राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन से 28 जनवरी को शुरू हुआ बजट सत्र समाप्त हो गया है. 18 अप्रैल को कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा में सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इस सत्र के दौरान हुए कामकाज का ब्यौरा दिया और फिर कार्यवाही अनिश्चिकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. बजट सत्र के दौरान लोकसभा की उत्पादकता 93 प्रतिशत और राज्यसभा की 110 प्रतिशत रही.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही 151 घंटे और 42 मिनट तक चली. वहीं, राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि सदन ने 157 घंटे और 40 मिनट तक काम किया. बजट सत्र के दौरान उत्पादकता 109.87 प्रतिशत रही. इस दौरान 117 प्रश्न पूछे गए और 446 शून्यकाल के साथ स्पेशल मेंशन के तहत 207 मुद्दे उठे.
राज्यसभा के सभापति ने यह भी कहा कि इस सत्र के दौरान हरिवंश को तीसरी बार उपसभापति निर्वाचित किया गया. इस पर प्रधानमंत्री के साथ ही अलग-अलग दलों के नेताओं और सदस्यों ने हरिवंश को बधाई दी. सभापति ने सदन की कार्यवाही के संचालन में सहयोग के लिए सभी सदस्यों, उपसभापति, उपसभापति पैनल के प्रति आभार जताया. सभापति ने इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा कर दी.
तीन फेज में चला बजट सत्र
बजट सत्र की कार्यवाही दो फेज में चलती है, लेकिन इस बार तीन फेज में चली. पहले फेज में दोनों सदनों से वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पारित हुआ. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बगैर जवाब के लोकसभा से पारित कर दिया गया. धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देना था, लेकिन विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण प्रधानमंत्री सदन में नहीं आए और बिना जवाब के ही यह प्रस्ताव पारित कर दिया गया. विपक्ष के आठ सांसदों को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया और विपक्षी दलों की महिला सांसदों के प्रधानमंत्री की चेयर घेरने का विवाद भी इसी फेज में हुआ, जिसके बाद विपक्ष स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था.
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बजट सत्र के दूसरे हाफ की हंगामेदार शुरुआत हुई. विपक्षी दलों ने सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया. इसी हाफ में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान हुए. स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था. इस हाफ में जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक के साथ ही बैंकरप्सी (संशोधन) विधेयक और ट्रांसजेंडर राइट्स प्रोटेक्शन (अमेंडमेंट) बिल समेत महत्वपूर्ण बिल पारित हुए. बजट सत्र 2 अप्रैल को ही संपन्न होना था, लेकिन सरकार ने ऐन वक्त पर लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा सभापति से 16, 17 और 18 अप्रैल को भी सदन की बैठक बुलाने का आग्रह किया.
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बजट सत्र के तीसरे हाफ में सरकार महिला आरक्षण बिल से जुड़े संविधान संशोधन बिल समेत तीन बिल लोकसभा में लेकर आई. इन बिल पर 21 घंटे से अधिक समय तक मैराथन चर्चा हुई, जिसका जवाब गृह मंत्री अमित शाह ने दिया. अमित शाह के जवाब के बाद कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ये बिल विचार करने के लिए सदन में प्रस्तुत किए. इस पर वोटिंग हुई, जिसमें यह दो तिहाई बहुमत के जरूरी आंकड़े तक नहीं पहुंच सका. इस बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े. यह पारित कराने के लिए सरकार को 352 वोट की जरूरत थी, जो वह नहीं जुटा सकी.
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