एक ओर थलपति विजय ने चेन्नई में नए सहयोगी राहुल गांधी के समर्थन से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे परजीवी पार्टी बताया.
कांग्रेस के अपने लंबे समय के सहयोगी डीएमके को छोड़कर टीवीके के साथ जाने के फैसले पर तंज कसते हुए पीएम मोदी ने बेंगलुरु में कहा, "कांग्रेस एक परजीवी पार्टी बन गई है. ये लोग लूटे हुए पैसों के लिए आपस में लड़ रहे हैं. मौका मिलते ही ये अपने ही सहयोगी को धोखा देने को तैयार हैं. कांग्रेस ने शायद ही किसी पार्टी को धोखा न दिया हो."
पीएम मोदी ने बताया कि पिछले तीन दशकों में डीएमके ने कई बार कांग्रेस को संकटों से उबरने में मदद की है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सत्ता की लालसा ने उसे अपने सहयोगी को धोखा देने के लिए प्रेरित किया है.
उन्होंने यह भी कहा कि डीएमके ने यूपीए-1 और यूपीए-2 के सालों के दौरान कई बार कांग्रेस को संकट से बाहर निकाला था, लेकिन अब राजनीतिक हवा का रुख बदलने के बाद उसे धोखा दिया जा रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी पर आंतरिक सत्ता-संघर्ष और जनता के साथ विश्वासघात के चलते कर्नाटक में सुशासन देने में विफल रहने का आरोप भी लगाया. उन्होंने यह भी कहा कि बेंगलुरु से भगवा सूर्य का उदय हो रहा है, क्योंकि बीजेपी की राजनीतिक पहुंच पूरे देश में फैल रही है.
कांग्रेस पर लगाए आरोप
बीजेपी कार्यकर्ताओं की एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को राजनीतिक स्थिरता और विकास का प्रतीक बताया. पीएम मोदी ने इसकी तुलना कांग्रेस की विश्वासघात की राजनीति और प्रशासनिक विफलता से की.
कर्नाटक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जन मुद्दों को सुलझाने की बजाय अपने आंतरिक विवादों को सुलझाने में अधिक समय लगाया.
प्रधानमंत्री ने कहा, "पिछले 3 सालों से कर्नाटक में, जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय, सरकार का अधिकांश समय आंतरिक संघर्षों को सुलझाने में ही व्यतीत हुआ है. कांग्रेस सरकार नेतृत्व और सत्ता बंटवारे को लेकर अनिश्चितता में घिरी रही."
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व से जुड़े सवालों का समाधान नहीं कर पाई है. उन्होंने कहा, "वे यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि मुख्यमंत्री कब तक रहेंगे. वे यह भी तय नहीं कर पा रहे हैं कि किसी और को मौका मिलेगा या नहीं. सब कुछ अधर में लटका हुआ है."
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