संसद में चल रहे बजट सेशन में ब्रेक के बाद संसद की कार्यवाही आज फिर से शुरू हो रही है. सदन में स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के द्वारा लाए गए एक औपचारिक प्रस्ताव पर चर्चा के साथ शुरू होगी. बीजेपी की लीडरशिप वाली NDA की ट्रेजरी बेंच विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर जवाबी हमले की तैयारी कर रही है.
आज का बड़ा एजेंडा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ INDIA ब्लॉक के 118 MPs के सपोर्ट वाला नो-कॉन्फिडेंस मोशन है. विपक्ष ने बिरला पर 'पूरी तरह से पार्टीबाज़ी' करने का आरोप लगाया है और कहा है कि उन्होंने उनकी आवाज़ दबाई है और रूलिंग भारतीय जनता पार्टी (BJP) का साथ दिया है.
चुनाव वाले पश्चिम बंगाल की रूलिंग पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने शुरू में नोटिस पर साइन करने में हिचकिचाहट दिखाई, लेकिन पार्टी ने कन्फर्म किया है कि उसके MPs इस प्रस्ताव का सपोर्ट करेंगे.
कैसे हटाए जा सकते हैं लोकसभा स्पीकर?
विपक्ष ने ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा है. विपक्षी पार्टियों ने नियम 94 (C) के तहत स्पीकर को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव नोटिस दिया है.
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आर्टिकल 94 (C) में क्या प्रावधान हैं?
लोकसभा के स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को पद से हटाने के लिए संविधान में एक प्रक्रिया बनाई गई है. लोकसभा अपने कुल मौजूदा सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित करके स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को हटा सकती है, लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि प्रस्ताव लाने से करीब 14 दिन पहले नोटिस दिया गया हो. ऐसा प्रस्ताव लाने के इरादे के बारे में सेक्रेटरी जनरल को लिखकर करीब 14 दिन पहले नोटिस देना होता है. नोटिस देने वाला सदस्य नोटिस के 14 दिन बाद दी गई तारीख पर प्रस्ताव लाता है.
अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के बाद वोटिंग होगी, जिसमें लोकसभा के कुल मेंबरशिप की मेजॉरिटी के जरिए फैसला होगा. अगर प्रस्ताव पास होता है, तो स्पीकर को हटाया जा सकता है.
नियम के मुताबिक, प्रस्ताव पर तभी विचार और चर्चा की जा सकती है, जब इसे करीब 50 सदस्यों का समर्थन मिला हो. जब लोकसभा स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में विचाराधीन होता है, तो वह सदन की बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकता, भले ही वह सदन में मौजूद हो.
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इस दौरान स्पीकर सदन की कार्यवाही में बोल सकता है और हिस्सा ले सकता है. पहली बार में वोट दे सकता है. हालांकि, वोट बराबर होने की स्थिति में ऐसा नहीं किया जा सकता.
गौर करने वाली बात यह है कि लोकसभा के महासचिव को सौंपे गए नोटिस के बाद ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही के संचालन से अलग कर लिया था.
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