए नए PNG कनेक्शन उपलब्ध कराने में तेजी लाएं. पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने अपने सभी कार्यालयों को निर्देश दिया है कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) से जुड़ी सभी आवेदन प्रक्रियाएं 10 दिनों के भीतर निपटाई जाएं. इसका मकसद पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के विस्तार को तेजी देना है.

जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त एक्शन

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एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए देशभर में लगातार छापेमारी की जा रही है. देशभर के बंदरगाहों पर संचालन सामान्य है और कहीं भी भीड़भाड़ की स्थिति नहीं है. सरकार खाड़ी और मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय दूतावास अपने नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं और उन्हें सभी जरूरी सूचनाएं उपलब्ध करा रहे हैं. बहुत सारे भारतीय नागरिकों को युद्ध क्षेत्र से निकालकर वापस भी लाया गया है.

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