पश्चिम बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक की. इस बैठक में भी ममता ने दोहराया कि वह पद से इस्तीफा नहीं देंगी और विधानसभा के भीतर विरोध दर्ज कराएंगी.
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ममता ने कहा कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगी. उन्हें मुझे बर्खास्त करने दीजिए. अगर केंद्र सरकार चाहे तो राष्ट्रपति शासन लागू करे. उन्होंने कहा कि उनका मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देना एक तरह का प्रोटेस्ट है. अभिषेक बनर्जी ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि यह उनका विरोध जताने का तरीका है, क्योंकि उनका मानना है कि चुनाव में जबरन उनका जनादेश छीन लिया गया.
ममता बनर्जी ने पार्टी विधायकों से कहा कि विधानसभा के पहले दिन काले कपड़े पहनें. मैं इसे ब्लैक डे के तौर पर मनाना चाहती हूं. हम मजबूत रहना होगा. जिन लोगों ने हमें धोखा दिया है, उन्हें पार्टी से बाहर किया जाएगा. मैंने उन्हें नैतिक रूप से हराया है. मैं अब आजाद पंछी हूं. हम भले ही हार गए हो लेकिन हम लड़ना नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने सभी विजयी उम्मीदवारों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रहने और किसी भी हिंसा की स्थिति से निपटने के निर्देश दिए गए.
इस मीटिंग में उन्होंने फिर कहा कि बीजेपी ने चुनाव में धांधली की है और वे इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती हैं. ममता ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए गए. ममता बनर्जी, चंद्रिमा भट्टाचार्य और अन्य नेता फिर से अदालत में अपनी कानूनी प्रैक्टिस शुरू करेंगे.
बंगाल के नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के दिन तृणमूल पार्टी ऑफिस में रबिंद्र संगीत बजाया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि भले ही यहां कुछ नुकसान हुआ हो, लेकिन दिल्ली अभी भी उनका मुख्य लक्ष्य है और पूरा इंडिया ब्लॉक मिलकर लड़ेगा.
बता दें कि इससे पहले मंगलवार को ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस्तीफा नहीं देने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि हम चुनाव हारे नहीं हैं, हमें हराया गया है. बीजेपी ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर जीत हासिल की है.
ममता ने कहा था कि अगर बीजेपी ने निष्पक्ष चुनाव जीतकर जीत हासिल की होती, तो मुझे कोई शिकायत नहीं होती लेकिन हम हारे नहीं हैं. बीजेपी ने ये जीत चुरा ली है. उन्होंने एसआईआर से 90 लाख नाम हटा दिए. जब हम कोर्ट गए तो 32 लाख लोग वापस जोड़े गए.
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