भारत अपनी वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को मजबूत करने के लिए फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) आने वाले दिनों में बैठक कर इस प्रस्ताव पर एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) देने पर विचार कर सकती है. ये कदम फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रहा है, जो इस महीने के अंत में AI समिट के लिए भारत आ रहे हैं.
सूत्रों ने बताया कि पिछले महीने रक्षा खरीद बोर्ड (Defence Procurement Board) ने इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी थी. DAC की मंजूरी के बाद तकनीकी और वाणिज्यिक बातचीत शुरू होगी और सौदा आने वाले महीनों में अंतिम रूप ले सकता है. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये डील मैक्रों की यात्रा के दौरान अंतिम रूप ले सकती है.
बताया जा रहा है कि ये सौदा भारत की अब तक की सबसे बड़ी लड़ाकू विमान खरीद में से एक होगा, जिसकी अनुमानित लागत 3.25 लाख करोड़ रुपये है. वहीं, पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर बढ़ते खतरों, खासकर पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के बीच ये डील अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
'मेक इन इंडिया का विस्तार'
इस मेगा डील के तहत कुल 114 राफेल विमानों में से 18 विमान 'फ्लाई-अवे' यानी तैयार स्थिति में फ्रांस से आएंगे. बाकी बचे विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. योजना के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत फाइटर जेट्स घरेलू स्तर पर बनाए जाएंगे, जिनमें स्वदेशी सामग्री 60 प्रतिशत तक हो सकती है. इस कार्यक्रम के तहत भारतीय वायु सेना को 88 सिंगल-सीट और 26 ट्विन-सीट विमान मिलने की संभावना है.
सूत्रों के अनुसार, फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन स्थानीय स्तर पर असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग के लिए भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझेदारी करेगी.
'गेम चेंजर है राफेल'
भारतीय वायुसेना (IAF) वर्तमान में केवल 29-30 फाइटर स्क्वाड्रनों के साथ संचालित हो रही है, जो कि स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की संख्या से काफी कम है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि राफेल विमान को वायुसेना के लिए एक गेम-चेंजर माना जा रहा है. ये विमान उन्नत सेंसर और लंबी दूरी तक मार करने वाली मेट्योर और स्कैल्प (SCALP) जैसी मिसाइलों से लैस है. इसकी मारक क्षमता और युद्ध के मैदान में प्रदर्शन ने इसे रक्षा योजनाकारों की पहली पसंद बना दिया है. पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर बढ़ते खतरे के बीच राफेल एक बड़ी ताकत साबित होगा.
चीन-पाकिस्तान की सांठगांठ
सूत्रों के मुताबिक, चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ती सैन्य समन्वय और पड़ोसी क्षेत्रों में बदलते समीकरणों ने इस सौदे की तात्कालिकता बढ़ा दी है. डीएसी से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद, औपचारिक तकनीकी और व्यावसायिक बातचीत शुरू होगी.
अधिकारियों का मानना है कि आने वाले महीनों में ये सौदा पूरी तरह आकार ले लेगा. राष्ट्रपति मैक्रों की यात्रा के दौरान इस रक्षा सहयोग पर बड़ी घोषणाओं की उम्मीद जताई जा रही है, जो भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.
शिवानी शर्मा