मकर संक्रांति 2026: कड़ाके की ठंड में आस्था की डुबकी, प्रयागराज से हरिद्वार तक उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

मकर संक्रांति के मौके पर प्रयागराज, हरिद्वार और गंगासागर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. संगम में बुधवार को 85 लाख लोगों ने स्नान किया. स्नान वाली जगहों पर सुरक्षा, स्वास्थ्य शिविर और भंडारों की व्यापक व्यवस्था की गई.

Advertisement
देश भर में अलग-अलग जगहों पर मकर संक्रांति स्नान करने पहुंचे रहे लोग (Photo: PTI) देश भर में अलग-अलग जगहों पर मकर संक्रांति स्नान करने पहुंचे रहे लोग (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:44 AM IST

मकर संक्रांति के पावन मौके पर देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है. प्रयागराज के संगम तट पर गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के मिलन स्थल पर सुबह से ही भक्त आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. हरिद्वार के हर की पैड़ी, उज्जैन और पश्चिम बंगाल के गंगासागर में भी हजारों लोग कड़ाके की ठंड की परवाह किए बिना पवित्र स्नान करने के लिए पहुंच रहे हैं. 

Advertisement

प्रयागराज में बुधवार शाम तक करीब 85 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान पूरा कर लिया था, जबकि गुरुवार को मुख्य स्नान पर्व के अवसर पर यह संख्या 1.5 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है. आज सुबह से अब तक करीब 15 लाख लोग स्नान कर चुके हैं.

प्रयागराज प्रशासन ने भीड़ कंट्रोल और सुरक्षा के लिए 10,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए हैं. इसके साथ ही तमाम जगहों पर भंडारे और चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित की गई.

प्रयागराज में संगम तट पर उमड़ी भीड़

प्रयागराज में माघ मेला 2026 के तहत मकर संक्रांति का विशेष स्नान बुधवार आधी रात से ही शुरू हो गया. मंडल आयुक्त सौम्या अग्रवाल के मुताबिक, बुधवार शाम तक 85 लाख भक्त स्नान कर चुके थे. अयोध्या से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि यहां सड़कें और घाटों की व्यवस्था बेहतरीन है. प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए 42 अस्थायी पार्किंग बनाई हैं, जिनमें एक लाख से अधिक वाहन खड़े हो सकते हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर रोटी क्यों नहीं बनती? ‘खिचड़ी’ बनने की वजह जानकर चौंक जाएंगे

हरिद्वार और गंगासागर में उत्साह

हरिद्वार के हर की पैड़ी पर भी भक्तों का तांता लगा हुआ है. वहीं, पश्चिम बंगाल के गंगासागर में गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम पर हजारों लोग सदियों पुरानी परंपरा को निभा रहे हैं. सभी जगहों पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें और सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं, जिससे उत्सव शांतिपूर्वक संपन्न हो सके.

97 साल पुरानी 'खिचड़ी भंडारा' परंपरा

हिमाचल के तत्तापानी में सतलुज नदी के किनारे दुर्गा देवी बिहारी लाल बिरोचन लाल चैरिटेबल ट्रस्ट (DDBL) ने 97 साल पुरानी परंपरा को जीवित रखते हुए 'खिचड़ी भंडारा' आयोजित किया. यहां करीब 3,000 लोगों को घी वाली खिचड़ी परोसी गई. इसके साथ ही आरोग्य भारती के सहयोग से एक मुफ्त आयुर्वेद स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया, जिसमें 100 मरीजों की जांच कर उन्हें दवाइयां दी गईं.

(एजेंसी के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें: Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर सुबह इतने बजे से पहले कर लें स्नान, बीत न जाए ये शुभ घड़ी

 
---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement