नासिक में एक बड़ा धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया, जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी. अब यह मामला सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. एक याचिका दाखिल की गई है जिसमें कहा गया है कि जबरदस्ती या धोखे से धर्म बदलवाना सिर्फ एक धार्मिक मामला नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए खतरा है.
सुप्रीम कोर्ट में पहले से धर्म परिवर्तन से जुड़ा एक स्वतः संज्ञान मामला चल रहा है. स्वतः संज्ञान का मतलब है कि अदालत ने खुद ही इस मुद्दे को संज्ञान में लिया था. अब नासिक के TCS मामले को लेकर उसी केस में एक नई अर्जी दाखिल की गई है. याचिका दाखिल करने वाले वकील ने अदालत में कहा कि नासिक का यह संगठित धर्म परिवर्तन का मामला पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख देने वाला है.
याचिका में क्या-क्या मांगा गया है और क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिका में कई बड़े दावे और मांगें की गई हैं. पहली बात यह कि जबरदस्ती या धोखे से धर्म बदलवाना देश के लिए एक गंभीर खतरा है. दूसरी बात यह कि जब यह काम किसी बड़े संगठित और दबाव बनाकर चलाए जा रहे अभियान के तहत होता है तो इसे 'आतंकवादी कृत्य' माना जाना चाहिए.
तीसरी बड़ी बात यह कही गई है कि यह जबरन या धोखे से धर्म बदलवाना कोई अकेली धार्मिक घटना नहीं है बल्कि एक 'सुनियोजित षड्यंत्र' है. याचिका में दावा किया गया है कि इस षड्यंत्र को अक्सर विदेशी ताकतें पैसा देती हैं. इसका मकसद देश के धार्मिक जनसंख्या संतुलन को बदलना है जिससे भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरा पैदा हो.
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याचिका में यह भी कहा गया है कि धर्म की आजादी का अधिकार तो है, लेकिन यह आजादी सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता की शर्तों के अधीन है. यानी इस आजादी की आड़ में जबरन या धोखे से धर्म नहीं बदला जा सकता.
याचिका में अदालत से क्या मांगा गया?
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से दो बड़ी मांगें की गई हैं. पहली मांग यह है कि केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं ताकि धोखे या जबरदस्ती से होने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाई जा सके.
दूसरी मांग यह है कि केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाए कि धर्म परिवर्तन के मामलों को सुनने के लिए अलग से स्पेशल कोर्ट यानी विशेष अदालतें बनाई जाएं.
सृष्टि ओझा